हिमाचल को चाहिए विशेष औद्योगिक पैकेज

केंद्र से प्रदेश सरकार को बड़ी उम्मीदें, निवेशकों को रिझाने के लिए मास्टर प्लान की तैयारी

शिमला – हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विस्तार को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार फिलहाल पूरी तरह से केंद्र सरकार पर निर्भर है। केंद्र सरकार इस मसले पर प्रदेश की मदद करे तो यहां बड़े पैमाने पर उद्योग धंधे स्थापित हो सकते हैं। वहीं,  रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। इसके लिए राज्य सरकार को वही विशेष औद्योगिक पैकेज चाहिए, जैसा उसके पास पहले था। केंद्र की मोदी सरकार से विशेष औद्योगिक पैकेज हासिल करने के लिए राज्य सरकार प्रयास करेगी,जिसकी प्रतिबद्धता को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी दोहराया है। हिमाचल में पिछले कुछ समय में पहले से स्थापित उद्योग भी बंद हुए हैं। हालांकि इससे सरकार इनकार करती रही है परंतु  यह सच्चाई है कि यहां पर 100 से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योगों ने अपना काम समेट लिया। ऐसे में यहां पर स्थापित उद्योगों को बनाए रखना और नया निवेश लाने की चुनौती सरकार के सामने है। इस चुनौती से पार पाने के लिए सरकार मास्टर प्लान बनाएगी और तय करेगी कि उसे आगे ऐसा क्या करना है, जिससे यहां पर निवेश बढ़े। इसमें उद्योगपतियों व औद्योगिक संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी वहीं , दूसरे भाजपा शासित राज्यों में अपनाई जा रही पालिसी को भी देखा जाएगा। दूसरे राज्यों की तर्ज पर यहां उद्योगपतियों को राहत प्रदान करने के साथ राज्य के नए उद्योग क्षेत्रों को विकसित करने की कोशिश होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, वहीं उद्योग मंत्री को भी इस पर विस्तार से चर्चा करने के लिए कहा गया है। प्रदेश को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने विशेष औद्योगिक पैकेज दिया था, जिसे समय से पहले यूपीए सरकार ने वापस ले लिया। यहां पर विशेष औद्यौगिक पैकेज के दौरान बड़े पैमाने पर उद्योग आएं परंतु बाद में पैकेज खत्म होने के बाद उद्योगपतियों के लिए रियायतें नहीं बचीं। इससे यहां उद्योगों का पलायन तो शुरू हुआ ही वहीं नया निवेश भी नहीं आया। क्योंकि अब केंद्र व राज्य दोनों में भाजपा की सरकारें हैं लिहाजा प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि विशेष औद्योगिक पैकेज बहाल होगा। केवल इसी से यहां पर उद्योगों की रफ्तार बढ़ सकती है।

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