नियमितता दिलाएगी ओलंपिक का टिकट

Aug 5th, 2016 12:15 am

newsभूपिंदर सिंह

लेखक, पेनलटी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं

हिमाचल के धावकों व धाविकाओं को दृढ़ निश्चय से लंबे समय तक अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखें। फिर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक तालिका में लाते हुए ओलंपिक तक का सफर पूरा करें। इसके लिए इनके अभिभावकों-प्रशिक्षकों को भी पूरा-पूरा सहयोग देना होगा…

ओलंपिक खेल संसार का सबसे बड़ा खेल मेला है। फ्रांस के शिक्षाविद वैरों पिपरे ही कुवर्तेन ने 23 जून, 1894 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना की तथा दो वर्ष बाद 1896 में एथेंस में आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत 43 खेलों में 14 देशों के 241 खिलाडि़यों से हुई थी। आज इस खेल उत्सव में लगभग दस हजार खिलाड़ी भाग लेते हैं। पांच वृत्तों का आपस में जुड़े होना ओलंपिक का चिन्ह है, जो पांच महारथियों में आपसी भाईचारा तथा मैत्री को दर्शाता है। ओलंपिक खेलों में भाग लेना भी अपने आप में बहुत बड़ा लक्ष्य है। विश्व स्तर पर क्वालिफाई मार्क पार कर ही इन खेलों मे भाग लिया जा सकता है।

पिछले कॉलम में हिमाचल के ओलंपिक में भाग लिए खिलाडि़यों का नाम या आज इस कॉलम में उनकी बात है, जो ओलंपिक का सफर थोड़े से अंतर से पूरा न कर सके। वर्ष 1984 नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के लाल सिंथेटिक ट्रैक पर अखिल भारतीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता, जो 1984 लांस एंजल्स ओलंपिक खेलों के लिए अंतिम चयन प्रतियोगिता थी, में हिमाचल की सुमन रावत ने 3000 मीटर की दौड़ में तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ धाविका सुरजीत कौर को हराकर रिकार्ड समय में स्वर्ण पदक हिमाचल की झोली में डाला, मगर वह थोड़े से अंतर से क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं। इस प्रतियोगिता में सुमन रावत ने 1500 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, मगर ओलंपिक का टिकट प्राप्त नहीं कर सकी। सुमन रावत ने अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकतर शिमला की सड़कों पर दौड़ कर पूरा किया था। हिमाचल में प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने की प्रेरणा देने वाली यही धाविका रही हैं। 20 वर्ष बाद 2004 चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुई अखिल भारतीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स प्रतियगिता जो 2004 के एथेंस ओलंपिक के लिए चयन प्रतियोगिता भी थी, में हिमाचल प्रदेश की तरफ से पुष्पा ठाकुर ने 400 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया। उस समय भारत की 4म400 मीटर रिले टीम ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुकी थी। इस रिले टीम की पहली चार धाविकाएं प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए यूरोप भेज दी थीं। रिले टीम में छह धाविकाएं होती हैं। अन्य दो धाविकाओं के लिए यह अखिल भारतीय अंतरराज्यीय एथलेटिक प्रतियोगिता आखिरी परीक्षा थी। 400 मीटर की फाइनल दौड़ में पुष्पा ठाकुर केरल की जिन्सी फिलिप्स, आंध्र प्रदेश की एस गीता तथा पंजाब की सागरदीप कौर जैसी सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय धाविकाओं के साथ दौड़ रही थी। ये धाविकाएं पिछले चार वर्षों से राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थीं।

पुष्पा ठाकुर हमीरपुर में सिथेंटिक ट्रैक के लिए खोदे गए मैदान की धूल में प्रशिक्षण प्राप्त करके यहां तक पहुंची थी। हमीरपुर में ट्रैक न होने के कारण गति का सही अनुमान लगाने के लिए उस समय की सबसे अच्छी धाविका जिन्सी फिलिप्स को पुष्पा ठाकुर ने चुना और 300 मीटर तक बहुत तेज उसके साथ दौड़ गईं, जिन्सी फिलिप्स को तो बीच में ही दौड़ छोड़नी पड़ी, मगर पुष्पा ठाकुर को भी तीसरे स्थान पर दौड़ खत्म कर इसकी कीमत चुकानी पड़ी। तेज गति की दौड़ में पुष्पा ठाकुर हिमाचल को राष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक तो दिलाने में कामयाब हो गई, मगर ओलंपिक का टिकट पहले व दूसरे स्थान पर आईएस गीता व सागरदीप कौर को मिला। राज्य में अच्छा ट्रैक न होने के कारण यह धाविका ओलंपिक का सफर पूरा नहीं कर पाई थीं। पुष्पा ठाकुर तथा सुमन रावत, इन दोनों धाविकाओं ने हिमाचल में रहकर अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखा तथा हिमाचल को एथलेटिक्स में गौरव दिलाया।

आज भी तेज गति की दौड़ों के हिमाचली रिकार्ड पुष्पा ठाकुर के नाम हैं तथा मध्यम व लंबी दूरी की दौड़ों के रिकार्ड सुमन रावत के नाम हैं। सुमन रावत आजकल राज्य युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में संयुक्त निदेशक हैं तथा पुष्पा ठाकुर जिलाधीश कार्यालय हमीरपुर में अधीक्षक ग्रेड-दो के पद पर कार्यरत हैं। आज हिमाचल में एक नहीं दो सिथेंटिक ट्रैक हमीरपुर तथा धर्मशाला में बिछे हैं। बिलासपुर तथा शिलारू में जल्द ही बिछने जा रहे हैं। तीन खेल छात्रावास हैं, जहां एथलेटिक्स हैं तथा लगभग 25 राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से प्रशिक्षित प्रशिक्षक खेल तथा अन्य विभागों में कार्यरत हैं। हिमाचल के धावकों व धाविकाओं को दृढ़ निश्चय से लंबे समय तक अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखते हुए हिमाचल का नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक तालिका में लाते हुए ओलंपिक तक का सफर पूरा करना होगा। इसके लिए इनके अभिभावकों तथा प्रशिक्षकों को भी पूरा-पूरा सहयोग देना होगा।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

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लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय, ई-मेल आईडी तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।                              

-संपादक

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