सेब बागीचों में काट-छांट शुरू

मध्यम-ऊंचाई वाले इलाकों में पौधों को संवारने का काम कर रहे बागबान

शिमला— हिमाचल के मध्यम एवं ऊंचाई वाले इलाकों में आजकल बागबान सेब के पौधों को संवारने का काम कर रहे हैं। बागबानों ने इन दिनों सेब के बागीचों में कांट-छांट का काम शुरू कर दिया है। वहीं कुछ नमी वाली जगहों पर सेब की तौलिए बनाने का काम भी शुरू हो गया है, लेकिन अधिकांश जगहों पर बागबान बारिश और बर्फबारी का इंतजार रहे हैं। इसके बाद ही बागीचों में खाद डाल सकेंगे और तौलिए बना सकेंगे। सेब का हिमाचल की आर्थिकी में बड़ा योगदान रहता है। राज्य के शिमला, कुल्लू, मंडी, किन्नौर के साथ चंबा व सोलन की कुछ जगहों पर बड़े पैमाने पर सेब की पैदावार होती है। इन जगहों पर अब सर्दी का मौसम आते ही बागबान सेब के बागीचों के काम में जुट गए हैं। सेब का तुड़ान करने के बाद सेब बागीचों में अधिकांश पत्तियां झड़ गई हैं और ऐसे में बागबानों ने अब सेब के पौधों में कांट-छांट शुरू कर दी है। राज्य के अधिकतर इलाकों में सेब के बागीचों में बागबानों ने कांट-छांट यानी प्रूनिंग का काम शुरूकर दिया है। हालांकि छोटे व मध्यम वर्गीय बागबान खुद भी यह काम कर रहे हैं, लेकिन जिन लोगों के बड़े बागीचे हैं, वे स्पेशली इसके लिए ट्रेंड कामगारों को लगा रहे हैं। सुबह से शाम तक बागीचों में लोगों का इस काम में व्यस्त देखा जा सकता है। हालांकि सेब के बागीचों में कांट-छांट का समय जनवरी और फरवरी माह तक भी चलता रहता है, लेकिन अधिकांश बागबानों का जोर  बर्फबारी से पहले प्रूनिंग का रहता है। अब ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की आशंका रहती है। हालांकि यह बर्फबारी सेब के बागीचों के लिए सही रहती है, लेकिन यदि सेब के पेड़ों में समय पर कांट-छांट नहीं की जाती है, तो इससे भारी बर्फबारी के दौरान सेब के पेड़ों की टहनियों के टूटने का खतरा रहता है। कई बार तो पूरे पेड़ ही जड़ से उखड़ जाते हैं। ऐसे में बागबानों का यह प्रयास रहता है कि जल्द से जल्द सेब के बागीचों में कांट-छांट का कार्य पूरा किया जाए। राज्य के अधिकांश जगहों पर सूखे या खुशकी का दौर है। बारिश व बर्फबारी न होने से सेब के बागीचों में भी सूखा छाया हुआ है। ऐसे में  बागबान अब बारिश व बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार भी कर रहे हैं।

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