विपक्ष बेवजह कर रहा वाकआउट

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बोले, राज्य सरकार ने जो किया ही नहीं, उसे खामखाह बनाया जा रहा मुद्दा

शिमला— मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बजट सत्र के पहले ही दिन विपक्ष द्वारा बेवजह सदन से वाकआउट करने को अवांछनीय, अशोभनीय व गैरजिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 1995, 1996 और 2016 में धारा-118 के सरलीकरण व संशोधन करने वाली कांग्रेस अब किस मुंह से इस मामले में सदन से वाकआउट कर रही है, जबकि मौजूदा सरकार की ऐसी कोई मंशा ही नहीं है। अभी तो इस पर किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है। हां विचार जरूर सामने आया है, जिस पर राय-मश्विरा करने के बाद ही यदि प्रदेश व जनहित में हुआ तो निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नियम 67 के तहत जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, वह औचित्यहीन है। यदि कानून में किसी तरह का संशोधन किया होता या सरलीकरण जैसा कदम उठाया होता तो विपक्ष ऐसा कदम उठाता। सरकार ने यह कहा था कि प्रदेश में धारा-118 का सरलीकरण होता रहा है। वर्ष 1995, 1996 और 2016 में सत्ता में कांग्रेस सरकार ही रही। इन्होंने ही संशोधन व सरलीकरण किए। मौजूदा सरकार के लिए प्रदेशहित और नागरिक हित सर्वोपरि रहे हैं और रहेंगे। सरकार ने संबंधित कानून में संशोधन का न तो जिक्र किया, न ही कोई बदलने की बात कही। यह दीगर है कि 1972 में जब यह कानून बना तो उसके बाद कई बार इसके नियमों में संशोधन किए गए। विपक्ष बेवजह अखबार की सुर्खियां बनने का प्रयास कर रहा है। कांग्रेस विधायक दल के नेता जल्दी में दिख रहे हैं। सरकार यह जरूर चाहती है कि औद्योगिक, हाइडल प्रोजेक्ट, टूरिज्म सेक्टर में निवेश के लिए बड़े स्तर पर लोग आगे आएं व विकास में अपना सहयोग दें। सरकार ने इसी संदर्भ में धारा-118 के सरलीकरण का विचार लोगों के बीच रखा है। अभी तो वह खुद वाकिफ नहीं कि इस मसले पर करना क्या है। विपक्ष भी इस मामले में सुझाव दे।

हार के सदमे से बाहर नहीं निकली कांग्रेस

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद सदमें से उभर नहीं पा रही है। इससे पहले कि वह उभरती पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस को मिली करारी हार ने उसकी पीड़ा और बढ़ा दी। अब 2019 का भी इंतजार कर लें।

…तो बैठना भी मुश्किल हो जाएगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता में आते ही वह कह चुके हैं कि बदले की भावना से काम करना उनकी नियती नहीं है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में जो कारनामे किए हैं, उन्हें अगर कुरेदने लगे तो अधिकांश सदस्यों का यहां बैठना मुश्किल हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि सरकार ऐसे में विवश होगी जो सोचा नहीं था वह भी करना पड़ेगा।

सदन में ऐसा भी हुआ…

सीएम से हाथ मिलाने की होड़

मुख्यमंत्री जैसे ही सदन पहुंचे तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से हाथ मिलाकर अभिवादन किया। कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री सहित विपक्ष के हर सदस्य के पास मुख्यमंत्री जाकर मिले। खास बात यह रही कि सत्तापक्ष की तरफ से हर विधायक मुख्यमंत्री से हाथ मिलाने की होड़ में था। कइयों ने मुख्यमंत्री के पांव भी छुए। मुख्यमंत्री से पूर्व आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने भी विपक्षी सदस्यों का अभिवादन किया।

मुक्ति वाहिनी के सदस्य

स्वर्गीय विधायक कैप्टन आत्मा राम के निधन पर शोक जताते हुए यह खुलासा हुआ कि वह मुक्ति वाहिनी के सदस्य थ,े जिसने बांग्लादेश के बंटवारे के समय में अहम भूमिका निभाई थी। तब आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी उनके साथ उस वाहिनी में थे। यह सुनकर सभी हतप्रभ रह गए। खुद महेंद्र सिंह ने भी इसका जिक्र किया।

पहचानने में लगेगा समय

सदन में काफी संख्या में नए विधायक पहुंचे हैं, जिनमें भाजपा के अधिक हैं। अभी इन विधायकों को कोई भी यहां पूरी तरह से नहीं पहचान पा रहा, जिसमें समय लगेगा। विधानसभा में कार्यरत कर्मचारी भी नए विधायकों को पहचानने में बार-बार भूल कर रहे हैं, वहीं सदन के भीतर एक-दूसरे की उतनी अधिक पहचान नहीं है।

नए सीसीटीवी कैमरे

परिसर के भीतर सदन में नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यहां चार नए सीसीटीवी पूरे सदन पर नजर रखे हुए हैं। हर द्वार पर इनकी पैनी निगाह है, वहीं  भीतर बैठे लोगों पर भी इनके माध्यम से निगाह रखी जा रही है।

बज गई मोबाइल की घंटी

सदन में वैसे मोबाइल फोन ना बजे इसके लिए जैमर लगाए गए हैं, लेकिन अभी भी यह पूरी तरह से काम नहीं कर पा रहे। पहले दिन भी जब कार्यवाही चल रही थी तो उस समय एक विधायक के फोन की घंटी बज उठी।

वामपंथ की आवाज

सालों बाद विधानसभा के भीतर वामपंथ की आवाज भी गूंज रही है। विपक्ष ने वाकआउट किया, लेकिन वामपंथी नेता राकेश सिंघा उनके साथ नहीं थे। उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से सदन में बाकायदा पक्ष भी रखा। उन्हें बोलने के लिए अलग से विशेष रूप से समय दिया जा रहा है, क्योंकि वह तीसरी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके माध्यम से यहां सालों बाद वामपंथ की आवाज गूंजी।

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