समसामयिकी

By: Jan 4th, 2017 12:07 am

पूर्ण जैविक कृषि राज्य- सिक्किम

cereerदेश का पहला पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम भारतीय कृषि के इतिहास में लगभग 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर जैविक कृषि को अपनाकर देश का पहला पूर्ण जैविक राज्य बन गया है। 12 साल पहले राज्य सरकार ने विधानसभा में घोषणा कर सिक्किम को जैविक कृषि राज्य बनाने का फैसला किया था। इसके बाद कृषि योग्य भूमि के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल और उनकी बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया। इससे किसानों के पास जैविक कृषि अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों व उवर्रकों का इस्तेमाल करने के बजाय परंपरागत तरीके अपनाकर पर्यावरण के साथ तालमेल बनाया जाता है। जैविक खेती से जैव-विविधता को संरक्षण व पर्यावरण रक्षा में दीर्घकाल में मदद मिलती है और साथ ही फसल उत्पादन में भी वृद्धि होती है। जैविक खेती से पर्यावरण संरक्षण होने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा इससे राज्य में पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। सिक्किम में मुख्य रूप से बड़ी इलायची, हल्दी, अदरक, ऑफ-सीजन सब्जियां, फूल, सिक्किम नारंगी, किवी फल, कूटू, धान, मक्का और जौ का उत्पादन होता है। चूंकि सिक्किम के किसान कभी भी रसायनों पर अधिक निर्भर नहीं रहे इसलिए जैविक खेती अपनाने से उपज में कोई कमी नहीं आई। जैविक उत्पादों की विश्वभर में भारी मांग है। बाजार में इन्हें अच्छी कीमत मिलती है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों में इन उत्पादों को काफी पसंद किया जाता है। सिक्किम में लगभग 80 हजार टन कृषि उत्पादों का उत्पादन होता है, जबकि देश में कुल जैविक कृषि उत्पादन 12.40 लाख टन है। देश में मात्र 7.23 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है। प्राचीन काल में, मानव स्वास्थ्य के अनुकूल तथा प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी, जिससे जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान का चक्र निरंतर चलता रहता था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। परंतु वर्तमान स्थिति में बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान के चक्र को प्रभावित कर रहा है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति तो खराब हो ही रही है साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है जिससे मनुष्य के स्वास्थ्य में भी लगातार गिरावट हो रही है। इसलिए उपर्युक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिए गत वर्षों से निरंतर टिकाऊ खेती के सिद्धांत पर जैविक खादों पर आधारित फसल पैदा करने की सिफारिश की जा रही है ताकि हमारा स्वास्थ्य तथा प्राकृतिक वातावरण दोनों ही सुरक्षित रहें।