प्रदेश वक्फ बोर्ड के लिए खींचतान शुरू

संगठन के नेता चाह रहे कुर्सी, सीएम आफिस पहुंची फाइल आज हो सकती है क्लीयर

शिमला – प्रदेश वक्फ बोर्ड के निदेशक मंडल के गठन के लिए खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा से जुड़े अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता यहां पर पद हथियाने की दौड़ में जुटे हुए हैं। नेताओं ने पूरा जोर लगा रखा है। सूत्रों के अनुसार नए पदाधिकारियों को लगाने की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंच चुकी है और सोमवार को इस पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। देखना यह है कि इस दफा वक्फ बोर्ड में कौन कब्जा जमाता है। अल्पसंख्यक मोर्चा के मौजूदा नेता ही इस दौड़ में शामिल हैं। बताया जाता है कि पहले पदाधिकारी रह चुके कुछ अन्य लोग भी कुर्सी को चाहते हैं, लेकिन उनकी चल नहीं पा रही, क्योंकि भाजपा की सरकार तो सत्ता में आई लेकिन नेताओं के समीकरण बदल गए। ऐसे में वक्फ बोर्ड का चेयरमैन लगने और अपने पसंद के निदेशकों को लगाने के लिए जोर आजमाइश हो रही है। यहां पर नेताओं की नियुक्तियां भी बोर्ड के एक्ट को देखकर होगी। प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां शिमला, सोलन, ऊना और कांगड़ा जिला में है लिहाजा इन्हीं जिलों की दावेदारी भी पुख्ता होनी चाहिए परंतु ऐसा नहीं है। कुछ दूसरे जिलों के नेता भी यहां कुर्सियों की दौड़ में बराबर जुटे हुए हैं। वक्फ बोर्ड की माली हालत ठीक नहीं है। बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने इसी कारण से बोर्ड से अपना वेतन भी नहीं लिया, क्योंकि अकेले अध्यक्ष के वेतन से ही बोर्ड पर अतिरिक्त खर्चा बढ़ सकता था। निदेशकों को यहां वेतन नहीं दिया जाता, बल्कि बैठक में आने का ही मानदेय मिलता है। यहां पर बोर्ड की करोड़ों की संपत्तियां हैं, परंतु पुरानी बकाया राशि जहां वह वसूल करने में असफल साबित हुआ है, वहीं कोई नया रास्ता भी नहीं निकाल पाया है। इस पर केंद्र सरकार के नए वक्फ एक्ट को यहां पर अपना दिया गया है, जिससे बोर्ड के किराएदार नाराज हैं। लोगों की लीज रिन्यू नहीं हो पा रही है, क्योंकि बोर्ड उनसे नए रेट पर किराया मांग रहा है, जो कि काफी ज्यादा है।

केंद्र सरकार से फूटी कौड़ी तक नहीं

दिलचस्प बात यह है कि बोर्ड ने केंद्र सरकार का एक्ट तो अपना लिया, परंतु केंद्र से एक फूटी कौड़ी किसी योजना में नहीं मिल पाई। बिना केंद्र की किसी सहायता के यहां किराएदारों पर बोझ डालने की कोशिश वक्फ बोर्ड ने की है, जिस पर वर्तमान सरकार को नए सिरे से कदम उठाना होगा।

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