नौकरी पक्की… पर महकमा कोई नहीं

तकनीकी सहायकों ने पंचायतीराज विभाग के अधीन आने को उठाई आवाज

धर्मशाला— पंचायत तकनीकी सहायकों को नियमित किए जाने के बाद भी पंचायतीराज विभाग के अधीन नहीं किया गया है। तकनीकी सहायकों ने प्रदेश सरकार से उन्हें विभाग के अधीन किए जाने की मांग उठाई है। अभी भी पंचायत तकनीकी सहायकों को मनरेगा फंड से वेतन की अदायगी की जा रही है, जिसके चलते कुछ क्षेत्रों में पंचायत तकनीकी सहायकों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। हिमाचल प्रदेश पंचायत तकनीकी सहायक संघ के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष अक्तूबर माह से पंचायत तकनीकी सहायकों को नियमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नियमित किए जाने के बाद भी उन्हें विभाग के अधीन नहीं लाया गया है। नियमित करने के बावजूद मनरेगा फंड से वेतन का भुगतान करना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा वर्ग के लिए टेक्निकल विंग की स्थापना की मांग भी लंबित पड़ी है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपनी मांगों से पंचायती राज मंत्री, विभाग के सचिव को अवगत करवाया है, जिस पर पंचायतीराज मंत्री ने आश्वासन दिया है कि मांगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में 1084 पंचायत तकनीकी सहायक सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2001 से कार्यरत इन तकनीकी सहायकों को पहली अक्तूबर, 2017 से नियमित कर दिया गया है। सरकार द्वारा इन्हें नियमित तो किया गया, लेकिन पंचायती राज विभाग के अधीन नहीं लिया गया। ऐसे में इस वर्ग में रोष पनपने लगा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा फंड जारी होने में देरी के चलते उन्हें वेतन की अदायगी नहीं हो पाती है। अब तकनीकी सहायक प्रदेश सरकार के बजट सत्र से उम्मीदें लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत तकनीकी सहायकों को उम्मीद है कि बजट सत्र में इस वर्ग को पंचायती राज विभाग के अधीन करने और इस वर्ग के लिए अलग से टेक्निकल विंग स्थापना की ओर सरकार कदम बढ़ाएगी।

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