मने पर खतरा बरकरार, नहीं आए तारणहार

हफ्ता बीत जाने के बाद भी शिमला से धंस रहे गांव की सुध लेने नहीं पहुंचे भू-वैज्ञानिक

newsकाजा — जनजातीय जिला लाहुल एवं स्पीति के काजा उपमंडल के तहत आने वाले मने गांव पर अभी भी खतरा बरकरार है। गांव में लगातार पानी का रिसाव होने से जमीन लगातार धंसती जा रही है। हालांकि प्रशासन ने मने गांव के नीचे बनी झील से पानी को तो निकाल दिया है, लेकिन लगातार पानी का रिसाव होने के चलते मने गांव के लोग अभी भी रिश्तेदारों के यहां पनाह लिए हुए हैं। मने  के 35 घरों के सैकड़ों लोगों का वजूद इस समय खतरे में है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रशासन और प्रदेश सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। पिछले एक सप्ताह से मने गांव पर खतरा बना हुआ है। काजा प्रशासन ने बाकायदा इसकी सूचना शिमला में सरकार को दे दी थी। वहीं, सरकार ने भू-वैज्ञानिकों को स्थिति का जायजा लेने के आदेश भी दिए हुए थे, लेकिन अभी तक भू-वैज्ञानिक मने गांव में नहीं पहुंच पाए हैं। वहीं, अभी भी कुछ ग्रामीण गांव में ही रह रहे हैं, जिस तरह से गांव में पानी का रिसाव हो रहा है, उससे लगातार कृषि योग्य भूमि धंसती जा रही है। बुजुर्ग अपने गांव को छोड़ने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार नहीं हो रहे हैं। हालांकि जिन घरों में दरारें आई हैं ,उन घरों को तो प्रशासन ने खाली करवा लिया है तथा उनके पुनर्स्थापन की योजना भी बनाई जा रही है। वहीं,   ग्रामीणों की मानें तो सरकार की ओर से सहायता राशि भी प्रदान की जानी चाहिए ताकि वह अपना जीवन यापन सही ढंग से कर सकें।उधर, अतिरिक्त उपायुक्त काजा विक्रम नेगी का कहना है कि प्रशासन लगातार मने गांव पर नजर बनाए हुए है। गांव में बनी झील से  आईपीएच विभाग ने फिलहाल पानी निकाल दिया है, लेकिन पानी के लगातार रिसाव से झील में पानी भर रहा है। बहरहाल मने गांव में खतरा बरकरार है। ग्रामीणों में खौफ बना हुआ है।

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