अपनी छत मांग रहे कुल्लू के नए कालेज

यह सच है कि किसी क्षेत्र में जब शिक्षण संस्थान खुलते हैं तो उस एरिया का विकास खुद-व-खुद हो जाता है, पर हिमाचल में इसके विपरीत है। यहां सरकार संस्थानों की घोषणा तो कर देती है और उनके लिए बजट भी रख लिया जाता है, पर काम शुरू नहीं हो पाता। यही वजह है कि पनारसा, सैंज और गाड़ागुशैणी कालेजों के भवन नहीं बन पाए। अब जनता की नजर नई सरकार पर टिक गई है…

कुल्लू – प्रदेश के जिला कुल्लू और मंडी के लोगों को नई सरकार से बड़ी आस है। सबसे पहले लोगों की नई सरकार से कालेज भवनों के निर्माण की आस रहेगी।  ग्रामीण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार ने कालेज तो खोल दिए और पैसों की मंजूरी भी कर दी, पर नसीब नहीं हो पाए। हैरानी की बात है कि अभी तक कालेज भवनों के निर्माण का पेंच फोरेस्ट क्लीयरेंस में फंसा हुआ हुआ है। जमीन चिन्हित होने के सिवाय कुछ नहीं हो पाया है। फाइलें फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के कार्यालयों में घूम रही है। दोनों जिलों के कालेजों के भवन न बनने के चलते जिन स्कूलों ने अपने भवन दिए हैं, उन्हें अब दिक्कत आ रही है। तंग कमरों में कालेज के छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। हालांकि कालेज प्रशासनों ने जमीन की कागजी औपचारिकताएं पूरी कर वन विभाग का सौंप दी हैं, पर आगे की कार्रवाई बंद है। अब छात्रों को आस है कि नई सरकार सत्ता में आते ही कोठरी में बंद इन फाइलों को खोलेगी।  बता दें कि वीरभद्र सिंह सरकार ने अपने पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल में तीन नए कालेजों की सौगात कुल्लू-मंडी को दी है, लेकिन शिलान्यास के बाद कालेज भवनों के निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। मंडी जिला के तहत पड़ने वाले पनारसा, जिला कुल्लू के सैंज और गाड़ागुशैणी को कालेज दिए हैं। गाड़ागुशैणी और पनारसा कालेज का शिलान्यास किए हुए तीन-चार साल बीत गए हैं, अभी तक कागजी औपचारिकाताएं ही चल रही हैं। बता दें कि गाड़ागुशैणी में खोले गए कालेज की कक्षाएं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के तीन कमरों में चल रही हैं। वर्ष 2013 में खोले गए कालेज के लिए भवन की व्यवस्था न होने के कारण प्रवक्ताओं व छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भवन न बनने से छात्र-छात्राएं यहां पर दाखिल नहीं ले पा रही हैं। हालांकि कालेज भवन पांच करोड़ रुपए की लागत से बनेगा, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिस कारण स्टूडेंट्स को 30 किलोमीटर दूर बंजार कालेज जाना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां 127 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा जून, 2016 में जिला कुल्लू के तहत पड़ने वाली सैंज घाटी को कालेज की सौगात दी गई। इस कालेज के भवन के लिए जगह जमीन चिन्हित करने के सिवाय कुछ नहीं हो पाया है। यहां 163 छात्र-छात्राएं सीनियर सेकेंडरी स्कूल सैंज के तीन और प्राथमिक स्कूल सैंज के दो कमरे में पढ़ाई कर रही हैं। इन्हीं कमरों में कालेज के कार्यालय का कामकाम भी चल रहा है और स्टाफ भी यहीं बैठता है। जानकारी के अनुसार इसके लिए पैसे कालेज प्रशासन के पास आए हैं और लोक निर्माण विभाग के खाते में भी जमा कर दिए गए हैं, लेकिन फोरेस्ट क्लीयरेंस नहीं हो पा रही है।

ये काम हो जाएं तो पूरी हो आस

* कुल्लू में खोले गए नए स्कूल-कालेजों की हर दिक्कत दूर हो

* अध्यापकों व अन्य स्टाफ की कमी दूरकी जाए

* हर स्कूल में हो साइंस लैब का प्रावधान

* आधुनिक सुविधाओं से लैस हों जिला के शिक्षण संस्थान

अढ़ाई साल से तरस रहा पनारसा

मंडी जिला के पनारसा में कालेज का शिलान्यास वर्ष 2015 में किया गया था, लेकिन अढ़ाई वर्ष बाद भी कालेज को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है।  कालेज में 381 के करीब छात्र-छात्राएं शिक्षण ग्रहण करती हैं। भवन निर्माण की औपचारिकताएं कागजी कार्रवाई से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। जिस कारण छात्र-छात्राओं सहित कालेज प्रशासन को भी कई दिक्कतें पेश आ रही हैं।

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