हिमाचल में जल परिवहन का सपना अधूरा

शिमला – हिमाचल में वाटर हाई-वेज बनाने के सपने साकार नहीं हो सके हैं। पांच साल तक यह प्रोजेक्ट इंतजार में ही फंसा रहा। भले ही गुजरात में जल परिवहन की बड़े स्तर पर क्षमता है, वहां केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा अपने तौर पर भी आधारभूत ढांचा विकसित किया गया हो, मगर हिमाचल में ऐसा ज्यादा कुछ नहीं हो सका है। केंद्र इस बारे में जरा भी गंभीर नहीं रहा, जबकि पर्यटन व औद्योगिक दृष्टि से ऐसे वाटर हाई-वेज हिमाचल में रोजगार के भी नए द्वार खोल सकते थे। इसी वर्ष फरवरी में केंद्र सरकार द्वारा वाटर हाई-वेज के लिए हिमाचल में जो सर्वेयर व प्रोजेक्ट सलाहकार नियुक्त किए गए थे, उन्होंने अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी थी, मगर तब से लेकर आज तक यह प्रोजेक्ट इंतजार में ही फंसा रहा। केंद्र ने इस प्रोजेक्ट के लिए 90ः10 अनुपात की राशि देने का ऐलान किया था। राज्य सरकार का प्रयास था कि बिलासपुर के गोबिंदसागर व कोल डैम में दक्षिण व पश्चिम राज्यों की ही तर्ज पर बड़ी नौकाएं व मोटर बोट्स आवाजाही कर सकें। सौंपी गई रिपोर्ट में इन दोनों ही क्षेत्रों को जल परिवहन के लिए उपयुक्त करार दिया गया। चमेरा व पंडोह को भी इसमें शामिल करने की योजना थी, मगर इनका भी सर्वे तक नहीं हुआ, जबकि पौंग को सुरक्षा कारणों के चलते केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने एनओसी ही नहीं दी थी। भाखड़ा के लिए भी बीबीएमबी ने काफी दबाव बनाया। सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया, मगर राज्य सरकार के प्रयासों से ये दिक्कत भी हल हुई। केंद्र सरकार पहले ही बिहार के पटना, पश्चिम बंगाल, यूपी व कावेरी तटों के लिए यह बड़ी योजना मंजूर कर चुकी है, मगर हिमाचल के लिए यह पांच सालों में सपना ही साबित हुआ। इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट्स व प्रोजेक्ट सलाहकार केंद्र ने इनलैंड वाटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया से नियुक्त किए थे, जिन्होंने यह रिपोर्ट सौंपी है। निर्णय केंद्र सरकार को ही करना था, परिवहन विभाग का इसमें कोई दखल नहीं था। हालांकि प्रदेश में इसे संचालित करने के लिए यह पूरा कार्य परिवहन विभाग के ही तहत किया जाना था। इसी प्रोजेक्ट को स्टडी करने के लिए प्रदेश के अधिकारी केरल व अन्य राज्यों का दौरा करने भी गए थे। इस बारे में केंद्र द्वारा बड़े ऐलान भी किए गए थे, मगर यह प्रोजेक्ट आज तक मंजूर नहीं हो सका।

सुधारे जाने थे घाट

प्रोजेक्ट मंजूर होने पर बिलासपुर के गोबिंदसागर से लेकर भाखड़ा तक और कोल डैम के क्षेत्र में विभिन्न घाटों का सुधार किया जाना था। इसके लिए केंद्र ने उदार वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया था। इससे इन क्षेत्रों के पर्यटन विकास को नई दिशा मिलनी थी, मगर ये सिरे नहीं चढ़ सका।

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