तेज धावकों को गढ़ता रहा है हिमाचल

news भूपिंदर सिंह

(लेखक, पेनल्टी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं)

2007 में बंगलूर में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स में तेज गति, मध्यम व लंबी दूरी की दौड़ों के साथ-साथ प्रक्षेपण में भी पदक जीतकर देश के कई खेल विशेषज्ञों का भ्रम तोड़ दिया था कि हिमाचल में सब तरह के धावक नहीं हो सकते हैं…

हिमाचल प्रदेश में जब से शिमला विश्वविद्यालय बना है, हर वर्ष एथलेटिक्स की अंतरमहाविद्यालय प्रतियोगिता सलीके से आयोजित होती रही है। इस बार यह प्रतियोगिता हमीरपुर के सिंथेटिक ट्रैक पर छह से आठ दिसंबर तक आयोजित होगी। अंतरमहाविद्यालय स्तर पर राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर का दबदबा पिछले तीन दशकों से चला आ रहा है। महिला वर्ग के तो सभी ट्रैक रिकार्ड हमीरपुर के नाम दर्ज हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी अधिकतर हमीरपुर के धावक व धाविकाओं ने उम्दा प्रदर्शन कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए यह एथलेटिक मीट चयन ट्रायल भी होगा। हिमाचल प्रदेश के धावकों व धाविकाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर अंतरविश्वविद्यालय एथलीट में बहुत ही कम पदक जीते हैं। 250 विश्वविद्यालयों की इस भारत की सबसे बड़ी भागीदारी वाली प्रतियोगिता में सबसे पहले हिमाचल के लिए पदक ऊना महाविद्यालय के भवानी अग्निहोत्री ने लंबी दूरी की दौड़ों में तीन दशक पूर्व ही जीत लिया था। उसके महिला वर्ग में भी आरकेएमवी की सुमन रावत ने लंबी दूरी की दौड़ों में पदक जीतकर भविष्य की स्टार धाविका होने का परिचय दिया था। आगे चलकर एशियाई खेलों में 3000 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक जीतकर अर्जुन अवार्ड भी पाया। आजकल यह धाविका युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में संयुक्त निदेशक हैं। 1989 में बाबा बालकनाथ महाविद्यालय चकमोह जिला हमीरपुर के महाविद्यालय की धाविका स्वर्गीय  कमलेश कुमारी ने 1500 मीटर की दौड़ में अखिल भारतीय अंतरविश्वविद्यालय एथलेटिक्स का रिकार्ड बनाया था। बाद में राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल के लिए पदक जीतने पर इस धाविका को परशुराम अवार्ड से भी नवाजा गया था। 1994 में जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय अंतरविश्वविद्यालय  एथलेटिक्स में हमीरपुर महाविद्यालय की पुष्पा ठाकुर ने 800 मीटर की दौड़ में अंतर विश्वविद्यालय रिकार्ड की बराबरी कर ली थी। इस प्रतियोगिता में पुष्पा ठाकुर ने रजत पदक हिमाचल के लिए जीता था।

इसी प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर इसका चयन राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए हो गया था, मगर सड़क दुर्घटना में चोटिल होने के बाद आठ वर्ष उपरांत 2003 में फिर टै्रक पर वापसी कर 2004 ओलंपिक के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में स्थान बनाकर अंतिम ट्रायल व राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 400 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक भी जीता। इस धाविका को भी बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सरकार ने परशुराम अवार्ड से नवाजा है। बिलासपुर महाविद्यालय के अमन सैणी ने लंबी दूरी की दौड़ों में अंतरविश्वविद्यालय स्तर पर कई पदक जीते हैं। बाद में राष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक जीतते हुए हिमाचल सरकार द्वारा परशुराम अवार्ड से सम्मानित हुआ। यह धावक इस समय पंजाब पुलिस में निरीक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहा है। प्रवीण कुमार 1500 मीटर  व राकेश कुमार ने बीस किलोमीटर दौड़ में अपने-अपने समय में कांस्य पदक जीते थे। राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के दिनेश कुमार ने पांच हजार मीटर दौड़ में दो बार कांस्य पदक जीते हैं। धर्मशाला महाविद्यालय की आशा कुमारी ने 2005 की अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स  में पांच हजार, सात हजार तथा दस हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीतकर सर्वश्रेष्ठ धाविका का ताज पहना था। 2007 में बंगलूर में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स में तेज गति, मध्यम व लंबी दूरी की दौड़ों के साथ-साथ प्रक्षेपण में भी पदक जीतकर देश के कई खेल विशेषज्ञों का भ्रम तोड़ दिया था कि हिमाचल में सब तरह के धावक नहीं हो सकते हैं। प्रोमिला ने तेज गति की 200 मीटर दौड़ में रजत, मंजु कुमारी 1500 मीटर व पांच हजार मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर सर्वश्रेष्ठ धाविका भी घोषित हुई थी। यहीं से ये चारों धाविकाएं 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए लगे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए चयनित हो गई थीं। संजो देवी ने आगे चलकर  कई राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में स्वर्ण तथा अन्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाते हुए परशुराम अवार्ड भी पाया है।

2012-13 पटियाला में आयोजित अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स में हमीरपुर महाविद्यालय की ज्योति ने 400 मीटर की दौड़ में प्रदेश विश्वविद्यालय के लिए कांस्य पदक जीता था। इन चार वर्षों में अब कोई भी धावक प्रदेश के लिए पदक नहीं जीत सका। इस बार धर्मशाला महाविद्यालय की हिना ठाकुर ने लंबी दूरी तथा रिया से तेज गति की दौड़ में पदक की उम्मीद की जा सकती है। पुरुष वर्ग में जोगिंद्रनगर महाविद्यालय के सावन बरवाल से भी पदक की आशा की जा सकती है। देखते हैं और कौन-कौन धावक हमीरपुर में आयोजित इस वर्ष की एथलेटिक्स मीट में क्वालिफाई कर अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स मीट से हिमाचल के लिए पदक जीतकर स्टार धावकों की सूची में अपना नाम दर्ज करवाता है।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

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