खेल प्रशिक्षकों को भी सम्मान दे सरकार

news भूपिंदर सिंह

(लेखक, पेनल्टी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं)

हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द राज्य खेल परिषद की बैठक बुलाने तथा उसमें उत्कृष्ट खिलाडि़यों के प्रशिक्षकों के लिए नया अवार्ड बनाने का प्रस्ताव पास कर राज्य के प्रशिक्षकों को उनकी सेवाओं के लिए उचित सम्मान दे…

राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार का खेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर खिलाड़ी को जहां अर्जुन अवार्ड देता है, वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी के प्रशिक्षक को द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित करता है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश अपने सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को गुरु वशिष्ठ अवार्ड से नवाजता है। हिमाचल प्रदेश में खेलों का स्तर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले अभी तक बहुत नीचे रहा है, इसलिए हिमाचल में खेलों को सम्मानजनक स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षकों की भूमिका सबसे प्रमुख है, क्योंकि हिमाचल में अभी तक विभिन्न खेलों के लिए अगर प्ले फील्ड बन भी चुकी हैं, तो वहां शेष साजो सामान उपलब्ध नहीं है। हमीरपुर तथा धर्मशाला में सिथेंटिक ट्रैक तो बिछ चुके हैं, मगर उनमें उपयुक्त होने वाले उपकरण ही नहीं हैं।

प्रदेश में एक भी स्तरीय टेक्नो जिम किसी भी जिले में नहीं है। ऐसे में प्रशिक्षक का कार्य बहुत बढ़ जाता है कि वह कैसे जुगाड़ लगाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक दिलाता है। हिमाचल के लिए ओलंपिक खेलों में होने वाली स्पर्धाओं या भारत की तरफ से खेलते हुए किसी अन्य प्रतियोगिता में पदक जीतना बेहद कठिन है। ऐसे में इन राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में यदि कोई हिमाचली खिलाड़ी, हिमाचल में प्रशिक्षण लेते हुए भारत के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक जीतता है, तो उसके प्रशिक्षक को सम्मानित करने के लिए अवार्ड तो देना ही चाहिए। हिमाचल में खिलाड़ी को तो उसके राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बदले आठ-दस वर्ष बाद ही परशुराम अवार्ड मिल जाता है, मगर उनके प्रशिक्षकों को सम्मान के तौर पर खिलाड़ी के बराबर धनराशि तो दे दी जाती है, मगर उन्हें कोई भी प्रमाण पत्र या अवार्ड नहीं दिया जाता। वर्ष 2012 में हुए सम्मान समारोह में एथलेटिक, मुक्केबाजी तथा कबड्डी के प्रशिक्षकों को परशुराम अवार्ड के समकक्ष पचास-पचास हजार रुपए की नकद राशि तो दे दी गई थी, मगर उन प्रशिक्षकों को कोई भी अवार्ड या सम्मान पत्र नहीं दिया गया था।

 2012 में यह समारोह दस वर्ष बाद हुआ था। अब चार वर्ष बीत चुके हैं, मगर राज्य में किसी भी उत्कृष्ट खिलाड़ी को परशुराम अवार्ड नहीं दिया गया है। परशुराम अवार्ड के लिए आवेदन करने वाले खिलाड़ी का चयन केवल हिमाचल का प्रतिनिधित्व कर निम्नलिखित उपलब्धियों को अर्जित करने पर होता है। आवेदक खिलाड़ी ने वरिष्ठ राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में राज्य के लिए कोई पदक जीता हो या कम से कम लगातार पांच वर्षों तक राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करते हुए सेमीफाइनल तक खेला हो। मूल हिमाचली जो राष्ट्रीय स्तर हिमाचल की तरफ से नहीं खेलता है, उसे यह अवार्ड नहीं दिया जाता है। हां, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने पर लाखों रुपए की इनामी राशि जरूर राज्य देता है, मगर परशुराम अवार्ड हिमाचल का राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतने वाले खिलाड़ी को ही दिया जाता है।

कम सुविधाओं वाले राज्य हिमाचल प्रदेश से यदि कोई प्रशिक्षक अपने दम पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक दिला रहा है, तो उस प्रशिक्षक को अवार्ड व सम्मान पत्र जरूर मिलना चाहिए। अगर प्रदेश सरकार किसी प्रशिक्षक को उसकी सेवाओं के लिए सम्मानित करती है, तो इससे उनको भविष्य में और अधिक मेहनत करने की भी प्रेरणा मिलती है। राज्य के प्रशिक्षक व खेल प्रेमी इस विषय पर पिछले दो दशकों से आवाज उठा रहे हैं, मगर राज्य युवा सेवाएं एवं खेल विभाग, जो राज्य खेल परिषद के सचिवालय के रूप में भी कार्य करता है, इस विषय पर अपने कान व आंखें दोनों बंद किए हुए है।

हिमाचल जैसे राज्य में जहां खेल सुविधाओं का अभाव है, वरिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए आठ से दस वर्ष का प्रशिक्षण कार्यक्रम चाहिए होता है। इतने लंबे समय तक खिलाड़ी को मैदान में ठहरने के लिए प्रेरित करने व उसके साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदार बनने वाले प्रशिक्षक को अवार्ड देना तो बनता ही है। हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द राज्य खेल परिषद की बैठक बुलाने तथा उसमें उत्कृष्ट खिलाडि़यों के प्रशिक्षकों के लिए नया अवार्ड बनाने का प्रस्ताव पास कर राज्य के प्रशिक्षकों को उनकी सेवाओं के लिए उचित सम्मान दे। उसके बाद जल्द से जल्द खेल सम्मान समारोह आयोजित कर राज्य के उत्कृष्ट खिलाडि़यों व उनके प्रशिक्षकों को अवार्ड प्रदान करे।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय, ई-मेल आईडी तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

 -संपादक

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