छोटे व्यापारियों को अब बड़ा तोहफा देगी सरकार

सोलन – प्रदेश सरकार शीघ्र ही हजारों छोटे व्यापारियों को शीघ्र ही एक बड़ा तोहफा दे सकती है। सरकार जीएसटी के दायरे में दस लाख रुपए की टर्नओवर पर व्यापारी को अन्य राज्यों की तरह बीस लाख रुपए की सीमा तक छूट दे सकती है। इसके साथ-साथ कंपोजिट स्कीम का लाभ भी प्रदेश के व्यापारियों को प्रदान करके इसकी सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपए की जा सकती है। प्रदेश सचिवालय में आबकारी व कराधान विभाग में लगभग इस आशय की फाइल तैयार है तथा अब कैबिनेट के प्रस्ताव की मंजूरी मिलना शेष है। देश में जीएसटी लागू होने के बाद से ही प्रदेश के छोटे व मंझले व्यापारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अन्य प्रदेश की सरकारों ने बीस लाख रुपए की टर्नओवर तक के व्यापारियों को जीएसटी नंबर लेने के दायर से बाहर रखा है, लेकिन हिमाचल में इसकी सीमा दस लाख रखकर जीएसटी नंबर लेना भी आवश्यक किया गया है। एक देश एक टैक्स की अवधारणा का प्रदेश में व्यापार करने वाले व्यापारियों के लिए एक अन्य दुखद पहलू यह भी है कि कंपोजिट स्कीम की सीमा यहां पचास लाख निर्धारित की है, जबकि अन्य राज्यों में यह 75 लाख रुपए है। इस मामले को लेकर रोष स्वरूप पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में व्यापारी संगठनों ने एक दिन हिमाचल बंद भी रखा था तथा सरकार को मांग पत्र भी भेजे थे। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा का शिमला में घोषणा पत्र जारी करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही दस लाख की सीमा बढ़ाकर बीस लाख  की जाएगी। यही आश्वासन भाजपा के कई आला नेताओं ने दिए थे।

सरकार के राजस्व को भी नुकसान नहीं

आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 25 हजार के करीब डीलर वैट के तहत पंजीकृत थे तथा इसमें मात्र 1650 डीलर 25 लाख के आसपास की टर्नओवर के दायरे में आते थे। इस श्रेणी के डीलरों का यह आंकड़ा मात्र 3.5 प्रतिशत है तथा प्रदेश के कुल राजस्व का 0.4 प्रतिशत ही है। अधिक राजस्व देने वाले डीलरों की संख्या 6500 है तथा इन्हीं से करीब 92 प्रतिशत टैक्स सरकार को चला जाता है। प्रदेश सरकार यदि तय सीमा दस लाख से बढ़ाकर बीस लाख कर देती है, तो टैक्स के रूप में नुकसान नगन्य है। प्रदेश आबकारी व कराधान विभाग के प्रधान सचिव जगदीश चंद्र शर्मा ने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश के छोटे व्यापारियों को इसमें अन्य राज्यों की तरह राहत दी जाएगी। सरकार के राजस्व को भी इस प्रस्तावित निर्णय से कोई नुकसान नहीं होगा।

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