देश को मिले 120 फौजी

सुबाथू में 14 जीटीसी के सलारिया स्टेडियम में दीक्षांत परेड

सुबाथू —  सुबाथू में शनिवार को 14 जीटीसी के ऐतिहासिक सलारिया स्टेडियम में भव्य दीक्षांत परेड का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कोर्स-131 के 120 जवान 42 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद विविधत रूप से भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में शामिल हुए सभी जवानों को 14 जीटीसी के धर्मगुरु ने गीता पर हाथ रख कर संविधान की रक्षा और देश पर मर-मिटने की शपथ दिलाई। इन सैनिकों में ज्यादातर नेपाल और दार्जिलिंग मूल के जवान शामिल हैं। 14 जीटीसी के कमांडेंट ब्रिगेडियर आरएस रावत (वीएसएम) ने परेड का निरीक्षण करने के बाद सलामी ली।  ब्रिगेडियर ने सभी जवानों को बधाई देते हुए कहा कि वे विश्व की सबसे बड़ी सेना में शामिल हुए हैं। ब्रिगेडियर ने ट्रेनिंग के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जवानों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर 1/1 जीआर के गणेश कुमार पुरी को बेस्ट रंगरूट के खिताब से नवाजा गया। ब्रिगेडियर आरएस रावत ने गणेश कुमार पुरी को चांदी की खुखरी देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 जीटीसी के सेना बैंड ने मधुर धुनें पेश कीं। इस दौरान सभी ने खुखरी डांस का भी आनंद उठाया। इस मौके पर सेना के उच्च अधिकारियों के साथ-साथ कसम खाने वाले जवानों के परिजन व अन्य लोग उपस्थित रहे। इस दौरान दुश्मनों को धूल चटाने का एक कार्यक्रम भी पेश किया गया।

ऐसे दी जाती है हार्ड ट्रेनिंग

जब कोई भी व्यक्ति 14 जीटीसी गोरखा सेना में भर्ती होता है तो उसे 42 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग दी जाती है। इस ट्रेनिंग में सभी को मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत बनाने के साथ सभी प्रकार के खतरों का सामना करने के लिए तैयार जाता है। ट्रेनिंग के दौरान सभी जवानों को शस्त्रों के बारे में बताया जाता है। इस प्रकार 42 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग लेने के बाद ही अपनी-अपनी यूनिट में जाते हैं।

कायर होने से तो मरना बेहतर

इतिहास गवाह है कि गोरखा सैनिक जब भी जंग के मैदान में उतरते हैं तो उस वक्त उन सब सैनिकों को सीख दी जाती है कि कायर होने से मरना बेहतर है। जंग के मैदान में लड़ने वाले गोरखा जवानों से दुश्मन भी कांपते हैं।

जय महाकाली, आयो गोरखाली

जैसे ही गोरखा सेना के जवान ‘जय महाकाली, आयो गोरखाली’ नारा बोल कर जंग के मैदान में उतरते हैं, तो दुश्मन भी इस नारे से भयभीत हो जाते हैं। युद्ध के दौरान सेना के इस जोरदार नारे से दुश्मन को बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं होता कि उस पार भारतीय सेना के कितने जवान वहां पर तैनात हैं।

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