मुख्य सचिव की कुर्सी..अफसरशाही में हड़कंप

विनीत चौधरी की नियुक्ति होने से बदलेंगे प्रशासनिक समीकरण, पिछली सरकार ने ठुकराई थी वरिष्ठता

शिमला— प्रदेश के मुख्य सचिव की कुर्सी बदलने के साथ प्रशासनिक समीकरण भी बदल जाएंगे। कॉडर में कुछ अधिकारी ऐसे हैं, जिनको विनीत चौधरी फूटी आंख नहीं सुहाते थे, उन्हें उनके मुख्य सचिव बनने से औहदों की चिंता सताने लग गई है। तय माना जा रहा है कि ऐसे अधिकारी अब बदले जाएंगे। विनीत चौधरी के मुख्य सचिव बनने से उन प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच चुका है। पूर्व की वीरभद्र सरकार ने विनीत चौधरी की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए उनको मुख्य सचिव नहीं बनाया था, जिनकी जगह वीसी फारका को सीएस बना दिया। इससे विनीत चौधरी और सरकार के चहेते अफसरों में ठन्न भी गई थी। अंततः यहां सरकार बदलने के बाद अब मुख्य सचिव की कुर्सी उनके पास आई है, तो प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप है। विनीत चौधरी फिलहाल प्रदेश के आईएएस कॉडर में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। अनदेखी को लेकर वह सरकार के खिलाफ कैट में भी गए हैं, जहां उनका मामला अभी चल रहा है। चौधरी वर्ष 1982 के आईएएस अधिकारी हैं। उनके बाद वरिष्ठता में उनकी पत्नी उपमा चौधरी हैं, जो कि इन दिनों प्रशासनिक अकादमी मसूरी की निदेशक हैं। विनीत चौधरी प्रदेश सरकार में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। कांग्रेस सरकार में ही पहले वह अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य के पद पर तैनात थे और उस समय उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए एक रिपोर्ट तैयार कर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर को सौंपी थी। उनकी इस रिपोर्ट पर कितना काम हुआ, यह कहा नहीं जा सकता, परंतु अब उनके प्रदेश का मुख्य सचिव बनने के बाद उम्मीद है कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल होगा।

नड्डा के साथ किया है काम

बहरहाल उनकी नियुक्ति से पहले यह तय माना जा रहा था कि वीसी फारका को इस पद से हटाया जाएगा, परंतु इस पर कौन बैठेगा, यह तय नहीं था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शनिवार शाम को ही दिल्ली से वापस लौटे थे और माना जा रहा है कि दिल्ली में ही यहां के मुख्य सचिव को हटाने और विनीत चौधरी को यह पद सौंपने की पटकथा लिख दी गई थी। चौधरी इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ भी काम कर चुके हैं और उनके खास अधिकारियों में शुमार हैं। उनकी नियुक्ति के बाद तय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की सिफारिश पर ही यह कुर्सी दी गई है। अब प्रशासनिक स्तर पर कितना और कितनी जल्दी फेरबदल होता है, इसका इंतजार रहेगा।

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