दुर्लभ इतिहास सहेज रही मोती लाल नेहरू लाइब्रेरी

केंद्रीय राज्य पुस्तकालय में सवा लाख पुस्तकों का भंडार, खस्ताहाल इमारत में आधुनिक सुविधाएं

सोलन— माल रोड स्थित मोती लाल नेहरू केंद्रीय राज्य पुस्तकालय देश के प्राचीन इतिहास को संजोकर रख रहा है। इस पुस्तकालय में करीब 200 ऐसी पुस्तकें आज भी मौजूद हैं, जो दुनिया के शायद किसी भी पुस्तकालय में नहीं मिलेंगी। यहां पर 1.20 लाख पुस्तकों का विशाल भंडार है। यह हिमाचल प्रदेश का एकमात्र पुस्तकालय है, जहां इतने बड़े स्तर पर पुस्तकों को रखा गया है।  जानकारी के अनुसार इस पुस्तकालय का शुभारंभ 1959 में  किया गया था। भले की पुस्तकालय का भवन कई दशक पुराना है और बेहद खस्ता हालत में है, लेकिन इसके बावजूद पाठकों को यहां पर आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं। यहां पर पाठकों को कैबिनेट कैटालॉग की सुविधा प्रदान की गई है। इस सुविधा की खास बात यह है कि पाठक कोई भी पुस्तक आसानी से खोज सकते हैं। इस पुस्तकालय में कई ऐसी पुस्तकें भी हैं, जो कि हस्तलिखित हैं। शिमला व पास्ट-प्रेजेंट (1925), फाइव मेंस इन हिमालय (1909), दि हार्ट ऑफ नेपाल (1962), हिमाचल प्रदेश डिस्ट्रिक्ट गैजटीयरस सिरमौर(1969), दि कमेंट्री ऑफ महेश्वरा (1882)  सहित कई ऐसी पुस्तकें हैं, जो बेहद दुर्लभ हैं। एडवर्ड जेबक, एलमम, डनगम फोरबस, सेवन हिडन, एफ काइलहोरन आदि लेखकों की किताबें पुस्तकालय में संजो कर रखी गई हैं। पुस्तकालय में लगभग सभी प्रकार की किताबें मौजूद हैं। इसमें राजनीति, इतिहास, हस्त लिखित कविता व रेफ्रेंस बुक, साहित्य, मुंशी प्रेम चंद की कहानियां, संस्कृति उपन्यास, हिंदी उपन्यास आदि मौजूद है। यहां से कई बार बच्चे किताबों को घर ले जाते हैं। खास बात यह है कि उन्हीं बच्चों को घर के लिए किताबें दी जाती हैं, जो पुस्तकालय के सदस्य होते हैं। इतना ही नहीं, पुस्तकालय में प्रतिदिन सात अंग्रेजी अखबार, सात हिंदी , जबकि एक उर्दु व एक पंजाबी समाचार पत्र भी आता है।

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