बारिश के लिए धू-धू जल रहे जंगल

चौपाल में जंगल की आग कुदरती नहीं, लोगों का इंद्रदेव को मनाने का टोटका

नेरवा, चौपाल – खुष्क मौसम चौपाल के जंगलों की आग में घी का काम कर रहा है। विभाग के कर्मचारी दिन-रात आग बुझाने में जुटे हैं। यह आग कुदरती तौर पर नहीं भड़की है, बल्कि इसे कथित रूप से स्थानीय लोग ही लगा रहे हैं। कहीं यह आग बागीचों की झाडि़यां जलाते वनों में फैल रही है, तो कहीं लोगों व चरवाहों द्वारा जंगलों में आग लगाई जा रही है। वनों में लग रही आग से न केवल वन संपदा को नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे असंख्य निरीह जीव-जंतु भी जिंदा जल रहे हैं। लोगों में कथित मान्यता है कि यदि बारिश न हो तो वनों में आग लगाने से जीव-जंतु जिंदा जलना शुरू हो जाते हैं, जिस पर तरस खाकर इंद्र देवता बारिश करवा देते हैं। वनों में यह आग इसी धारणा को लेकर लगाई जा रही है अथवा इसका कोई और ही कारण है यह कह पाना मुमकिन नहीं है। इतना जरूर है कि यदि जल्दी बारिश नहीं हुई तो न केवल करोड़ों रुपए की वन संपदा को यह आग लील जाएगी, बल्कि हजारों लाखों वन्य प्राणी भी इस आग की भेंट चढ़ जाएंगे। जंगलों में लगी आग के चलते पूरा वातावरण धुआं-धुआं हो गया है। जंगलों में भड़की आग के चलते चौपाल वन मंडल के तहत सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। वन मंडलाधिकारी एमएस चंदेल ने लोगों से आग्रह किया है कि बागीचों की झाडि़यां किसी सुरक्षित स्थान पर देखरेख में जलाएं व जब झाडि़यां जल जाएं, तो आग को पूरी तरह बुझा दें। उन्होंने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि वनों में आग न लगाएं व वनों में लगी आग बुझाने में विभागीय कर्मचारियों का सहयोग करें। वन मंडलाधिकारी एमएस चंदेल ने बताया कि अलर्ट जारी कर दिया गया है। विभागीय कर्मचारी दिन-रात आग बुझाने में लगे हुए हैं।

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