बिना एमओयू चल रही कम्प्यूटर शिक्षा

शिमला— हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा किस आधार पर चल रही है, इसका शिक्षा विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। हैरानी की बात है कि जिस कंपनी के साथ शिक्षा विभाग का एमओयू हुआ था, कंपनी के पास उस एमओयू की एक भी कापी नहीं है। उधर, नाइलेट कंपनी की मनमानी बढ़ती जा रही है। कम्प्यूटर शिक्षकों की ओर से कंपनी प्रबंधन से आरटीआई के तहत जो जानकारी मांगी गई, कंपनी ने उस आरटीआई में कोई भी ऐसी जानकारी नहीं दी, जिससे कि शिक्षक संतुष्ट हों। कम्प्यूटर शिक्षक संघ के सदस्यों ने कंपनी पर कम्प्यूटर शिक्षा के नाम पर प्रदेश में बड़ा घोटाला होने का भी आरोप लगाया है। संगठन के अध्यक्ष हेतराम ठाकुर का कहना है कि इतनी बड़ी कंपनी को पिछली सरकार ने किन शर्तों पर कम्प्यूटर शिक्षा का टेंडर दिया है, इसके बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे साफ है कि कंपनी कुछ छुपा रही है या सच में कंपनी के पास कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि इस बात का खुलासा नरेंद्र कुमार द्वारा मांगी गई सूचना से हुआ है। नरेंद्र कुमार की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में कंपनी प्रबंधन की ओर से जवाब आया है कि चंडीगढ़ कार्यालय में लगी आग में सारा रिकार्ड जल गया है। कम्प्यूटर शिक्षक संगठन के अध्यक्ष हेतराम ठाकुर महासचिव अश्वनी शर्मा व प्रेस प्रवक्ता राजेश ने प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग से मांग उठाई है कि कंपनी के पास प्रदेश कम्प्यूटर शिक्षा को लेकर एमओयू नहीं है, यह हैरानी वाली बात है, सरकार इसका संज्ञान ले। उधर, शिक्षा विभाग के पास भी एमओयू न होने की वजह से शर्तें पता नहीं हैं। कंपनी की इस मनमानी की वजह से शिक्षकों को समर व विंटर दोनों की छुट्टियां भी नहीं मिल पा रही हैं। शिक्षकों का आरोप है कि नाइलेट कंपनी किस आधार पर प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षकों के वेतन से लाखों का कमीशन ले रही है, जवाब दे। संगठन के सदस्यों ने मांग की है कि सरकार व शिक्षा विभाग इस मामले पर हस्तक्षेप करें और कम्प्यूटर शिक्षा को सरकारी सरंक्षण में लें। वहीं कम्प्यूटर शिक्षकों का कहना है कि कंपनी एक महीने में बिना शर्तों से 12 लाख रुपए कमा रही है। प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग कंपनी की मनमानी पर लगाम लगाए। कम्प्यूटर शिक्षकों का कहना है कि कंपनी को बेवजह से हर महीने मिलने वाले फंड को वे सीएम रिलीफ फंड में देने को तैयार हैं।

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