दिखने लगा है सुविधाओं का असर

भूपिंदर सिंह

( लेखक, पेनल्टी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं )

हिमाचल के पास आज विश्व स्तरीय प्ले फील्डज हैं। इन पर प्रशिक्षण प्राप्त कर धावक व धाविकाएं अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। साई खेल छात्रावास की धाविकाओं को तो आंगन में ही अब सुविधा है। हिमाचल के प्रशिक्षकों व शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक प्रतिभाओं तक पहुंचें…

हिमाचल प्रदेश में इस समय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला कला, विज्ञान व अन्य विद्याओं में सौ से भी अधिक महाविद्यालयों में शिक्षा दिला रहा है। पूरे प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी इस एकमात्र सरकारी विश्वविद्यालय के द्वारा हर वर्ष खेल व युवा मामलों की परिषद के माध्यम से विभिन्न खेलों की अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। उनमें एथलेटिक्स सबसे अनिवार्य प्रतियोगिता है, जो हर वर्ष करवाई जाती है। पिछले तीन दशकों के इतिहास को देखते हैं, तो लगभग बीस वर्षों तक राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर का कब्जा इस प्रतियोगिता के ऊपर रहा है। इस वर्ष भी पुरुष वर्ग में विजेता तथा महिला वर्ग में उपविजेता ट्रॉफी हमीरपुर ने ही जाती है। महिला वर्ग में विजेता धर्मशाला तथा पुरुष वर्ग में उपविजेता राजकीय महाविद्यालय देहरी रहा है। पिछले तीन वर्षों से पुरुष वर्ग में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर विजेता ट्रॉफी पर कब्जा जमा रहा है, इसलिए विशेष ट्रॉफी जो विश्वविद्यालय द्वारा लगातार तीन बार विजेता बनने पर दी जाती है, उसका हकदार हमीरपुर हो गया है। इस बार हमीरपुर टीम के प्रशिक्षण व प्रबंधन के लिए वहां के प्राध्यापक शारीरिक शिक्षा डा. पवन वर्मा बधाई के पात्र हैं। इस प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग के लिए सर्वश्रेष्ठ धावक व धाविका का चयन पदकों की संख्या को देखकर नहीं किया गया है। एथलेटिक्स में निर्धारित अंकों के माध्यम से यह चयन इस बार हुआ है। पुरुष वर्ग में सर्वश्रेष्ठ धावक का खिताब राजकीय महाविद्यालय ऊना के धावक विद्यार्थी आयूष शर्मा को मिला है। इस धावक ने 400 मीटर की दौड़ को पहली बार प्रदेश की धरती पर 50 सेकेंड के नीचे 49.9 सेकंड में दौड़कर नया कीर्तिमान बनाया है। आयूष तथा इसके प्रशिक्षक भागीरथ को हिमाचल खेल जगत बधाई देता है।

ऊना के राज्य खेल छात्रावास में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे इस धावक ने राजकीय शिक्षा महाविद्यालय धर्मशाला के अनिल शर्मा तथा राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के संदीप ने संयुक्त 50.2 सेकंड के रिकार्ड को तोड़ा है। अनिल शर्मा ने कई बार अपने रिकार्ड में सुधार करके इसे मिट्टी के ट्रैक पर बनाया था। उस समय राज्य मेें सिंथेटिक ट्रैक नहीं थे। इस प्रतियोगिता में एक और कीर्तिमान पुरुष वर्ग में 1500 मीटर की दौड़ में राजकीय महाविद्यालय जोगिंद्रनगर के धावक सावन बरवाल ने चार मिनट में दौड़कर बनाया है। पहले यह रिकार्ड राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर के धावक प्रवीण शर्मा के नाम दर्ज था, सावन बहुत ही होनहार धावक है। भविष्य में इससे काफी अपेक्षा की जा सकती है। देखते हैं कि इसका प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर इसे किस तरह ऊंचाई तक ले जाता है। बगैर खेल छात्रावास के 1500 मीटर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सावन तथा उसका कोच बधाई के हकदार हैं। देहरी महाविद्यालय के धावक रणधीर 800 की दौड़ में रिकार्ड से कुछ दशमलव सेकंड ही दूर रहा, अगले वर्ष के लिए धावक को शुभकामनाएं। महिला वर्ग में सर्वश्रेष्ठ धाविक का खिताब राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की रिचा शर्मा को मिला, रिचा ने 100 मीटर की दौड़ में सोनिका शर्मा, गौतम कालेज हमीरपुर के कीर्तिमान को तोड़कर 12.2 सेकंड का नया कीर्तिमान बनाया। 20 मीटर की दौड़ में यह धाविका मामूली अंतर से चूक गई। रिचा साई खेल छात्रावास धर्मशाला में प्रशिक्षक केहर सिंह के पास प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। इसी खेल छात्रावास व धर्मशाला महाविद्यालय की धाविका मनीषा ठाकुर ने 24 वर्ष पुराना, पुष्पा ठाकुर राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर का कीर्तिमान तोड़कर दो मिनट, 16 सेकंड का नया कीर्तिमान बनाया।

इनकी एक और टीममेट हिना ठाकुर ने दस हजार मीटर की दौड़ में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर की धाविका रीता कुमारी ने कीर्तिमान को तोड़कर 38 मीटर 02 सेकंड का नया रिकार्ड बनाया। इसकी एक और साथी गार्गी ने भी पुराना रिकार्ड तोड़ कर रजत पदक प्राप्त किया। पुष्पा ठाकुर, प्रवीण शर्मा तथा रीता कुमारी ने ये रिकार्ड मिट्टी में बनाए थे तथा उन वर्षों में इन तीनों धावक-धाविकाओं ने प्रदेश विश्वविद्यालय के लिए अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पदक जीते थे। राजकीय महाविद्यालय, धर्मशाला की धाविकाओं की 4×400 मीटर 4×100 मीटर दौड़ रिले टीमों ने भी राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के नाम बने कीर्तिमानों को अपने नाम लिख लिया। इन प्रतियोगिताआें में पांच नए रिकार्ड बनवाने के लिए प्रशिक्षक केहर सिंह पटियाल को बहुत-बहुत बधाई प्रदेश खेल जगत देता है। हिमाचल प्रदेश के पास आज विश्व स्तरीय प्ले फील्डज हैं। इन पर प्रशिक्षण प्राप्त कर धावक व धाविकाएं अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। आयुष ऊना से आकर हमीरपुर में अभ्यास करता रहा है, तो एथलीट देहरी से धर्मशाला जाकर अपनी तैयारी करता देखा गया है। साई खेल छात्रावास की धाविकाओं को तो आंगन में ही अब सुविधा है। हिमाचल के प्रशिक्षकों व शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक प्रतिभाओं तक पहुंचें। साथ ही धावकों व उनके अभिभावकों को भी आपस में मिलकर चर्चा करनी चाहिए कि खेल में भी करियर हो सकता है। इसलिए वे भर्ती तक ही सीमित न रहकर, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफर तय कर प्रदेश व देश का गौरव बढ़ाएं।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

You might also like