मुंशी राम ने देश की आजादी के लिए कई आपदाएं झेलीं

मुंशी राम ने देश की आजादी के लिए कई आपदाएं झेलीं। वह 14 वर्ष की उम्र में ही ब्रिटिश सेना में भर्ती हो गए थे। वहां तीन साल नौकरी करने के बाद आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। मुंशी राम ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और एक वर्ष तक रंगून, जिगरकच्छ की कारागार में रहे…

नरोत्तम दत्त शास्त्री

इनका जन्म सितंबर, 1918 ई. में जिला बिलासपुर तहसील घुमारवीं के गांव सुन्हाणी में स्वर्गीय श्री धीरू राम वैद के घर हुआ। इन्होंने बीए, एलएलबी की । इनका पेशा वकालत था। एक विद्यार्थी के रूप में कांग्रेस नेताओं से प्रेरित हुए, जो जलियांवाला बाग, अमृतसर में आए थे। 1938 ई. में बिलासपुर रियासत में प्रजामंडल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और इसके उपाध्यक्ष रहे।  कांग्रेस कमेटी बिलासपुर के अध्यक्ष रहे। हिमालय पहाड़ी रियासतों की क्षेत्रीय परिषद के सदस्य रहे, 1947 ई. में हिमाचल प्रांतीय कांग्रेस शिमला के कार्यालय सचिव रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में और 1975-77 में आपातकाल के दौरान जेल गए। संपादक, पत्रकार, अनुवादक और हिंदी अध्यापक श्री दत्त बहुत सी पुस्तकों के लेखक हैं, जिनमें ‘बिलासपुर रियासत का राजनीतिक इतिहास’ भी शामिल हैं। वह हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी परिषद के उपाध्यक्ष रहे और अखिल भारतीय सेनानी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। वह 1957 ई. में हिमाचल प्रदेश टैरीटोरियल काउंसिल के लिए एक स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में जीते।

नरेंद्र चंद सिसोदिया

इनका जन्म पांच अक्तूबर, 1921 ई. को हुआ। राणा नरेंद्र चंद सिसोदिया पट्टा महलोग रियासत के अंतिम शासक थे। उन्होंने  अपनी प्रारंभिक शिक्षा लाहौर से प्राप्त की। उन्होंने हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी में दक्षता हासिल की। दूसरे शासकों से अलग, इन्होंने अपनी जमीन स्थानीय लोगों या सरकारी कार्यालयों को दे दी। राणा नरेंद्र चंद द्वारा दान की गई भूमि पर अनेक कार्यालय जैसे कि अस्पताल, सिंचाई व जनस्वास्थ्य (आईपीएच) लोक निर्माण विभाग, विद्युत, टेलीफोन, वन, राजस्व तथा पशुपालन, लघु उद्योग आदि के सदस्य थे। वह 22 जनवरी, 2011 को स्वर्ग सिधारे।

मुंशी राम

इनका जन्म 10 जनवरी, 1925 को सुंदरनगर उपमंडल के अंतर्गत सलापड़ के समीप सदवाहण गांव में हुआ। मुंशी राम ने देश की आजादी के लिए कई आपदाएं झेलीं। वह 14 वर्ष की उम्र में ही ब्रिटिश सेना में भर्ती हो गए थे। वहां तीन साल नौकरी करने के बाद आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। मुंशी राम ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और एक वर्ष तक रंगून, जिगरकच्छ की कारागार में रहे। मुंशी राम ने एक वर्ष तक आर्य समाज स्कूल कोलकाता में शारीरिक अध्यापक के रूप में निशुल्क सेवाएं दीं। उसके उपरांत विभिन्न सामाजिक संगठनों में रहकर कार्य किया। 68वें आजादी दिवस से एक सप्ताह पुर्व 8 अगस्त, 2014 को 89 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी मुंशी राम का निधन हो गया।

बृजेंद्र सिंह

चंबा की भूतपूर्व रियासत के वंशज राजा बृजेंद्र सिंह का जन्म 24 जनवरी, 1951 को हुआ था। वह एमएलए आशा कुमारी के पति थे, जिनका 55 वर्ष की आयु में सर गंगा राम अस्पताल में 6 अप्रैल, 2002 को निधन हो गया।

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