चुनौतियों का पहाड़

पहाड़ी राज्य की नई सरकार के लिए चुनौतियां भी किसी पहाड़ से कम नहीं। प्रदेश के विभिन्न विभागों में खाली पद व आर्थिक तंगी सरकार का कड़ा इम्तिहान लेगी। नई सरकार की चुनौतियों व मंत्रियों का विजन प्रस्तुत करता इस बार का दखल…

हिमाचल में नई सरकार बन चुकी है। भाजपा के पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, आबकारी एवं कराधान, शहरी विकास, परिवहन, उद्योग व पर्यटन का जिम्मा संभाले मंत्रियों के समक्ष नई चुनौतियां होंगी। हालांकि इनमें से आबकारी एवं कराधान और पर्यटन मुख्यमंत्री ने अपने पास ही रखा है।  इन्हीं महकमों पर प्रदेश का ज्यादातर रोजगार भी आधारित रहता है।प्रदेश के धर्मशाला व शिमला में स्मार्ट सिटी बनने हैं। शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी के लिए यह एक चुनौती रहेगी कि प्रदेश के पहले दो स्मार्ट सिटी स्तरीय तो हों ही, निर्धारित समय में इनका कार्य पूरा हो। बजट की दिक्कतें किसी भी स्तर पर आड़े न आएं, क्योंकि इसकी फंडिंग केंद्र व राज्य दोनों पर आधारित होनी है।

हिमाचल की वित्तीय हालत किसी से छिपी नहीं है, ऐसे में इनका काम बाधित न हो, यह सुनिश्चित करना होगा।  अभी तक स्मार्ट सिटी के लिए धर्मशाला व शिमला में रणनीति ही बन रही है। हालांकि धर्मशाला में नगर निगम का गठन भी हो चुका है। बावजूद इसके आगामी कार्य शुरू होने हैं। शिमला में भी कमोबेश यही सब चल रहा है। गठित कमेटी विभिन्न महकमों से प्रस्ताव एकत्रित कर रही है। जाठिया देवी में नई टाउनशिप बननी है। इसके लिए जयराम मंत्रिमंडल ने लोन के लिए सरकारी गारंटी पर भी मुहर लगा दी है।

लिहाजा यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, इसमें कोई संशय नहीं रह गया है। हुडको से इसके लिए करोड़ों रुपए का ऋण उठाए जाने की तैयारी है।  यही नहीं, 75 हजार से भी ज्यादा लोगों को प्लॉट्स व फ्लैट्स जुटाने की भी चुनौती रहेगी। परिवहन क्षेत्र में गुणवत्तायुक्त सेवाएं जुटाने के साथ-साथ आधुनिकीकरण की तरफ भी ध्यान देना होगा। जल परिवहन योजना अभी भी कागजों में है। परिवहन निगम व परिवहन विभाग लगातार स्टाफ की किल्लत से जूझ रहे हैं। प्रदेश में कॉमर्शियल वाहनों के बढ़ने से परिवहन विभाग का दायरा बढ़ाने की भी जरूरत होगी।

आबकारी एवं कराधान विभाग मुख्यमंत्री के पास है। नई सरकार के लिए चुनौती होगी कि पुरानी सरकार की नीतियों की समीक्षा करे। प्रदेश में शराब माफिया को लेकर भाजपा ने खूब हल्ला बोला है। कांग्रेस सरकार द्वारा जो निगम गठित किया गया था , उसे लेकर भी सवाल उठाए गए थे। प्रवेश बैरियर पर कम्प्यूटरीकरण नहीं हो सका है। स्टाफ की खासी किल्लत है। फ्लाइंग स्क्वायड   की भी काफी कमी है। हर साल टैक्स एकत्रित करने की चुनौती महकमें पर भारी पड़ती है। यह लक्ष्य भी  विभाग पूरा नहीं कर पाता। प्रदेश की राजस्व आय का यह भी एक महत्त्वपूर्ण विभाग है। जाहिर तौर पर यह भी एक बड़ी चुनौती होगी।

औद्यौगिक पैकेज लाने का चैलेंज

हिमाचल में औद्यौगिक पैकेज की रियायतें  जारी हैं, वे भी सीमित समय के लिए। अब केंद्र व प्रदेश में समान सरकारें है। लिहाजा उद्योग मंत्री के लिए औद्योगिक क्षेत्रों को कोई नया पैकेज लाने की चुनौती होगी।  आद्योगिकीकरण के जरिए ही प्रदेश के नौ लाख से भी ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है। प्रदेश के अंदरूनी हिस्सों में आद्योगिकीकरण नहीं हो सका है। मंडी-कांगड़ा जैसे बड़े जिला इसके लिए तरस रहे हैं। लिहाजा यह भी एक बड़ी चुनौती होगी कि निवेश की दिशा इस ओर मोड़ी जाए।  आईटी पार्क, बायोटेक्नोलॉजिकल पार्क के साथ-साथ ऑटोमोबाइल क्षेत्र को भी आकर्षित करने की आवश्यकता होगी।

रूसा की खामियां होंगी दुरुस्त

सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री

दिहि :नए स्कूल, कालेज खुलने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बनाए रखेंगे?

भारद्वाज : प्रत्येक स्कूल में आधारभूत ढांचा खड़ा करना जरूरी है। पूर्व सरकार ने स्कूल तो खोल दिए लेकिन कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं बच्चे ही पर्याप्त नहीं। कई स्कूल एक ही अध्यापक के सहारे चल रहे हैं। ऐसी जगह पर बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा नहीं मिल सकती, लिहाजा यह सरकार इस पर ध्यान केंद्रित करेगी। स्कूलों को लेकर विस्तृत समीक्षा के बाद फैसला होगा।

दिहिः रूसा पालिसी की विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए क्या रुख रहेगा?

भारद्वाज : रूसा के तहत केंद्र सरकार प्रदेश को ग्रांट दे रही है। करोड़ों रुपए इसमें आ रहे हैं। सिस्टम बुरा नहीं है, लेकिन इसमें खामियां काफी ज्यादा हैं। पूर्व सरकार ने इसे सही तरह से लागू नहीं किया है। भाजपा सरकार ने रूसा को लेकर वादा कर रखा है और उस वादे के अनुरूप इसमें किस तरह से सुधार हो सकता है या सिस्टम को चलाना है या नहीं इस पर मंथन करके ही निर्णय लिया जाएगा। इसकी खामियों को दूर करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

दिहिः केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना अधर में है, क्या हल निकालेंगे?

भारद्वाज : केंद्र सरकार ने हिमाचल को केंद्रीय विश्वविद्यालय दिया है, लेकिन पूर्व सरकार की गलत नीतियों के चलते  इसकी स्थापना पूरी तरह से नहीं हो पाई है। सरकार निचले हिमाचल की तरफ जाने वाली है, वहां केंद्रीय विवि के मुद्दे पर भी बात होगी। सरकार जल्द से जल्द इसे सुचारू बनाने के लिए गंभीर है।

निवेश बढ़ाने पर फोकस

विक्रम सिंह, उद्योग मंत्री

दिहिः केंद्र द्वारा दिया गया औद्योगिक पैकेज सिमटने के बाद कई उद्योग विदा हो गए, इस मसले को केंद्र से उठाएंगे क्या?

विक्रम : राज्य से यूपीए के समय में विशेष औद्योगिक पैकेज छीना गया, जिसका नुकसान हिमाचल को हुआ है। विभागीय समीक्षा का दौर चल रहा है, यह कहना मुश्किल है कि कितने उद्योग यहां से गए। हिमाचल में निवेश को लाने की अहम चुनौती है, जिसमें केंद्र सरकार की पूरी मदद ली जाएगी। जल्दी ही केंद्रीय मंत्रियों से हिमाचल की बातों को लेकर चर्चा करूंगा।

दिहि : पंडोगा और कंदरोड़ी क्षेत्रों का विकास कैसे होगा, स्टील प्लांट पर क्या रुख है

विक्रमः नए उद्योग क्षेत्रों में काम आखिरी चरण में है। कंदरोड़ी में अभी बिजली का काम होना शेष है जिसके लिए निर्देश दिए गए हैं। तेजी के साथ ये पूरे हों तो इनमें निवेश के लिए गंभीरता से प्रयास करेंगे। हमारे सामने इनको बसाने की जिम्मेदारी है। उद्योगपतियों को उद्योग मित्र माहौल देकर, बिचौलियों का राज खत्म करके यहां विस्तार किया जाएगा। स्टील प्लांट लगे इसके लिए केंद्र सरकार की भी मदद लेंगे, क्योंकि यही एक ऐसा क्षेत्र है जिससे यहां रोजगार का द्वार खुलेगा।

दिहि : लेबर होस्टलों की तुरंत जरूरत है इसके लिए क्या करेंगे

विक्रम : बेशक यह अहम जरूरत है। विभाग ने कुछ योजनाएं बनाई हैं, जिसके लिए बजट की जरूरत है। राज्य व केंद्र  सरकार से इसके लिए पैसा मांगा जाएगा और तेजी के साथ काम करेंगे।

डाक्टरों की होगी भर्ती

विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री

दिहि :स्वास्थ्य संस्थानों में डाक्टरों की भारी कमी है, इस कमी को कैसे पूरा करेंगे?

परमारः प्रदेश में डाक्टरों की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए गंभीरता के साथ काम किया जाएगा। विभाग को 100 दिन का टारगेट दिया गया है, जिसमें अपनी परफार्मेंस दिखाएंगे। आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए काम होगा। डाक्टरों के साथ दूसरे स्टाफ की भर्तियों की प्रक्रिया भी चलेगी।

दिहि : कई रिटायर्ड डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि ऐसे लोगों को हटाया जा रहा है, आप कैसे निपटेंगे ?

परमार : रिटायर्ड और टायर्ड लोगों को हटाने का फैसला सरकार ने लिया है और यह नीतिगत फैसला है। जहां तक डाक्टरों की बात है तो उनकी सेवाएं ली जा रही हैं क्योंकि यहां पर कमी है और इन डाक्टरों के पास विशेषज्ञता है। आम जनता की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।

दिहि : बिलासपुर एम्स, नेरचौक कालेज, हमीरपुर मडिकल कालेज के फौरी परिचालन के संबंध में क्या नीति रहेगी ?

परमार : ऐसे अहम संस्थानों को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए सरकार कृतसंकल्प है। ये केंद्र सरकार की मदद से चलाए जाने हैं, जिसमें तेजी से काम होगा।

निगम को घाटे से उबारने की चुनौती

दिहिः निजी बस आपरेटरों व अन्य चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार की परिवहन नीति क्या रहेगी?

गोविंदः  परिवहन क्षेत्र घाटे में चल रहा है। इसे घाटे से उबारते हुए यात्रियों को सुरक्षित व सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान करने की कोशिशें होंगी। निगम का घाटा कम करना सबसे बड़ी चुनौती है जिस पर आम जनता का सहयोग भी लिया जाएगा। सभी को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे, कठिनाइयां दूर हो जाएंगी। परिवहन नीति में क्या बदलाव हो सकते हैं इस पर समीक्षा की जाएगी।

दिहिः काम में न लाई जा रही लो फ्लोर बसों का क्या करेंगे?

गोविंदः मामला अभी कई स्तर पर फंसा हुआ है जिस पर रिपोर्ट मांगी गई है। जल्दी ही फैसला लेंगे।

दिहिः बस अड्डों के लिए क्या कार्ययोजना है, कई जगहों पर बस अड्डों का निर्माण होना है, धर्मशाला का एमओयू साइन हो चुका है, किस तरह से इनका निर्माण करेंगे?

गोविंदः  बस अड्डों का निर्माण कई स्थानों पर चल रहा है। ये काम समय पर पूरे हों, इसे तरजीह दी जाएगी, काम तेजी से करने को कहा गया है। कहां-कहां पर क्या स्थितियां हैं, अभी इसके बारे में विस्तार से जानना जरूरी है। वैसे आम जनता को कोई परेशानी न हो, इसके लिए हर जगह पर व्यवस्थाओं के दुरुस्त किया जाएगा।

फिल्टरेशन से जुड़ेंगी पेयजल योजनाएं

महेंद्र सिंह आईपीएच मंत्री

दिहिः दूषित पानी से राजधानी सहित मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर आदि में लोग पीलिया-आंत्रशोध का शिकार होते रहे हैं। ये स्थिति कैसे बदलेंगे

महेंद्र सिंह : दूषित पेयजल की सफाई के लिए सरकार ने आते ही एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। गर्मियों में गंदे पानी से बीमारियां न  हो इसके लिए गंभीरता से प्रयास होगा। विभाग की जितनी भी योजनाएं हैं, सभी को फिल्टरेशन से जोड़ा जाएगा। विदेशी एजेंसियों से फंडिंग आ रही है, आने वाले समय में आधुनिक प्रणाली से युक्त योजनाएं तैयार होंगी।

दिहिः  पेयजल योजनाओं के पानी की प्रयोगशाला में जांच नहीं होती, बहुसंख्यक योजनाओं में तो फिल्टर तक नहीं है, इस चुनौती से कैसे निपटेंगे

महेंद्र सिंह : योजनाओं को फिल्टर से जोड़ने के लिए काम शुरू हो चुका है। जल्दी ही इस अभियान को पूरा करेंगे।  प्रयोगशालाओं की संख्या को बढ़ाया जा रहा है और हरेक योजना की क्वालिटी पर नजर रखी जाएगी।

दिहिः  ऊपरी शिमला में एंटी हेलगन का मसला फिर सरकार के पाले में है। क्या एक्शन लेंगे। उपज बेचने के लिए प्रभावी मंडी मध्यस्थता योजना पर क्या काम किया जाएगा

महेंद्र सिंह : बागबानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विश्व बैंक की 1145 करोड़ की योजना पर काम चल रहा है।   एंटी हेल गन को लेकर भी चर्चा की जाएगी और समीक्षा के बाद ही फैसला होगा। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर मंडी मध्यस्थता योजना तैयार होगी।

सोलर फैंसिंग से बचाएंगे खेती

रामलाल मार्कंडेय  कृषि एवं आईटी मंत्री

दिहि : कृषि विश्वविद्यालय प्रयोगशाला से निकलकर खेत तक पहुंचने में असफल रहा है, ये प्रथा कब बदलेगी?

मार्कंडेय : बेशक  जनता में यह धारणा  है कि कृषिविश्वविद्यालय खेतों तक नहीं पहुंच रहा है। उनकी कई बेहतरीन योजनाएं भी हैं , जिनका प्रचार-प्रसार सही तरह से नहीं हो पा रहा है। ये योजनाएं कागजों तक सीमित है तभी यह लगता है कि ये विश्वविद्यालय फील्ड में नहीं दिखते।  इनकी योजनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि खेती को फायदा पहुंचे।

दिहिः किसानों की फसलों को बंदरों व आवारा पशुओं के कहर से कैसे बचाएंगे?

मार्कंडेय : यह प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या है, जिससे आज किसान ने खेती करना छोड़ दिया है। जंगली जानवरों व आवारा पशुओं के खिलाफ कदम उठाने को कई योजनाएं बनी लेकिन सिरे नहीं चढ़ीं। इस पर गंभीरता से काम करेंगे, ताकि लोगों को राहत मिल सके। खेतों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

दिहिः आईटी पार्क बनाने की योजना थी,इन पर क्या काम होगा?

मार्कंडेय : शिमला में आईटी पार्क का शिलान्यास जल्दी करने वाले हैं। इसके साथ ही बद्दी में भी योजना है, जिसे भी सिरे चढ़ाया जाएगा। विभागों से समीक्षा चल रही है, जल्द ही नतीजे देखने को मिलेंगे।

मिलता रहेगा सस्ता राशन

किशन कपूर, खाद्य आपूर्ति मंत्री

दिहि : समय पर सही मात्रा में राशन उपलब्ध करवाने के लिए क्या कदम उठाएंगे ?

कपूर- सरकार जनता को सही समय पर राशन उपलब्ध करवाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। सरकार यह भी देखेगी कि उपभोक्ताओं को  गुणवत्तापूर्ण राशन मिले, इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड में जाकर दुकानों का निरीक्षण करें और आटा, चावल व व अन्य खाद्यान्न की जांच करें। लोगों की खाद्यान्नों के संबंध में आई शिकायतों का तुरंत निपटारा किया जाएगा। लोगों की सुविधाओं के लिए विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने रोडमैप तैयार कर लिया है।

दिहि : राशन सबसिडी बरकरार रखने की चुनौती से कैसे निपटेंगे? कपूर- राज्य सरकार लोगों को सस्ता राशन उपलब्ध करवाने के लिए कृत संकल्प है। सरकार राशन पर दी जा रही सबसिडी जारी रखेगी। मौजूदा समय में राज्य सरकार सस्ते राशन पर 220 करोड़ रुपए से अधिक की सबसिडी प्रदान कर रही है। सरकार लोगों को सुचारू रूप से गुणवत्तायुक्त राशन आपूर्ति उपलब्ध करवाएगी, इसको सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। खाद्य आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में 4904 दुकानों में पीओएस मशीनें लगाई गई हैं, बाकी में भी जल्द ही मशीनें स्थापित कर दी जाएंगी।

सवाल- कौन-कौन सी दालें व तेल उपलब्ध करवाए जाएंगे।

जवाब- उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर दालें व तेल  उपलब्ध करवाने के साथ-साथ उचित मूल्यों की दुकानों में कम दामों पर अच्छी किस्म के दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले अन्य उत्पाद बेचने पर बल दिया जाएगा।

घाटा कम करना, खाली पद भरना जरूरी

अनिल शर्मा, ऊर्जा मंत्री

दिहिः ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अहम चुनौती किसे मानते हैं?

अनिल शर्माः  हाइड्रो क्षेत्र में निवेश नहीं हो पा रहा है क्योंकि यहां मंजूरियां नहीं मिल रही हैं। कमाई से अधिक लागत लग रही है। ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार के स्तर पर काम किया जाएगा। उनकी रियायतों पर बात करेंगे

दिहिः बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति में कैसे सुधार संभव है?

अनिल शर्माः बिजली बोर्ड में कर्मचारियों के मुताबिक काम उपलब्ध करवाना, क्रियाशील पदों को भरना जरूरी है। इसके घाटे को कम करने के लिए विस्तृत योजना बनाकर काम करेंगे। केंद्र सरकार की योजनाओं को यहां लागू किया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली मिले।

दिहिः पावर पालिसी में बदलाव होगा?

अनिल शर्मा : निवेशक कुछ रियायतें चाहते हैं जिन पर रिपोर्ट मांगी गई है। उनके सुझाव भी आए हैं। समीक्षा करके बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार लागू करेंगे।

हर वादा पूरा करेगी सरकार

डा. राजीव सहजल सामाजिक न्याय मंत्री

दिहिः  क्या वर्तमान सरकार सामाजिक क्षेत्र को प्राथमिकता देगी?

सहजलः  भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सामाजिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी है और जो वादे किए गए हैं, उनको फलीभूत किया जाएगा। सत्ता में आते ही बुजुर्गों की पेंशन को लेकर महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसमें आयु सीमा को कम करके लाभ देने की बात हुई है। सामाजिक दायित्वों की पूर्ति के लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा

दिहिः  कई तरह की सामाजिक पेंशनों के लिए कई आवेदन लंबित पड़े हुए हैं, उनके लिए क्या करेंगे?

सहजलः सामाजिक पेंशनों के ढेरों आवेदन लंबित हैं, जिनका बैकलॉग खत्म करने के लिए कहा गया है। विभाग को 100 दिन का टारगेट है, जिस पर तेजी से काम होगा। केंद्र की मदद से यहां पर नई सामाजिक पेंशनों को जहां लागू करेंगे वहीं बढ़ाएंगे भी।

दिहिः  सहकारिता क्षेत्र में हिमाचल को  आगे बढ़ाने के लिए क्या योजनाएं हैं?

सहजलः विभागीय समीक्षा चल रही है, जल्दी ही रिपोर्ट सामने होगी, जिस पर मंत्रिमंडल में चर्चा करेंगे। सहकारिता का हिमाचल से पुराना नाता है, जिसे बढ़ावा देने के लिए प्रयास रहेगा।

 

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