हिमाचली पुरुषार्थ : कुलदीप के संगीत का कायल हुआ हिमाचल

By: Oct 4th, 2017 12:07 am

हिमाचली पुरुषार्थ : कुलदीप के संगीत का कायल हुआ हिमाचलधमाका-2000 का धमाका ऐसा हुआ कि कुलदीप शर्मा रातोंरात हिमाचल के स्टार बन गए। उसके बाद ‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिए’ ने बालीवुड तक पहचान दिला दी। कुलदीप शर्मा का कहना है कि अब इस क्षेत्र में काफी चुनौतियां हैं। कोई प्रोड्यूसर नहीं मिलता। अपना पैसा लगाना पड़ता है। कैसेट्स का जमाना गया। अब गाने पैन ड्राइव में कॉपी होते हैं…

हिमाचली नाटी किंग के नाम से मशहूर हिमाचली लोक गायक कुलदीप शर्मा ने वैसे तो अपनी मेहनत के बूते गायकी में एक मुकाम हासिल किया है, लेकिन इस दिशा में उनकी स्वर्गीय माता का भी बड़ा योगदान रहा है या यूं कहा जाए कि कुलदीप शर्मा को गायकी अपनी माता से विरासत मे मिली है। कुलदीप शर्मा की माता देगो देवी भी प्रदेश की जानी मानी लोक गायिका रहीं। शिमला जिले की ठियोग तहसील के गांव पटरोग मं जन्मे कुलदीप शर्मा के पिता खेतीबाड़ी का काम करते थे। मां लोक गायिका के साथ- साथ घर का कामकाज देखती थीं। कुलदीप की दो छोटी बहनें हैं। उनकी शिक्षा नाहन, मशोबरा और धर्मशाला में हुई। कुलदीप जमा दो तक पढ़े हैं। जब माता को गाते हुए देखते थे, तो इनका भी संगीत के प्रति रुझान हो गया। और नतीजा यह रहा कि 16 साल की उम्र में ही इन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में गाना गाया। कुलदीप शर्मा ने 7वीं कक्षा में स्कूल के कार्यक्रम में गायकी की प्रतियोगिता में भाग लिया और उसमे फर्स्ट आने पर उन्हें कॉपी पेंसिल इनाम में मिली। तब उन्हें महसूस हुआ कि वह अच्छे गायक बन सकते हैं। इस दिशा में उनकी माता जी ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें प्रोत्साहित कर उनका सहयोग दिया। विवाह के बाद पत्नी का भी बड़ा सहयोग रहा। कुलदीप शर्मा का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऑल इंडिया रेडियो पर राजू बबलू हितुए भाईया लोकगीत 1994 मे गाया। कुलदीप शर्मा ने अपने स्टेज कार्यक्रम की शुरुआत 1997 मे धर्मशाला में समर फेस्टिवल से की। अभी तक बाजार में उनके 100 से अधिक ऑडियो और 55 वीडियो एलबम आ चुके हैं। धमाका-2000 का धमाका ऐसा हुआ कि कुलदीप शर्मा रातोंरात हिमाचल के स्टार बन गए। उसके बाद ‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिए’ ने बालीवुड तक पहचान दिला दी। कुलदीप शर्मा का कहना है कि अब इस क्षेत्र में काफी चुनौतियां हैं। कोई प्रोड्यूसर नहीं मिलता। अपना पैसा लगाना पड़ता है। कैसेट्स का जमाना गया। अब गाने पैन ड्राइव में कॉपी होते हैं। इसके समाधान के बारे मं पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने पहाड़ी गाना डॉट कॉम नाम से एक वेबसाइट बनाई है जिस पर गायकों के गाने डाले जाते हैं। भविष्य में पंजाबी सिंगर की तरह हिमाचली सिंगर को भी गाना डाउनलोड करने पर कुछ राशि मिल सकती है। कुलदीप शर्मा चाहते है कि हिमाचल गीत- संगीत को इस मुकाम तक पंहुचाया जाए कि उसकी पंजाबी संगीत की तरह वालीवुड मं अपनी पहचान हो। उनके एक गीत बांठेणो चाली जातरे जातरे को वालीवुड में गाया जा चुका है। कुलदीप शर्मा अपने चाहने वालों को संदेश देते है कि नशे से दूर रहें। वह गायकों से भी आग्रह कर रहे हैं कि नशे को बढ़ावा देने वाला कोई गाना न तो बनाए और न ही उसे गाएं। साफ -सुथरा गाना बनाएं, जिसमें हमारा हिमाचल का लोक संगीत विद्यमान हो।

– दिनेश पुंडीर, पांवटा साहिब

हिमाचली पुरुषार्थ : कुलदीप के संगीत का कायल हुआ हिमाचलजब रू-ब-रू हुए…

सरकार हिमाचली कलाकारों के लिए भी नीति बनाए…

आपके लिए गायकी के क्या मायने हैं?

गायकी मेरे लिए तपस्या है। गायकी को मैं पूजा की तरह समझता हूं।

कब लगा कि कुलदीप शर्मा को संगीत से प्यार हो गया है?

सबसे पहले 7वीं कक्षा में स्कूल के कंपीटीशन में प्रथम रहने पर लगा कि मैं अच्छा गा सकता हूं। उसके बाद 16 साल की उम्र मे ऑल इंडिया रेडियो पर जब गाया, तो संगीत को मैंने पहले प्यार के तौर पर अपना लिया।

संगीत की प्रेरणा मां से मिली, इसके अलावा आपके आदर्श संगीतज्ञ या गायक कौन हैं?

संगीत की प्रेरणा भी अपनी माता से मिली और आदर्श संगीतज्ञ और गायक भी माता जी ही रहीं। उन्हीं के आशीर्वाद की बदौलत आज इस मुकाम पर हूं।

कौन सा पल आपकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया?

जब मेरा पहला हिमाचली वीडियो एलमब ‘नीरू चाली घूमदी’ आया तो इसने मुझे रातोंरात स्टार बना दिया। वही जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन गया।

पहली बार स्टेज पर जब लोगों की तालियों ने स्वागत किया यानी जब लोगों की सराहना मिली?

1997 मे धर्मशाला में समर फेस्टिवल में पहली बार स्टेज पर गया, तो लोगों ने सिर आंखों पर बिठाया। मुझे उस समय बहुत सराहना मिली। ‘दिव्य हिमाचल’ समाचार पत्र ने भी मुझे प्रदेश की जनता के बीच पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

हिमाचली संगीत की खूबियों और खामियों का जिक्र करना हो तो?

हिमाचली लोक गीतों मे बड़ी खूबी है तभी तो मेरा गाया हुआ हिमाचली गीत ‘बाठेणों चाले जातेरे’ को वालीवुड में सुखविंद्र ने गाया। इसके अलावा हिमाचली लोक गीत ‘कुंजू चंचलो गीत’ को भी वालीवुड में ‘हुसन पहाड़ों का’ के रूप में गाया गया है, जो काफी प्रसिद्ध हुआ। यही हिमाचली गीतों की खूबी है कि वह हर स्तर पर पसंद किए जाते हैं। वहीं खामियों के बारे में बात करें, तो हिमाचल में बोली की सबसे बड़ी खामी है। यहां पर हर 10 किलोमीटर के बाद बोली बदलती है, जिससे गीतों को समझना किसी क्षेत्र के लिए मुश्किल भी हो जाता है। हालांकि अब मैं ऐसे गीत बना रहा हूं, जिसे पूरे प्रदेश में अच्छी तरह समझा और सुना जा सकता है।

क्या पूरी तरह जिंदगी को संगीत को ही समर्पित कर दिया है या कोई और जिम्मेदारियां भी हैं?

परिवार के अलावा कोई और जिम्मेदारी नहीं है। क्योंकि मैंने संगीत को पेशे के रूप में चुना है इसलिए जीवन संगीत के लिए ही समर्पित है।

अपनी ही नाटी पर गाते हुए नृत्य का समन्वय कैसे बिठा पाते हैं?

किसी भी चीज को आनंद के साथ करेंगे, तो उसमें अपना ही मजा है। मैं भी स्टेज पर अपने गीत गाते हुए आनंद के साथ नाटी करता हूं, जिसमें कोई मुश्किल नहीं आती।

हिमाचली संगीत के प्रति सरकार से क्या उम्मीदें हैं या जो कमियां खलती हैं?

हिमाचली लोक गायकों को अपने ही प्रदेश में कार्यक्रमों के दौरान उचित समय नही मिल पाता। बाहर से आने वाले कलाकारों को भारी राशि और समय मिलता है, लेकिन लोकल कलाकारों की अनदेखी की कमी सदा खलती रहती है। सरकार को चाहिए कि हर बड़े कार्यक्रम में हिमाचली कलाकारों को 50 फीसदी समय परफॉर्मेंस के लिए दे।

हिमाचली कलाकारों को सांस्कृतिक संध्याओं में कम मेहनताना और कम समय देने बारे आपकी राय?

यह एक परंपरा सी बन गई है कि अपने लोक कलाकारों को कम समय और कम मेहनताना दिया जाए। जबकि सरकार को हिमाचली लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए। आज हिमाचल में कुछ पुराने ऐसे लोक कलाकार हैं, जो सरकार की उपेक्षा के कारण दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हैं। हिमाचल के प्रसिद्ध लोक गीतकार लायक राम रफीक का उदाहरण हमारे सामने है। आज यह कलाकार अपनी दोनों आंखों की रोशनी खो चुके हैं और दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं। खुद मैं भी इनके लिखे 100 से अधिक गीत गा चुका हूं। सरकार को चाहिए कि ऐसे कलाकारों के लिए कोई उचित नीति बनाकर इनके जैसे अन्य कलाकारों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करे। इसके अलावा हिमाचल में कलाकारों की ग्रेडिंग होनी चाहिए। अच्छा गाने वाले कलाकारों को अच्छा मेहनताना मिलना चाहिए।

जब खाली वक्त मिलता है तो जहन मे संगीत के अलावा क्या जन्म लेता है?

मेरी अध्यात्म मे भी रुचि है। खाली समय में मैं किसी सत्संग में जाकर मन को शांत करता हूं। इसके अलावा गीत भी बनाता हूं।

वर्तमान मे कहां व्यस्त हैं और भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

आजकल प्रदेश में कार्यक्रमों का सीजन है। दशहरे और दिवाली के दौरान बहुत कार्यक्रम होते हैं, जिनमें मैं परफॉर्म करता हूं। भविष्य की योजनाओं के बारे में बताऊं, तो मेरा लक्ष्य हिमाचली लोकगीतों का दायरा वालीवुड तक ले जाने का है। मैं चाहता हूं कि हिमाचल का लोकगीत भी पंजाबी संगीत की तरह पूरी दुनिया सुने। हाल ही में कनाडा में मेरा एक गीत गाया गया और आईपीएल में भी मेरे गीत विश्व भर में पंहुच चुके हैं।

कोई एक सपना जो पूरा करने की ख्वाहिश है?

एक ही सपना है कि मैं बालीवुड में गाना गाऊं। इस सपने को मैं जल्द पूरा करूंगा और हिमाचली संगीत को दुनिया को सुनाऊंगा।

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