अवैध निर्माण कैसे रोक पाएगा टीसीपी विभाग

महकमे के पास नए साल में चुनौतियों का अंबार, अदालत के फैसले ने भी बढ़ाईं मुश्किलें

शिमला— हिमाचल प्रदेश के नगर नियोजन विभाग यानी टीसीपी के पास नए साल में चुनौतियां का अंबार है। टीसीपी के पास राज्य में हो रहे अवैध निर्माण को रोकने की बड़ी चुनौती है। इस बारे में एनजीटी का जो फैसला आया है, उसके बाद विभाग पर और भी दायित्व आ गया है, वहीं राज्य में अवैध भवनों के नियमितीकरण को लेकर अदालत के फैसले से विभाग की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। नगर नियोजन विभाग का दायित्व राज्य के शहरी व प्लानिंग एरिया में निर्माण कार्यों को नियमों के अनुरूप करवाने की जिम्मेदारी है, लेकिन हिमाचल में विभाग इस फ्रंट पर एक तरह से असफल रहा है। राज्य में भारी संख्या में अवैध निर्माण हुआ है, टीसीपी विभाग अपने नियमों को लागू करवाने में बिलकुल असमर्थ रहा है। राज्य में अब नए निमार्ण को नियमों के अनुरूप करवाने की बड़ी चुनौती इस विभाग पर है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का फैसला रुलाने वाला

राज्य में अवैध निर्माण के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला आया है। इस फैसले में शिमला के ग्रीन एरिया में किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगाई गई है, वहीं भवनों की ऊंचाई भी अब अढ़ाई मंजिल तक रखने का फरमान एनजीटी ने सुना रखा है। एनजीटी का यह फैसला टीसीपी के गले की फांस बना हुआ है। एक ओर जहां भवन मालिक टीसीपी के माध्यम से सरकार पर इस फैसले को चुनौती देने की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार भी अब तक इस मोर्चे पर कोई फैसला नहीं कर पाई है।

शहरों के लिए नए प्लान की चुनौती

टीसीपी के पास शहरों के लिए डिवेलपमेंट प्लान तैयार करने की चुनौती भी रहेगी। टीसीपी ने हालांकि कई नगरों के लिए डिवेलपमेंट प्लान तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस काम को अंजाम तक पहुंचाना काफी कठिन है।

रोहतांग पर रिपोर्ट की टेंशन

एनजीटी ने टीसीपी विभाग को रोहतांग के लिए कैरिंग कैपेसिटी पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन आदेशों को काफी समय बीत चुका है, लेकिन इसके लिए कंसल्टेंट तय नहीं हो पाए हैं। हालांकि इसके लिए टीसीपी विभाग कई बार टेंडर प्रक्रिया शुरु कर चुका है, लेकिन बेहद कड़ी शर्तों के चलते कोई भी इसके लिए आगे नहीं आ रहा है। इस एरिया में अब पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी ने भी सक्रियता दिखाई है। ऐसे में नए साल में विभाग के पास रोहतांग एरिया के लिए कैरिंग कैपेसिटी रिपोर्ट तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी रहेगी।

नियमितीकरण तो होगा नहीं

टीसीपी की परेशानी हाल ही में हाई कोर्ट के फैसले से भी बढ़ गई है। टीसीपी विभाग ने सरकार के माध्यम से अवैध भवनों को नियमित करने के लिए संशोधित टीसीपी एक्ट लागू करवाया था, लेकिन इसको हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। ऐसे में राज्य में अवैध भवनों के नियमितीकरण करने का रास्ता अब बंद हो गया है। भवन मालिक इस फैसले को लेकर अब टीसीपी पर भी दबाव डालने के लगे हैं। ऐसे में नए साल में टीसीपी विभाग के लिए यह मसला बड़ी चुनौती होगा।

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