सनावर के जंगल में फेंकी दवाइयां

धर्मपुर— तहसील कसौली के साथ लगते सनावर के जंगलों में हरियाणा के करनाल में बनी दवाइयां मिली हैं। ये दवाइयां एक्सपायरी हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों मे सनसनी फैल गई है। ये दवाइयां कौन फेंक गया है, इस बारे में अभी कोई जानकारी हासिल नहीं हुई है। सुबह लोगों को सनावर शिल्लड़-पठिया सड़क किनारे भारी मात्रा में दवाइयों के खेप मिली। रात का फायदा उठाकर कोई जंगलों में बायो वेस्ट फेंक गया है। जो दवाइयां फेंकी गई हैं, उसमें जीएमपी सर्टिफाइड कंपनी का मार्क है और यह हरियाणा के करनाल में बनी हैं। एक्सपायरी डेट की दवाइयां जंगल या नालों में फेंकने से पर्यावरण में दूषित केमिकल घुल जाता है। यह केमिकल सिंचाई के जरिए फसलों व पेयजल स्रोत में घुल सकता है। दूसरी ओर जिस जगह दवाइयां फेंकी गई हैं, वहां प्राकृतिक जल स्रोत भी है, जहां ग्राम पंचायत हुड़ंग के धाली, शिल्लड़ सहित साथ लगते गांव के लोग पशुओं को पानी पिलाने आते हैं और एक निजी कंपनी भी है, जो इसी नाले से पीने के लिए पानी लेकर जाती है। स्कूल के बच्चे अकसर इस रास्ते से पैदल आते-जाते हैं, तो ऐसे में खतरा बढ़ जाता है।

कंपनी को खेप उठाने के निर्देश जारी

सनावर के जंगल में जो दवाइयां फेंकी गई हैं, उनमें अधिक मात्रा में सिरप हैं, जिसमें रिलीव-एस सिरप, हर्बल टॉनिक फॉर लिवर डिसआर्डर्स, क्लिन्स फेयर सिरप नेचुरल ब्लड प्यूरिफायर, कैलिरेक्स सिरप टॉनिक विद कैल्शियम एंड आयरन, बाइनैक्सोजिम फोर्ट कंप्लीट टॉनिक टू स्टिमुलेट एपेटाइट एंड डिजेस्टिन, इमूपल्स सिरप दि पोटेंट इम्युनिटी मॉड्यूलेटर जैसे टॉनिक भारी मात्रा में थे। परवाणू के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सहायक अभियंता ललित का कहना है कि कंपनी को दावाइयां उठाने के लिए कह दिया है, अब दवाइयां डिस्पोज की जाएंगी।

यह है डिस्पोज ऑफ का तरीका

एक्पायरी डेट की दवाइयों से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव न पड़े, इसलिए इन्हें वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज ऑफ किया जाता है। यह कार्य इंसीनेटर की मदद से प्रदूषण बोर्ड की निगरानी में होता है। प्रदेश में बन रही दवाइयों के एक्सपायर होने पर इसे बद्दी स्थित बायो वेस्ट प्लांट में व बाहरी राज्यों में बन रही दवाइयों के एक्सपायर हो जाने पर उसी राज्य के बायो वेस्ट प्लांट में ही डिस्पोज किया जाता है।

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