शोध का संकट

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि भारत में आर एंड डी पर खर्च करने के मामले में सरकार निजी क्षेत्र से आगे है। सरकार की तरफ से रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और कृषि अनुसंधान जैसे क्षेत्रों पर काफी खर्च किया गया है। उधर, निजी क्षेत्र ने फार्मा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान में ज्यादा रुचि ली है…

शोध किसी देश या समाज की समझ को तो बढ़ाते ही हैं, समस्याओं के समाधान के नए रास्ते सुझाने का काम भी स्तरीय शोधों पर निर्भर करता है। बढ़ती जटिलताओं के कारण समसामयिक दुनिया में सभी देश सामाजिक और वैज्ञानिक क्षेत्र में होने वाले शोधों को उच्च वरीयता देते हैं। कोई देश या वहां का नेतृत्व अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कितना प्रतिबद्ध है, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि वह अनुसंधान और विकास को कितनी वरीयता दे रहा है और उस पर कितना खर्च कर रहा है।

यह सच है कि भारत ने आर्थिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों को स्पर्श किया है। फिर भी यहां पर अभी तक शोध और अनुसंधान के क्षेत्र पर उतना ध्यान नहीं दिया जा सका है। शोध बताते हैं कि बीते एक दशक में अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर किए जाने वाले खर्च को भारत ने काफी हद तक बढ़ाया है। साल 2004-05 में जहां यह 24,117.24 करोड़ रुपए था, तो वहीं 2014-2015 में तिगुनी बढ़त के साथ यह 85,326.19 करोड़ पर पहुंच गया, लेकिन इसके साथ यह भी सच है कि अनुसंधान और विकास पर हुआ यह खर्च देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक फीसदी हिस्से से भी कम रहा।

यह बात डिपार्टमेंट ऑफ साइंस के तहत आने वाले नेशनल साइंस एंड टेक्नॉलॉजी मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम (एनएसटीएमआईएस) ने एक अध्ययन के बाद सामने आई है। चीन और ब्राजील सरीखी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस मामले में भारत से बहुत आगे हैं। विकसित देश तो अपनी जीडीपी का करीब दो फीसदी हिस्सा आर एंड डी पर खर्च करते हैं। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि भारत में आर एंड डी पर खर्च करने के मामले में सरकार निजी क्षेत्र से आगे है। सरकार की तरफ से रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और कृषि अनुसंधान जैसे क्षेत्रों पर काफी खर्च किया गया है। उधर, निजी क्षेत्र ने फार्मा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान में ज्यादा रुचि भी ली है। जिन क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास पर सरकार ने पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं, उनमें देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्र में देश को मिली सफलताएं इस बात को साबित करती हैं कि शोध और अनुसंधान के क्षेत्र में किया गया निवेश अनुत्पादक नहीं होता, वह एक समयावधि के बाद लाभ लेकर ही आता है। ऐसे में अनुसंधान और विकास के मद में अधिक निवेश किए जाने की जरूरत तो है ही, उससे भी अधिक बड़ी चुनौती एक समृद्ध शोध-संस्कृति को गढ़ने की है।

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