प्रदेश में विकास का सिरमौर बना नगरोटा

छूघेरा-घोड़व-रजियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान बोले जीएस बाली, अग्रणी बनाने का सपना

नगरोटा बगवां —  नगरोटा बगवां विस क्षेत्र को प्रदेश भर में हर क्षेत्र में अग्रणी बनाना मेरा सपना था, जिसे पूरा करने के लिए मेरे प्रयास जारी रहेंगे । यह शब्द नगरोटा बगवां के वर्तमान विधायक एवं कांग्रेस प्रत्याशी जीएस बाली ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहे । उन्होंने कहा कि वह विस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास का दूरदर्शी दृष्टिकोण लेकर राजनीति में आए थे, जिसे क्षेत्रवासियों के आशीर्वाद से पूरा करने में पूरी तन्मयता के साथ जुटे हैं । उन्होंने कहा कि अभी क्षेत्र के लिए बहुत कुछ करना बाकी है, जिसकी उन्हें चिंता है । उन्होंने कहा कि नगरोटा की जनता हमेशा विकास की पक्षधर रही है तथा उसी शक्ति व ऊर्जा को जनकल्याण के लिए समर्पित करना मेरा संकल्प है ।  अपनी सभाओं में जीएस बाली विकास कार्यों का लेखा-जोखा साझा करके वोटरों को रोमांचित कर रहे हैं। वह अपने चिरपरिचित अंदाज में नगरोटा की 20 वर्ष पुरानी तस्वीर पेश करते हैं। उसके बाद वह विकास का मौजूदा आंकड़ा साझा करके वोटरों को उत्साहित कर देते हैं। छूघेराए, घोड़व, रजियाणा,  सुन्ही व सरोत्री सहित करीब दर्जन भर नुक्कड़ जनसभाओं को संबोधित करते हुए  कहा कि एसडीएम आफिस, दो-दो तहसील कार्यालय, मिनी सचिवालय, बस अड्डा, बस डिपो, वेलफेयर आफिस,  आईपीएच एवं लोक निर्माण विभाग के डिवीजन सहित विकास कार्यों की लंबी लिस्ट है, जो इस क्षेत्र को प्रदेश भर में अग्रणी बनाती है।

शिक्षा हब बना नगरोटा बगवां

जीएस बाली ने कहा कि नगरोटा का प्रतिनिधित्व संभालते वक्त यहां शिक्षा के नाम पर महज दो सीनियर सेकेंडरी स्कूल थे। अब इसका आंकड़ा दो दर्जन के करीब है, जबकि दर्जन भर उच्च शिक्षा संस्थान, जिनमें मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज, कालेज ऑफ आर्किटेक्चर, स्कूल ऑफ  बिजनेस, पीजी कालेज, डिग्री कालेज, फार्मेसी कालेज व दो आईटीआई सहित मॉडर्न आईटीआई स्थापित होने के बाद नगरोटा प्रदेश का शिक्षा हब बन चुका है, जो प्रदेश भर में एक मिसाल है।

घर द्वार हर सुविधा करवाई उपलब्ध

सुन्ही की जनसभा के दौरान बुजुर्ग रामशाही की भावनाएं भी छलक उठीं। उन्होंने कहा कि विकास का यह दौर एक सपना लगता है। पहले कपड़े धोने के लिए खड्ड में जाना पड़ता था, अब घर-घर में नलके हैं। चिकित्सा सुविधा के लिए धर्मशाला व  पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों के लिए कांगड़ा जाना पड़ता था। अब ये सहूलियतें घर के पास मिल रही हैं।

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