20 करोड़ का बिरोजा स्टोर में डंप

बिलासपुर के 15, नाहन के पांच करोड़ के रेजिन को नहीं मिल रही मार्केट

बिलासपुर— इंटरनेशनल मार्केट में रेट डाउन होने की वजह से देश भर में क्वालिटी के लिहाज से अव्वल आंके गए हिमाचल के बिरोजा (रेजिन) को अब एक सही मार्केट ही नहीं मिल पा रही। डेढ़ महीने से डिमांड न आने के चलते 15 करोड़ रुपए की लागत का बिरोजा (औसतन 229 ट्रकों का माल) बिलासपुर फैक्टरी में स्टोर है। विडंबना यह है कि बिरोजा एवं तारपीन फैक्टरी में अब बिरोजा स्टोरेज की कैपेसिटी भी फुल हो चुकी है, लिहाजा अब और बिरोजा रखने के लिए प्रबंधन के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। बीच-बीच में बिरोजे की डिमांड आई भी, जिसके चलते 12 करोड़ रुपए के लगभग बिरोजा बिक चुका है। फैक्टरी में अभी 15 करोड़ रुपए की लागत का बिरोजा स्टोर में उपलब्ध है। डेढ़ महीने से यह बिरोजा स्टोर में ही पड़ा हुआ है और खरीददार नहीं मिल पा रहे। विदेशों से सस्ता बिरोजा आयात हो रहा है, लिहाजा हिमाचल के बिरोजे की डिमांड घट गई है। बिरोजे का रेट 75 से 79 रुपए प्रति किलो है, जबकि विदेशों से आयात बिरोजे का रेट इससे सस्ता है, जिस कारण हिमाचल के बिरोजे को मार्केट मयस्सर नहीं हो पा रही। हालांकि वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बिरोजा एवं तारपीन फैक्टरी का निरीक्षण किया था और इस दौरान फैक्टरी महाप्रबंधक द्वारा उनके ध्यान में यह बात लाई गई है। वन मंत्री को बिरोजे की स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया है जिस पर वन मंत्री ने आश्वस्त किया है कि वह प्रबंधन के आलाधिकारियों से इस बाबत बातचीत करेंगे।

क्वालिटी पर पड़ेगा असर

नाहन बिरोजा फैक्टरी में भी लगभग पांच करोड़ रुपए लागत का बिरोजा स्टोर में उपलब्ध है। मार्केट न मिल पाने की वजह से बिरोजा स्टोर में पड़ा हुआ है, जिसका असर क्वालिटी पर पड़ सकता है। बिलासपुर में पंद्रह करोड़ लागत का बिरोजा है, लिहाजा हिमाचल में कार्यरत वन विकास निगम की दोनों फैक्टरियों बिलासपुर व नाहन में 20 करोड़ रुपए का बिरोजा स्टोर में ही पड़ा हुआ है। अब क्वालिटी पर असर पड़ेगा।

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