नई सरकार की चुनौतियां

अपना प्रदेश विकास की राह पर सबसे आगे हो, इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों ने एक बार फिर मनपसंद सरकार का चुनाव किया है। लोगों को आस है कि नई सरकार वह सब  करेगी जो विकास के नए आयाम छूने को जरूरी होगा। इस विश्वास को कायम रखने के लिए प्रदेश सरकार को भी कड़ी मेहनत करनी होगी। अब नई सरकार को किन-किन चुनौतियों से पार पाना होगा, बता रहे हैं….

-सुनील शर्मा

हिमाचल की सत्ता में आने वाली नई सरकार के लिए वित्तीय दिक्कतें पहाड़ जैसी होंगी। भारी-भरकम लोन लेकर घी के घूंट पी रहे प्रदेश को ऋण जाल से निकालने के लिए बड़ी जद्दोजहद करनी होगी। केंद्र यदि उदार रवैया नहीं अपनाएगा तो प्रदेश की तरक्की पर इसका सीधा-सीधा असर पड़ सकता है। वहीं पंजाब ने यदि 7वें वेतनायोग की सिफारिशें लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही लागू कर दी तो मुसीबतें और बढ़ेंगी। हिमाचल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 3400 करोड़ की ऋण सीमा निर्धारित की है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश नवंबर तक ही 3200 करोड़ का ऋण उठा चुका है। ऐसी स्थिति में नई सरकार के लिए दिक्कतें आ सकती हैं, यदि केंद्र सरकार ने प्रदेश को विशेष वित्तीय पैकेज नहीं दिया।  हिमाचल में सैलरी बजट जो छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से पहले 5800 करोड़ होता था, वह बढ़कर अब 9630 करोड़ के लगभग बढ़ चुका है। पेंशन 3300 करोड़ से बढ़कर 4950 करोड़ का आंकड़ा पार कर रही है।  नई सरकार के लिए आर्थिक दिक्कतों से पार पाना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा नई सरकार को रोजगार के साथ-साथ लोकसभा के मद्देनजर कर्मचारियों को भी खुश रखने की भी चुनौती होगी।

बेरोजगारों के लिए रोजगार

हिमाचल में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। औद्योगिकीकरण के दावे भी इस दिक्कत का स्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। सत्ता में आने वाली नई सरकार स्वरोजगार के लिए कौन से बड़े प्रयास करेगी, क्या कौशल विकास से युवाओं के हाथों को रोजगार मिल सकता है या फिर औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देकर, यह भी सुनिश्चित करना होगा।

वित्तीय आंकड़े

सैलरी बजट

9630 करोड़

पेंशन

4950 करोड़

करों से आय

6340 करोड़

गैर कर आय

1507 करोड़

ऋण बोझ

45000 करोड़

ऋण पर ब्याज

3200 करोड़

कर्मचारियों की तबादला नीति

हिमाचल की सत्ता में बनती रही सरकारें तबादला नीति को लेकर कभी भी गंभीर नहीं दिखी है। कभी नारायण स्वामी रिपोर्ट तो कभी गुलाब कमेटी। कर्मचारी हमेशा स्थायी स्थानांतरण नीति के पक्षधर रहे हैं। मगर होता यही है कि कर्मचारियों की बड़ी फौज संघों में बंट चुकी है। हिमाचल में ये संघ भाजपा व कांग्रेस से जुड़ते जा रहे हैं। हालांकि तबादला के लिए स्थायी नीति लागू हो, इसके लिए सभी पक्षधर हैं, मगर कोई भी ऐसा प्रभावी कर्मचारी नेता पिछले 10 वर्षों से नहीं दिख पा रहा, जो सरकारों को ऐसी स्थायी नीति लागू करने के लिए मजबूर कर सके। नई सरकार के लिए कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाना भी चुनौती होगी।

एम्स-मेडिकल कालेज लेंगे इम्तिहान

नई सरकार के लिए एम्स जैसे संस्थान को युद्ध स्तर पर बनाने के लिए बड़ी चुनौती रहेगी। वह भी ऐसे में जब केंद्र सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए कमर कस ली हो। हालांकि सभी एनओसी हो चुकी हैं। बावजूद इसके प्रादेशिक स्तर पर कोई दिक्कत न आए, यह चुनौती रहेगी। चंबा और सिरमौर में मेडिकल कालेज की बिल्डिंगें तैयार हो रही हैं, मगर हमीरपुर के लिए रास्ता अभी लंबा है।

बीबीएमबी की हिस्सेदारी मिले तो बने बात

हिमाचल की हिस्सेदारियों का मामला भी लंबित पड़ा है। यदि बीबीएमबी का मामला ही निपट जाता है तो भी प्रदेश को काफी संबल मिल सकता है। मगर पड़ोसी राज्यों के रवैये से ऐसा नहीं दिख पा रहा है।

इंटरव्यू

प्रो. प्रेम कुमार धूमल नेता प्रतिपक्ष

सरकार का खोया विश्वास लौटाएंगे

दिव्य हिमाचलः नई सरकार की तीन बड़ी प्राथमिकताएं क्या होंगी? जीत के लिए कितने आश्वस्त हैं आप और उसके कारण क्या हैं?

प्रो. धूमलः लोगों के जान-माल की सुरक्षा, महिला सम्मान, सरकार का खोया हुआ विश्वास बहाल करने के साथ-साथ लोगों का आत्मविश्वास कायम करना। माफिया राज को पूरी तौर से खत्म किया जाएगा।  हिमाचल में  विकास पूरी तरह से ठप पड़ चुका है। केंद्र से करोड़ों रुपए की राशि मंजूर हुई थी, मगर प्रदेश को उसका कोई फायदा नहीं मिल सका।

दिहिः  नई सरकार की चुनौतियां क्या-क्या हैं? कौन-कौन से कार्य पूर्ण करना टेढ़ी खीर होंगे।

प्रो. धूमल : आर्थिक फ्रंट पर हिमाचल खोखला हो चुका है। केंद्र ने हजारों करोड़ रुपए दिए, मगर उसका फायदा नहीं हुआ। प्रदेश 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा ऋण बोझ तले दबने लगा है।  हमारा प्रयास होगा कि सत्ता में आने पर संसाधन जुटाएं और हिमाचल को विकास के रास्ते पर आगे ले जाएं।

दिहिः : फोरलेन कितनी बड़ी परीक्षा लेंगे? एनएच पर क्या कुछ करना होगा? एम्स और मेडिकल कालेज?

प्रो. धूमल –  भाजपा सरकार का लक्ष्य होगा इन्हें समयबद्ध पूरा किया जाए, चाहे वे नेशनल हाई-वे के प्रोजेक्ट हों या फिर अन्य।

दिहिः  : कौन-कौन से फैसले हैं, जिनकी समीक्षा करना चाहेगी नई सरकार? कितने स्कूल, कितने कालेज, कितने दफ्तर समीक्षा के तहत आएंगे? गुणात्मक शिक्षा के लिए क्या कुछ करने की आवश्यकता है? ऐसे कालेज कितने हैं, जो राजनीतिक लाभ ज्यादा, शिक्षा के लिए कम खुले हैं?

प्रो. धूमलः प्रदेश हित के खिलाफ लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार होगा। आर्थिक तौर पर जो प्रदेश के हित में नहीं होंगे, उन्हें रोल बैक या पैक कर दिया जाएगा। ऐसे संस्थान जो जनसेवा की दृष्टि से व्यवहारिक नहीं होंगे, उन्हें बंद करने का फैसला लिया जाएगा।  गुणात्मक शिक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। बिना बजट की कोई घोषणा नहीं होगी।

दिहिः  : कर्मचारी स्थानांतरण नीति पर नई सरकार क्या-क्या करना चाहेगी? क्यों अब तक इस दिशा में किसी भी सरकार ने कदम नहीं उठाए हैं। कर्मचारी तबादला कितना बड़ा मुद्दा है किसी भी सरकार के लिए?

प्रो. धूमलः हमने पहले भी गुलाब सिंह कमेटी का गठन किया था। कर्मचारियों को राहत देने का पूरा प्रयास किया गया।  कर्मचारी नेताओं के साथ बातचीत के बाद और रास्ता तलाशा जाएगा।

दिहिः  : नई सरकार की आर्थिक और वित्तीय चुनौतियां क्या हैं? वर्तमान समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति कैसी है? कौन-कौन से कदम आर्थिक स्थिति को डगमगा रहे हैं?

प्रो. धूमलः मैं पहले ही कह चुका हूं कि प्रदेश 50 हजार करोड़ के ऋण बोझ की ओर बढ़ रहा है। अनावश्यक तौर पर टायर्ड व रिटायर्ड लोगों को रखा गया। गैर योजना कार्यों के लिए अत्यधिक खर्च किया गया।

दिहिः : स्वावलंबन किस तरह हासिल कर सकती है नई सरकार? कौन-कौन से क्षेत्र हैं, जो स्वावलंबन में मदद कर सकते हैं?

प्रो. धूमलः संसाधन बढ़ाते हुए बेरोजगारी दूर करने के लिए ठोस प्रयास होंगे। स्वरोजगार के ज्यादा से ज्यादा साधन जुटाने पर जोर होगा। हिमाचल आत्मनिर्भर बने, स्वावलंबन की ओर बढ़े, इसके लिए केंद्र से भी हरसंभव सहयोग लिया जाएगा।

दिहिः  : जीत के लिए कितने आश्वस्त और कारण क्या हैं?

प्रो. धूमलः भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोगों का विश्वास जीता है। प्रदेश में जन-जन तक चुनाव अभियान के दौरान पहुंचा गया है। जन-जन की आवाज को दृष्टि पत्र में भी विशेष तवज्जो दी गई है। लोग कांग्रेस से दुखी हो चुके हैं, वे बस मौका तलाश रहे थे।

इंटरव्यू

वीरभद्र सिंह

विकास को और देंगे रफ्तार

दिव्य हिमाचल  : नई सरकार की तीन बड़ी प्राथमिकताएं क्या होंगी?

वीरभद्र सिंह : सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य में हिमाचल को बुलंदियों पर ले जाएंगे। पहले भी कांग्रेस सरकारों ने इन क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं। पिछले पांच वषों में भी चहुंमुखी विकास किया गया। आगे भी यही लक्ष्य होगा।  बेरोजगारी को दूर करने के लिए फिर से खास ध्यान दिया जाएगा।

दिहिः : जीत के लिए कितने आश्वस्त हैं आप और उसके कारण क्या हैं?

वीरभद्र सिंह : मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां और प्रदेश में गत पांच वर्षों के दौरान किए गए चहुंमुखी विकास कार्य इस विश्वास का आधार हैं। प्रदेश के लोग महंगाई, नोटबंदी व व्यवसायी जीएसटी के कारण परेशान हैं। हमने मौजूदा कार्यकाल के दौरान प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास सुनिश्चित बनाया है। क्षेत्रवाद की दीवारों को तोड़ा है। धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने के साथ-साथ स्मार्ट सिटी का दर्जा भी दिलवाया है। यह शिमला को भी मिला है। लोगों की मांग पर उपतहसीलें, तहसीलों के साथ-साथ 80 हजार से भी ज्यादा विभिन्न श्रेणियों के पद भरे गए। शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न अनुबंध वर्गों के लिए नीति निर्धारित की गई। कर्मचारियों का विश्वास सरकार में कायम रहा। औद्योगीकीकरण के जरिए लोगों को स्वरोजगार व रोजगार के प्रयास किए गए। दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगे, लिहाजा स्कूल व कालेज लोगों की डिमांड पर खोले गए। ऐसे अनेक कार्य हैं, जिन्हें लोग खुद सराहते हैं। इन्हीं की बिनाह पर कांग्रेस का मिशन रिपीट होगा।

दिहिः  हिमाचल प्रदेश में नई सरकार के लिए क्या-क्या चुनौतियां होंगी?

वीरभद्र सिंह : हिमाचल विकासशील राज्य है। विषम भौगोलिक परिस्थितियां, आर्थिक दिक्कतें प्रदेश के विकास में रोड़ा बनती हैं। ज्यादा से ज्यादा संसाधन जुटाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जाए, यह प्रयास रहता है, आगे भी रहेगा। सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में नई मंजिलें हासिल करने के साथ-साथ कृषि व बागबानी को नई बुलंदियां हासिल करवाना भी लक्ष्य रहेगा।

सबको राहत देने का वादा

विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने घोषणा पत्र व भाजपा ने दृष्टि पत्र जारी किया है। कांग्रेस ने पुराने वादों पर जोर देते हुए युवा वोटर को रिझाने के लिए रूसा जैसे सिस्टम की समीक्षा का भी ऐलान कर रखा है। पूर्व सैनिकों, मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाने के संकल्प के साथ-साथ परिवहन व पर्यावरण नीति की भी नए सिरे से समीक्षा सहित कृषि व बागबानी आयोग बनाने की घोषणा की गई है। पार्टी ने फिर से 1500 रुपए बेरोजगारी भत्ता देने का भी ऐलान किया है। महिला मंडलों को छोटे उद्योगों के लिए एक लाख रुपए तक का ब्याजमुक्त ऋण देने का भी ऐलान है। भाजपा ने दृष्टि पत्र जारी किया है, जिसे तैयार करने में एक वर्ष तक लंबी एक्सरसाइज की गई। पार्टी द्वारा पर्यटन से रोजगार का संकल्प लिया गया है। नारी रक्षा व वरिष्ठ नागरिकों के सत्कार के लिए हेल्पलाइन जारी करने के साथ-साथ हर पंचायत में सशक्त स्त्री केंद्र बनाने की बात कही है। देवभूमि दर्शन सर्किट बनाकर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का ऐलान है। न्यूनतम दिहाड़ी में वृद्धि के साथ-साथ असंगठित श्रमिकों को अटल पेंशन योजना के तहत पेंशन देने का ऐलान किया गया है।  सत्ता में आने की सूरत में भाजपा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में होशियार हेल्पलाइन शुरू करके माफिया राज के खिलाफ लड़ाई लड़ने का ऐलान कर रखा है। वहीं, मेजर सोमनाथ वाहिनी खड़ी करके चोरों, डकैतों व नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम छेड़ने की भी घोषणा है।  रूसा सिस्टम को बंद करने का भी भाजपा ने ऐलान किया है। वहीं किसानों व बागबानों को रिझाने के लिए 2022 तक उनकी आय दोगुनी करने का संकल्प लिया गया है। क्लास-3 व 4 नौकरियों के लिए इंटरव्यू खत्म करने का भी ऐलान हुआ है। स्वच्छ पेयजल व मजबूत सड़कों का नेटवर्क बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं को भी बढ़ाने की घोषणा है। भाजपा के दृष्टि पत्र में इस बार मेहनत झलक रही है, जबकि कांग्रेस का घोषणा पत्र जल्दबाजी में तैयार किया गया है। बावजूद इसके हर वर्ग को राहत देने का ऐलान पार्टी ने भी किया है। बहरहाल, घोषणा पत्र व दृष्टि पत्र से हट कर दोनों ही दलों में से जिसे भी सत्ता में आने का मौका मिलेगा, उसे कांटों भरी सेज पर सवार होना होगा।

फिजूलखर्ची रोकनी होगी

हिमाचल में मंत्रियों व बोर्ड-निगमों के ओहदेदारों के लिए महंगी कारें खरीदने का शौक सुर्खियों में रहा है। ऋण लेकर गाड़ी खींच रहे प्रदेश के लिए यह जरूरी होगा कि अनोत्पादक खर्चों पर लगाम लगे।

एक साल बाद लोकसभा चुनाव

एक साल बाद ही लोकसभा के चुनाव निर्धारित हैं। लिहाजा कर्मचारियों की बड़ी फौज को खुश करने के लिए यह कदम उठाना भी लाजिमी होगा।  पंजाब इस मामले में कार्रवाई कर रहा है।  जानकारों के मुताबिक हिमाचल में बनने वाली नई सरकार के सामने जहां आर्थिक दिक्कतें भारी पड़ेगी, वहीं 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से 3500 से 4000 करोड़ तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

1200 करोड़ एरियर

हिमाचल सरकार वेतन भत्तों को लेकर पंजाब वेतनमान का अनुसरण करती आ रही है। केंद्र ने पहली जनवरी, 2016 से इन वेतनमानों की सिफारिशों के तहत कर्मचारियों को एरियर देने का भी ऐलान किया था। सातवें वेतनायोग की सिफारिशों को लागू करने से हिमाचल सरकार पर वित्त विभाग के मुताबिक सालाना 3500 से 4000 करोड़ के करीब वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसमें एरियर का करीबन 1200 करोड़ का बोझ बढ़ेगा।

आत्मनिर्भरता जरूरी

हिमाचल विकासशील व उपभोक्ता राज्य है। यहां कृषि मैदानी इलाकों की तर्ज पर लोगों को जीवनयापन करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पाती है। हालांकि सेब बागबानी क्षेत्र इसमें अपवाद है। लिहाजा सत्ता में आने वाली सरकार के लिए चुनौती होगी कि वन संसाधनों की एवज में केंद्र सरकार से ठीक वैसे ही ग्रीन बोनस की मांग करे, जल संसाधन पर वोटरसेस का दबाव बनाए, जैसा कि दक्षिणी राज्यों में कोयले से रॉयल्टी हासिल की जा रही है। बागबानी आधारित बड़े प्रोजेक्ट हिमाचल में लगें, चूने के पत्थर के बड़े भंडारों पर आधारित सीमेंट कारखाने खड़े हो सकें। यह सुनिश्चित करवाना होगा, तभी रोजगार सृजन भी होगा।

कांग्रेस का घोषणा पत्र

* कांग्रेस 1500 रुपए देगी बेरोजगारी भत्ता

* डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार का संकल्प

* व्यावसायियों को जीएसटी में राहत देंगे

* बनेगा कृषि व बागबानी आयोग

* आउटसोर्स व अनुबंधित कर्मी 2-3 साल में  होंगे नियमित

* पैट, पैरा व कम्प्यूटर शिक्षक होंगे नियमित

* 50 हजार मेधावी छात्रों को लैपटॉप व एक जीबी डाटा मुफ्त

* डाक्टर पैरा मेडिकल कैडर में 25 फीसदी की होगी बढ़ोतरी

* परिवहन नीति की समीक्षा भी

* नई पर्यावरण नीति बनेगी

* युवाओं को टैक्सी खरीदने पर मिलेगी सबसिडी

* रोप-वे नेटवर्क बढ़ाएंगे

* न्यूनतम मजदूरी 350 रुपए होगी

* ऊर्जा टैरिफ नीति होगी संशोधित

* मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाने का संकल्प

* जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए बनेगी नीति

* कृषकों-बागबानों को 90 फीसदी सबसिडी

* पूर्व सैनिकों के लिए बड़े ऐलान

* रूसा की समीक्षा की भी घोषणा

* जनजाति व अनुसूचित जनजाति विकास के भी संकल्प

* विधवा की बेटी की शादी को अब एक लाख मिलेंगे

महिला मंडलों को ब्याजमुक्त एक लाख का ऋण

घोषणा पत्र में महिला मंडलों को छोटे उद्योगों के लिए एक लाख तक का ऋण ब्याजमुक्त होगा, जबकि विधवाओं की बेटियों को शादी के लिए अब एक लाख रुपए प्रदान किए जाने की घोषणा है।

किसानों के एक लाख तक का कर्ज माफ

घोषणा पत्र में किसानों व बागबानों के लिए कई वादे किए गए हैं। उन्हें एंटी हेलगन के लिए जहां 90 फीसदी सबसिडी व इसकी अधिकतम सीमा तीन लाख करने का ऐलान है, वहीं छोटे व सीमांत किसानों के एक लाख तक के ऋण माफ करने की भी घोषणा की गई है।

सुखविंदर सुक्खू की गैरहाजिरी में घोषणा पत्र जारी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू की अनुपस्थिति में यह घोषणा पत्र जारी किया गया। बताया गया कि प्रचार कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण कांग्रेस कप्तान नहीं आ सके थे।

भाजपा का दृष्टि पत्र

* पर्यटन के नए संकल्प

* भ्रष्टाचार मुक्त हिमाचल का ऐलान

* सैन्य सेवा प्रशिक्षण के लिए खोला जाएगा मेजर सोमनाथ शर्मा स्कूल

* सेब, आम, संतरे के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी

* गोसेवा आयोग बनेगा  रूसा प्रणाली करेंगे खत्म

* अटल वर्दी योजना में अब मिलेंगे जूते व स्कूल बैग

* स्कूलों में स्थापित होंगी अटल टिंकरिंग लैब

* निजी स्कूलों की फीस पर लगेगा अंकुश

* मेधावी छात्रों को टैबलेट के साथ वन जीबी इंटरनेट डाटा

* मुफ्त  हर सरकारी स्कूल में

* वाई-फाई सुविधा

* ऊर्जा नीति भी बदलेगी भाजपा

भाजपा विजन के खास बिंदु

* मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित होगी होशियार हेल्पलाइन, जो करेगी माफिया राज का जड़ से सफाया।

* पूर्व सैनिकों से होगी गठित ‘मेजर सोमनाथ वाहिनी’ जो लगाएगी चोरी, डकैती एवं नशीले पदार्थों पर रोक

* हर घर तक स्वच्छ पेयजल

* सड़कों से जुड़ेंगे सभी गांव

* दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के लिए हेलि एंबुलेंस

* गे्रड-तीन और गे्रड-चार की नौकरियों के लिए इंटरव्यू होंगे बंद

* कालेज छात्रों को मिलेंगे लैपटॉप-टैबलेट एवं मासिक एक जीबी डाटा और सरकारी शिक्षण संस्थान बनेंगे फ्री वाई-फाई जोन।

* सभी जिलों में आयोजित होंगे वार्षिक रोजगार मेले।

* किसानों और बागबानों की 2022 तक आय होगी दोगुनी।

* सभी किसानों और बागबानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत लाएंगे।

* अधिगृहीत की जाने वाली कृषि भूमि के मुआवजे का भुगतान दोगुना से बढ़ाकर किया जाएगा चार गुना।

* बागबानी के लिए स्थापित होगा बागबानी विश्वविद्यालय।

* रोजगार सृजन हेतु नए पर्यटन स्थल होंगे विकसित

* ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु नए गांवों में खुलेंगे होम स्टे।

* हिमाचल के सभी मंदिरों को देवभूमि दर्शन सर्किट से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को करेंगे विकसित।

* प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पयर्टन केंद्र बनाने के लिए स्थापित करेंगे पर्याप्त कोष।

* महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु गुडि़या योजना के तहत महिला पुलिस थाने व हेल्पलाइन होंगे स्थापित

* महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर पंचायत में बनेंगे सशक्त स्त्री केंद्र

* 60 वर्ष से अधिक आयु वाले नागरिकों को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं निःशुल्क चार धाम यात्रा की सुविधा

* अपना घर योजना के अंतर्गत 2022 तक होगी हर गरीब के सिर पर छत।

* बीपीएल परिवारों के छात्र-छात्राओं के लिए होगी स्नातक स्तर तक निःशुल्क शिक्षा

* मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी में होगी वृद्धि और असंगठित श्रमिकों को अटल पेंशन योजना के अंतर्गत मिलेगी पेंशन।

भाजपा विधायक खुद घोषित करेंगे अपनी संपत्ति

भाजपा के दृष्टि पत्र मेंबताया गया है कि पारदर्शिता बनाने के लिए भाजपा के विधायक सार्वजनिक रूप से स्वयं अपनी संपत्ति को घोषित करेंगे।

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