‘ई-वे बिल’ से कैरासिन बाहर

धर्मशाला — टैक्स चोरी सहित कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए लाए जा रहे जीएसटी व ई-वे बिल में रसोई गैस व कैरोसीन सहित आवश्यक वस्तुओं पर नियमों में हल्की ढील मिलेगी। थोक कारोबारियों द्वारा छोटे कारोबारियों को बिना डिमांड भेजी जाने वाली सामग्री के झगड़े का भी अब अंत हो जाएगा। नई प्रणाली से छोटे दुकानदार थोक विक्रेताओं की चक्की में नहीं पिस पाएंगे। वह हर कारोबारी ई-वे बिल के पोर्टल पर देख सकेंगे कि उन्होंने जो डिमांड भेजी थी, वही सामान आया है कि उन्हें मनमर्जी से अतिरिक्त सामान भी थोप दिया है। ऐसे में वह थोपी गई सामग्री को ट्रांसपोर्ट कंपनी से लेने को सीधे मना कर सकते हैं, जिससे बड़ी कंपनियों की अब मनमर्जी नहीं चल पाएगी। राज्य में लागू होने वाली नई व्यवस्था से छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब ई-वे बिल लागू होने के बाद वह अपने पोर्टल पर देख पाएंगे कि उन्हें कंपनी ने जो सामान भेजा है, क्या वह उनकी डिमांड के हिसाब से ही आया है या कंपनी ने उनकी नापसंद या न बिकने वाली सामाग्री भी डाल दी है। यदि कोई कंपनी ऐसा करती भी है, तो कारोबारी नापसंद माल रिजेक्ट कर सकते हैं और अपनी जरूरत और डिमांड वाले सामान को ही उठा सकते हैं। इससे छोटे कारोबारियों पर किसी तरह का न तो आर्थिक बोझ पड़ेगा और न ही उनके काउंटर अब कंपनियों के भेजे गए माल का बेवजह अड्डा बनेंगे। इससे छोटे दुकानदारों को उभरने के बेहतर अवसर मिल पाएंगे। पिछला रिकार्ड देखें तो अकसर बड़ी कंपनियां कुछ अतिरिक्त माल नई वस्तु के नाम पर या अपना सामान बिकवाने वाली कंपनियों से सांठगांठ के चलते छोटे व्यापारियों पर थोप देती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।

पहल से आने वाले दिन होंगे बेहतर

अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में सारी व्यवस्था समझना भले ही कारोबारियों को मुश्किल हो रहा हो, लेकिन आने वाले दिनों में इसके सुखद परिणाम होंगे। इसमें निचले स्तर तक काम करने वाले को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है। व्यापार में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ता से लेकर दुकानदार तक को लाभ देने की योजना है।

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