गोबर-धन योजना

इस योजना की घोषणा बजट 2018 में की गई थी। बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश के तहत इस योजना का जिक्र किया था। इस योजना के तहत गोबर और खेतों के बेकार या इस्तेमाल में न आने वाले उत्पादों को कंपोस्ट, बायो-गैस और बायो-सीएनजी में बदल दिया जाएगा। इस बार बजट में स्वच्छ भारत के तहत गांवों के लिए बायोगैस के माध्यम से वेस्ट टू वेल्थ और वेस्ट टू एनर्जी बनाने पर जोर दिया गया. गोबर धन योजना का उद्देश्य गांवों को स्वच्छ बनाना और पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पर्दाथों को कंपोस्ट और बायो-गैस में परिवर्तित कर, उससे धन और ऊर्जा जनरेट करना है।

उन्होंने बताया कि भारत में मवेशियों की आबादी पूरे विश्व में सबसे ज्यादा है। भारत में मवेशियों की आबादी लगभग 30 करोड़ है और गोबर का उत्पादन प्रतिदिन लगभग 30 लाख टन है। कुछ यूरोपीय देश और चीन पशुओं के गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट  का उपयोग ऊर्जा के उत्पादन के लिए करते हैं, लेकिन भारत में इसकी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा था। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत अब इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

मवेशियों के गोबर, कृषि से निकलने वाले कचरे, रसोईघर से निकलने वाला कचरा, इन सबको बायोगैस आधारित उर्जा बनाने के लिए इस्तेमाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गोबर धन योजना के तहत ग्रामीण भारत में किसानों, बहनों, भाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे गोबर और कचरे को सिर्फ कचरे के रूप में नहीं, बल्कि आय के स्रोत के रूप में देखें।

You might also like