शिमला वोटिंग में फिसड्डी

तीन विधानसभा चुनावों में हिमाचल में सबसे कम मतदान दर्ज, नालागढ़-दून प्रदेश भर में अव्वल

मंडी – राजधानी शिमला जहां से सरकार चलती है, प्रदेश के कार्यों और विकास की गाथा लिखी जाती है और जनता अपने नुमाइंदे विधानसभा पहुंचाती है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शिमला शहरी क्षेत्र में ही लगातार तीन विधानसभा चुनावों क्रमशः 2003, 2007 और 2012 में हिमाचल में सबसे कम मतदान दर्ज हुआ है। विदित रहे कि शिमला हिमाचल का सबसे युवा शहर है। इसके बावजूद सबसे कम वोटिंग दर्ज होना चिंताजनक बात है। इसके उल्ट औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ और दून वोटिंग के मामले में प्रदेश भर में लगातार टॉप पर बने हुए हैं। शिमला विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम वोटिंग चुनाव आयोग के लिए भी एक सवाल है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन विधानसभा चुनाव में से दो विधानसभा चुनावों में राजधानी पोलिंग परसेंटेज 50 फीसदी का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। हालांकि गनीमत यह रही कि पिछले विधानसभा चुनाव में शिमला (शहरी) विधानसभा क्षेत्र में पोलिंग परसेंटेज में करीब 12 फीसदी का इजाफा हुआ, लेकिन इस इजाफे के बाद भी शिमला विधानसभा क्षेत्र मतददान फीसदी के मामले में प्रदेश भर में सबसे नीचे ही रहा है। शिमला (ग्रामीण) में भी हालात कुछ खास उत्साहजनक नहीं हैं और पिछली बार की वोटिंग परसेंटेज में दोनों क्षेत्रों में करीब 10 फीसदी का ही अंतर रहा था। इसके उल्ट नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में लगातार दो चुनावों 2003 व 2007 में प्रदेश भर में सबसे ज्यादा मतदान दर्ज हुआ। 2012 में नालागढ़ के साथ लगते दून विधानसभा क्षेत्र ने इसे मात दी और प्रदेश में भर सबसे ज्यादा मतदान में टॉपर बना, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इन दोनों ही विधानसभा में सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशतता के लिए तीनों ही बार काफी करीबी टक्कर रही है। इस बार गौर करने वाली बात रहेगी कि क्या नालागढ़ और दून विधानसभा क्षेत्र वोटिंग के मामले में फिर टॉपर साबित होते हैं या यहां कोई नया विस क्षेत्र बाजी मारता है।

ये रहे मतदान में टॉपर

विधानसभा क्षेत्र       चुनाव वर्ष मतदान

नालागढ़   2003      85.91

नालागढ़   2007      83.18

दून         2012      89.01

यहां सबसे कम वोटिंग

विधानसभा क्षेत्र चुनाव वर्ष मतदान

शिमला    2003      46.14

शिमला    2007      47.20

शिमला    2012      59.21

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