खेल पर भारी सरकारी नौकरी की चाह

Sep 9th, 2016 12:05 am

newsभूपिंदर सिंह

(लेखक, पेनलटी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं)

हिमाचल के युवक रोज सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं, मगर अधिकतर सेना तथा सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए ही अभ्यास करते हैं। अच्छी धाविकाएं भी राज्य पुलिस तथा वन विभाग में भर्ती होकर चली जा रही हैं। इसलिए विश्वविद्यालय खेलों में बेहतर खिलाडि़यों की कमी हो गई है…

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला  का खेल कैलेंडर लगभग हर वर्ष क्रॉसकंट्री प्रतियोगिता से शुरू होता है। किसी भी खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए खिलाड़ी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्रॉसकंट्री सबसे पहले शुरू की जाती है। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय क्रॉसकंट्री का आयोजन मां रेणुका से 28 किलोमीटर ऊपर पहाड़ पर चढ़कर राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह के परिसर से शुरू हुआ। इस वर्ष धर्मशाला के सरकारी महाविद्यालय की धाविकाओं ने पहले तीन व्यक्तिगत पदकों को आसानी से जीत लिया।

राष्ट्रीय जूनियर 5000 मीटर की स्वर्ण पदक विजेता हिना ठाकुर ने स्वर्ण, गार्गी शर्मा ने रजत तथा मनीशा ठाकुर ने कांस्य पदक जीतकर अपने प्रशिक्षक केहर सिंह पटियाल का नाम ऊंचा किया। विजेता ट्रॉफी भी महिला वर्ग में एक बार फिर धर्मशाला ने जीती। उपविजेता ट्रॉफी काफी देर बाद आरकेएमवी को मिली। पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक पीजी सेंटर धर्मशाला के अनीष, रजत पदक मंडी महाविद्यालय के रमेश तथा कांस्य पदक बिलासपुर के विजय को मिला। विजेता ट्रॉफी पर एक बार फिर जोगिंद्रनगर के सरकारी महाविद्यालय ने कब्जा जमाया। उपविजेता ट्रॉफी राजकीय महाविद्यालय कुल्लू को मिली। इस प्रतियोगिता में पिछले वर्ष अंडर-18 वर्ष आयु वर्ग राष्ट्रीय क्रॉसकंट्री का व्यक्तिगत कांस्य पदक विजेता सावन बरवाल भी दौड़ा, मगर पिछले छह महीने से चोटिल होने के कारण अच्छा नहीं दौड़ पाया। क्रॉसकंट्री में हिमाचल ने राष्ट्रीय स्तर पर पिछले कई दशकों से अच्छा प्रदर्शन किया है। अर्जुन अवार्डी सुमन रावत ने एशियाई व विश्व क्रॉसकंट्री तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुष वर्ग में अमन सैनी ने भी कई बार एशियाई क्रॉसकंट्री में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल को कई स्वर्ण पदक दिलाए। बिलासपुर की स्वर्गीय कमलेश कुमारी ने राष्ट्रीय क्रॉसकंट्री में हिमाचल के लिए स्वर्ण पदक जीता था।

स्व. रितेश रतन डोगरा व स्वर्गीय वनीता ठाकुर ने भी क्रॉसकंट्री में प्रदेश के लिए पदक जीते थे। सुंदरलाल ने पहली बार प्रदेश के लिए पुरुष वर्ग में आखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय क्रॉसकंट्री का व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता है। रूप देई रमला कलावती व रिगजिन ने भी क्रॉसकंट्री में हिमाचल को सम्मान दिलाया है। जूनियर स्तर पर राष्ट्रीय क्रॉसकंट्री  में भी दो बार हिमाचल की धाविकाओं ने उप विजेता ट्रॉफी दिलाई है। अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय क्रॉसकंट्री प्रतियोगिता में देश के लगभग सभी दो सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में धाविका आशा कुमारी ने दो बार व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर हिमाचल का मान बढ़ाया है।

 2005 में वारंगल में आयोजित आखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय क्रॉसकंट्री  प्रतियोगिता में धर्मशाला महाविद्यालय की आशा ने पहला, हमीरपुर के सरकारी महाविद्यालय की मंजु कुमारी ने तीसरा, हमीरपुर की ही धाविका रीता कुमारी ने चौथा तथा धर्मशाला की धाविका पूनम ने 24वां स्थान प्राप्त कर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला को उपविजेता ट्रॉफी दिलाई थी। 2006 में मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय हमीरपुर के दिनेश कुमार ने क्रमशः महिला व पुरुष के व्यक्तिगत वर्गों में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के लिए स्वर्ण पदक जीते थे। हिमाचल का भू-भाग तथा मध्यम जलवायु में लंबी दूरी की दौड़ों के लिए बहुत ही उपयुक्त हैं। हिमाचल प्रदेश से अधिकतर धावक व धाविकाएं राष्ट्रीय स्तर पर क्रॉसकंट्री में ही अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं। पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल के युवक रोज सुबह शाम सड़कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं, मगर ये सब अधिकतर सेना तथा सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए ही अभ्यास करते हैं। अच्छी धाविकाएं भी राज्य पुलिस तथा वन विभाग में भर्ती होकर चली जा रही हैं। इसलिए विश्वविद्यालय खेलों में पिछले आठ-दस वर्षों से अच्छे स्तर के खिलाडि़यों की कमी आम बात हो गई है। यदि हम भविष्य के लिए बेहतर धावक-धाविकाएं चाहते हैं, तो इस विषय पर खेल विभाग को विचार करना होगा।

हिमाचल प्रदेश में अगर स्कूली स्तर पर लंबी दूरी की दौड़ों के लिए योजना बनाई जाती है तो भविष्य में हिमाचल प्रदेश देश को अच्छे मध्यम व लंबी दूरी के धावक व धाविकाएं दे सकता है। राज्य के खेल छात्रावासों में भी अधिकतर मध्यम व लंबी दूरी के धावक व धाविकाओं को दाखिला देना चाहिए। शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर, कुल्लू, मंडी तथा चंबा जिला के ऊपरी भागों में पैदा हुए धावक व धाविकाओं से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा सकती है। इस सब के लिए राज्य एथलेटिक्स संघ, राज्य स्कूली शारीरिक शिक्षक तथा राज्य खेल विभाग को मिलकर लंबी वैज्ञानिक चर्चा कर मध्यम व लंबी दूरी की दौड़ों के लिए लंबी अवधि की योजना बनाएं, तभी भविष्य के एशियाई व ओलंपिक खेलों के पदक विजेता धावक व धाविकाएं हिमाचल भारत वर्ष को दे सकता है।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

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