शिमला में हक के लिए दहाड़े मजदूर

newsशिमला  —  मजदूरों की मांगों को लेकर मंगलवार को शिमला में विशाल रैली निकाली गई। रैली पंचायत भवन से सचिवालय तक निकाली गई। मजदूरों ने सचिवालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान सीटू के राष्ट्रीय सचिव डा. कश्मीर सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि केंद्र व राज्य सरकारें लगातार उद्योगपतियों के पक्ष व मजदूरों के खिलाफ  काम कर रही है। मनरेगा में जहां 50 दिन का कार्य करने पर कल्याण बोर्ड में पंजीकरण किया जाता था, उसे केंद्र की मोदी सरकार ने 90 दिन कर दिया। अब ईपीएफ. का शेयर 12 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत किया जा रहा है। दूसरे केंद्र सरकार ईपीएफ योजना व ईएसआई को राज्य सरकारों के अधीन करने जा रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर भी मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया है। पिछले 14 महीनों से शौंगटोंग प्रोजेक्ट में चल रहा आंदोलन इसका उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मज़दूरों का वेतन केवल छह हजार रुपए है, जबकि दिल्ली सरकार द्वारा 13365 रुपए वेतन दिया जा रहा है। हर बात के लिए पंजाब सरकार की नीति का अनुसरण करने वाली हिमाचल प्रदेश सरकार मजदूरों के मसले पर पंजाब सरकार की तर्ज पर सुविधाएं देने को तैयार नहीं है। सीटू राज्य कमेटी के महासचिव पे्रम गौतम ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आउटसोर्स व कांट्रैक्ट वर्कर्ज का शोषण किया जा रहा है। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील व आशा वर्कर्ज को देश की तुलना में प्रदेश में सबसे कम वेतन दिया जा रहा है।
श्रमिक कल्याण बोर्ड का घेराव
सचिवालय में प्रदर्शन के बाद हज़ारों मज़दूरों श्रमिक कल्याण बोर्ड का घेराव किया गया। घेराव के बाद सीटू राज्य कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बोर्ड के अधिकारियों से मिला। अधिकारियों ने मजदूरों की मांगों को सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया। सीटू का  प्रतिनिधिमंडल डा. कशमीर सिंह ठाकुर, प्रेम गौतम, जगत राम व विजेंद्र मेहरा के नेतृत्व में आर. डी. धीमान, प्रधान सचिव श्रम एवं रोजगार विभाग से मिला व उन्हें 12 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्रमिक कल्याण बोर्ड में सभी जिलों में अधिकारियों की जल्द नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिक कल्याण बोर्ड में मजदूरों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा तथा कल्याण बोर्ड में मजदूरों के पंजीकरण करने के लिए भवन व अन्य निर्माण कार्य के नियोजक व मालिक द्वारा श्रमिक कल्याण बोर्ड में सेस जमा करने की शर्त नहीं होगी। इस संदर्भ में सभी श्रम अधिकारियों को स्पष्टीकरण जल्दी भेजा जाएगा।
ये हैं मांगें
मजदूरों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रदेश में 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन घोषित किया जाए, श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए, 50 दिन का कार्य पूर्ण करने वाले मनरेगा मज़दूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड का सदस्य बनाया जाए, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील व आशा वर्कर्ज को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, आंगनबाड़ी वर्कर्ज एवं हैल्पर्ज को हरियाणा की तर्ज पर 8500 व 4500 रुपए वेतन दिया जाए, सभी निर्माण मजदूरों का श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण किया जाए, भवन एवं सन्निर्माण कामागार कल्याण बोर्ड में श्रमिक कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति तुरंत की जाए, ठेका प्रथा बंद की जाए व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाए।

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