दो डिप्टी रेंजर चार्जशीट

पीसीसीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद कुछ और अफसरों पर भी गाज के आसार

शिमला— कोटीधार अवैध कटान मामले में सेवानिवृत्त फोरेस्ट गार्ड के बाद दो डिप्टी रेंजरों को चार्जशीट कर दिया गया है। सोमवार देर शाम यह कार्रवाई अमल में लाए जाने की सूचना है। इनमें एक मौजूदा व दूसरा डिप्टी रेंजर कोटीधार से स्थानांतरित हो चुका है। दो वर्ष तक वह इसी रेंज में तैनात रहा। यही नहीं, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन सुरेंद्र शर्मा की जांच रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट के बाद कुछ और अधिकारियों व मझोले अफसरों पर गाज गिर सकती है।  वन मंत्री गोबिंद सिंह ठाकुर मंगलवार को शिमला पहुंच रहे हैं। इसके बाद कुछ और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।  इस मामले में पहले ही आरोपी उस व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज चुकी है, जो यूपीएफ जंगल में अवैध कटान के साथ अवैध खनन का भी आरोपी बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि उद्योग विभाग के माइनिंग विंग के कुछ अधिकारियों को भी इस मामले में जवाबदेह बनाने की तैयारी चल रही है। इस मामले में वन, राजस्व व माइनिंग विंग के कई अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। क्योंकि 2014-15 से यह मामला चलता रहा, जिसकी भनक मुख्य अधिकारियों तक नहीं लगी। बहरहाल, कई अधिकारियों के होश अब फिर से उड़ने लगे हैं।    उल्लेखनीय रहेगा कोटीधार यूपीएफ जंगल है, जहां 400 से भी ज्यादा पेड़ काटे गए हैं। 100 पेड़ इसी साल काटे गए हैं, जबकि देवदार के 60 पेड़ व अन्य बान के छोटे व बड़े 150 से भी ज्यादा पेड़ पिछले तीन वर्षों में काटे गए। राजस्व विभाग ने यूपीएफ  के परचे संबंधित आरोपी के हक में काटे हैं। यानी उसे वहां का मालिक दिखाया गया है। इसकी जांच हो रही है कि यह सही है या फिर मिलीभगत से इसे अंजाम दिया । सूत्रों का कहना है कि यूपीएफ जंगल का कोई भी मालिक नहीं  हो सकता।

समय रहते नहीं लिया एक्शन

दोनों मझोले अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने समय पर अवैध कटान व खनन की जानकारी नहीं दी। इनमें से एक दो वर्ष तक कोटीधार जंगल में तैनात रहा, जबकि दूसरा कुछ अरसा पहले ही वहां भेजा गया था। इन दोनों डिप्टी रेंजरों को चार्जशीट किया जा रहा है।

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