सब साधता है अनुशासन

By: Jan 4th, 2017 12:07 am

cereerलेफ्टिनेंट विक्रम सिंह राणा, योल, जिला कांगड़ा

जल सेना में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने विक्रम सिंह राणा से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

जलसेना में जाने की प्रेरणा किस से मिली?

मुझे प्रेरणा मेरे पिता जी(जो 14 डोगरा रेजिमेंट में रह चुके हैं), दादा (जिन्होंने दूसरा विश्व युद्ध इटली/अफ्रीका में लड़ा)और परदादा (जो सेना की प्रथम गार्ड रेजिमेंट में रहे ) से मिली। घर में सेना का माहौल था, तो सेना के प्रति आकर्षित होना लाजिमी था। अपनी दस जमा दो तक की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय योल से पूरी की और मंजिल की ओर बढ़ गया।

वर्दी पहनने के बाद आप बाकी युवाओं से खुद का मूल्यांकन कैसे करते हैं?

वर्दी पहनने के बाद बाकी युवाओं से खुद को अलग सा महसूस करता हूं। अब लगता है जैसे देश की सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही आन पड़ी है।

पहली बार कब एहसास हुआ कि आपकी मंजिल यही है?

मैने पहले ही बताया है कि घर में सैन्य माहौल था। बचपन से ही सैन्य गतिविधियों को देखता आया, तो मैने भी ठान लिया कि वर्दी पहनूंगा और जीवन को देश के नाम कर दूंगा।

अब कितना बदला हुआ महसूस करते हैं?

वर्दी पहनने के बाद खुद को अनुशासित महसूस करता हूंं। अब जिम्मेदारियों को समझने लगा हूं। कंधे पर स्टार होने का मतलब ही जिम्मेदारी है। अब देश का मतलब समझने लगा हूं। अब देश की सुरक्षा की अहमियत जानने लगा हूं।

जल सेना में जाने के लिए कोई तीन विशेषताएं जो जरूरी हैं

जल सेना में जाने के लिए सबसे पहले तो तेज दिमाग चाहिए। पढ़ाई- लिखाई में ठीक हो, आपकी जल सेना में जाने की रुचि हो, क्यों कि बिना रुचि के आप अपना सौ फीसदी देश को नहीं दे सकते और सबसे जरूरी यह कि आपको मेहनती होना चाहिए।

अपने बदले हुए रूप में आपका राष्ट्र के लिए पैगाम क्या है?

मेरा राष्ट्र के नाम यही पैगाम है कि देश सेवा के लिए वर्दी पहनी है, तो जहां तक संभाव होगा मै अपनी देश के प्रति जिम्म्ेदारियों को पूरी तरह निभाऊंगा। यह स्वाभाविक ही है कि वर्दी पहनने के बाद देश के प्रति प्रेम खुद-ब-खुद उमड़ता है। वर्दी तो एक वजह है देश सेवा की, वैसे तो हम सब को दिल से देशभक्त होना चाहिए।

शैक्षणिक व शारीरिक तैयारियों का संतुलन कैसे बिठाते हैं?

शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ-साथ मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी बहुत जरूरी है। सेना में किसी भी काम के लिए इन दोनों तरह की फिटनेस का बहुत महत्त्व है।

हिमाचली युवा आपके अनुसार कहां मात खाते हैं?

हिमाचल में युवाओं के पिछड़ने का मुख्य कारण यही है कि कोई गाइड करने वाला नहीं होता। बाकी स्टेट में कोचिंग संस्थान काफी मात्रा में हैं, हिमाचल में नाममात्र ही हैं।

जीवन के प्रति आपका अनुशासन क्या है?

जीवन अनुशासित होगा, तभी सफलता पाई जा सकती है। बिना अनुशासन के जिंदगी महज समय काटना ही है, पर जिंदगी में अनुशासन होगा, तो सब कुछ साधा जा सकता है।

– राजेश ग्रोवर, योल