मकलोडगंज में चीन के खिलाफ किया प्रदर्शन

मकलोडगंज — चीन से तिब्बत होकर भारत में प्रवेश करने वाली बह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा एक हजार किलोमीटर लंबी सुरंग निर्माण पर धर्मशाला के मकलोडगंज में विरोध प्रदर्शन किया गया। चीन की विश्व विरोधी नीतियों और भारत के पूर्वोतर में गंभीर जल संकट पैदा करने के लिए चीन नई-नई योजनाएं तैयार करने में जुटा हुआ है। चीन वर्तमान पंचवर्षीय योजना में जैविक जीवाश्म और भारी उद्योग से बीजिंग शहर का बदलाव करने में जोर दे रहा है। चीन राजधानी बीजिंग को बिजली उत्पाद और हरियाली के तौर पर विकसित करना चाह रहा है। हालांकि, इस योजना में सभी प्रमुख तिब्बती नदियों पर बांध बनाने का  का कार्य भी शामिल है। बांध निर्माण और पन बिजली उत्पादन के नकारात्मक प्रभावों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त और प्रलेखित किया गया है, यह दर्शाता है कि बड़े बांध जलवायु संकट के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधान नहीं हैं। इसके चलते ही चीन एक हजार किलोमीटर की सुरंग से ब्रह्मपुत्र पानी झिंजियांग में ले जाने के लिए भारत के पूर्वोत्तर में गंभीर जल संकट पैदा करने का हथकंडा अपना सकता है। तिब्बती महिला एसोसिएशन और स्टूडेंट्स फॉर फ्री तिब्बत इंडिया ने संयुक्त रूप से धर्मशाला के मंकलोडगंज में विरोध प्रदर्शन कर एक नाटक प्रस्तुत किया। इस नॉटक में चीन की विश्व विरोधी नितियों को दर्शाया गया। भारत सहित अन्य देशों पर गहराते जल सकंट का भी नमूना पेश किया गया। इस मौके पर तिब्बती महिला एसोसिएशन की दावा डोलमा ने कहा कि तिब्बत में वर्तमान पारिस्थितियां मात्र तिब्बतियों के लिए चिंता का विषय नहीं है यह पूरी दुनिया के लोगों के लिए चिंता का विषय है उन्होंने कहा कि तिब्बत को रुफ ऑफ वर्ल्ड और थर्ड पोल के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि तिब्बत भी दुनिया में एक अरब चार करोड़  लोगों के लिए ताजा पानी का एक स्रोत है और इसलिए, न केवल तिब्बतियों बल्कि डाउनस्ट्रीम एशियाई राष्ट्रों और बड़े पैमाने पर दुनिया में सभी के प्यास को समान रूप से बुझाने के लिए एक साथ सलाहकार चाहिए। तिब्बत एशिया की 10 प्रमुख नदियों के स्रोत है, जोकि अनुमानित एक अरब तीन करोड़ लोग तिब्बत से निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं। तिब्बत में बिजली और खनन परियोजनाओं की अनन्त शृंखला ने तिब्बत की नाजुक पर्यावरण प्रणाली का घातीय विनाश देखा है। फ्री तिब्बत इंडिया की राष्ट्रीय निदेशक तेंजिन त्सेला ने कहा कि इस घटना के साथ-साथ हम तिब्बत से होकर गुजरने वाली नदियों के बारे में जागरूकता पैदा करना चाहते हैं। बांध के निर्माण के परिणामस्वरूप डाउनस्ट्रीम देशों पर खतरे की अंशका, तिब्बत के कमजोर वातावरण  और तिब्बत के नाजुक माहौल पर यूएनसीओपी 23 शिखर सम्मेलन में एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी चाहिए।

You might also like