पगार के लिए यलगार

तनख्वाह बढ़ाने के लिए गरजे मिड-डे मील कर्मी-आंगनबाड़ी वर्कर्ज

शिमला— आंगनबाड़ी व मिड-डे मिल वर्करों की हड़ताल का असर प्रदेश भर में देखने को मिला। हजारों की संख्या में प्रदेश के हर जिला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हल्ला बोला। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्कर्ज को 6500 न्यूनतम वेतन दिया जाए। इसके साथ ही वादे के अनुसार वर्कर्ज को नियमित भी किया जाए। आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्ज का आरोप है कि सत्ता में आने से पहले केंद्र की भाजपा सरकार ने वर्कर्ज से वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद मिड-डे मील व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में बढ़ोतरी की जाएगी तो वहीं वर्कर्ज के लिए नियमितीकरण की पॉलिसी भी लाई जाएगी। वर्कर्ज का आरोप है कि केंद्र में भाजपा सरकार को आए हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्ज के बारे में कुछ नहीं सोचा गया है। मिड-डे मील वर्कर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष हिमी देवी ने मांग उठाई है कि केंद्र सरकार मिड-डे मील योजना को ठेकेदारों व एनजीओ को देने का फैसला बदले। इसके साथ ही वर्कर्ज को न्यूनतम वेतन 6300 रुपए प्रदान किया जाए। आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्ज ने मांग उठाई है कि 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करें। प्रदर्शन के माध्यम से वर्कर्ज ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्ज की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में देशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं।

अढ़ाई लाख बच्चों ने फिर भी खाया खाना

प्रदेश भर में मिड-डे मिल वर्कर्ज के हड़ताल पर रहने से भी छात्रों को स्कूल में दोपहर का खाना खाने को मिला। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को लगभग अढ़ाई लाख नौनिहालों ने सरकारी स्कूलों में दोपहर का भोजन खाया। शिक्षा विभाग ने हड़ताल पर जाने से पहले ही स्कूलों में खाना बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की हुई थी। इसमें शिक्षा विभाग ने एसएमएसी व अभिभावकों से स्कूलों में एक दिन खाना बनाने की अपील की थी।

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