गर्म पानी के चश्मों के लिए प्रसिद्ध है मणिकर्ण

कसोल से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर अपने गर्म पानी के चश्मों के लिए मणिकर्ण प्रसिद्ध है। इसके गर्म जल में हजारों लोग अपना पवित्र स्नान करते हैं। पानी इतना गर्म है कि इसमें दाल, चावल और सब्जियों को भी उबाला जा सकता है…

मकलोडगंज

मकलोडगंज एक उदीयमान तिब्बत उपनिवेश के रूप में उभरा है। महामहिम दलाईलामा के वर्तमान निवास के  सामने बुद्ध का मंदिर स्थित है। निष्पादन कला का तिब्बती संस्थान मकलोडगंज से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसमें तिब्बती रंगमंच की परंपराएं और बहुत से संगीत नृत्य सुरक्षित हैं। वहां तिब्बती हस्तकला का केंद्र भी स्थित है।

मणिकर्ण

मणिकर्ण कुल्लू से 45 किलोमीटर और कसोल से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर अपने गर्म पानी के चश्मों के लिए प्रसिद्ध है। इसके गर्म जल में हजारों लोग अपना पवित्र स्नान करते हैं। पानी इतना गर्म है कि इसमें दाल, चावल और सब्जियों को भी उबाला जा सकता है एक पौराणिक कथा के अनुसार मणिकर्ण का संबंध भगवान शिव और उसकी अर्द्धांगिनी  पार्वती से है, जिसने स्नान करते हुए कान की बाली खो दी। जब उसने शिव को बताया तो भगवान ने कुंड के जल की ओर गुस्से से देखा, जिसने पार्वती नदी के किनारे पर गर्म जल को जन्म दिया। वहां एक गुरुद्वारा है तथा शिव व रामचंद्र को समर्पित मंदिर है।

महाराजा संसार चंद संग्रहालय

कांगड़ा किले के समीप महाराजा संसार चंद संग्रहालय 20 नवंबर, 2012 ई. को लोगों के लिए खोला गया है, संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर संपूर्ण कटोच वंशावली का चार्ट तस्वीरों के साथ प्रदर्शित किया गया है जो शाही परिवार द्वारा रखी गई वस्तुओं जैसे स्फटिक और चांदी के बरतन, कपड़े, सिक्के, एक चांदी का बिस्तर, तलवारें, दूरबीन, कुछ लिखे हुए मूल ग्रंथ और लगभग वह सारी चीजें जो शाही जीवनशैली को दिखाती हंै प्रदर्शित की है। संग्रहालय के अंदर की दीवारों की कलाकारों द्वारा चित्रित किया गया है, जिनको विशेष तौर पर राजस्थान से बुलाया गया था। यह संग्रहालय पुरातत्व स्थानों और अवशेष के लेख अधिनियम 2010 के अंतर्गत आता है।

मलाणा

यह स्थान सुंदर चंद्रखान दर्रे से थोड़ा आगे पड़ता है। मलाणा जमलू देवता के मंदिर और अपने अद्वितीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के लिए प्रसिद्ध है। मलाणा विश्व का सबसे प्राचीन लोकतंत्र माना जाता है।

मानगढ़

मानगढ़ में एक प्राचीन हिंदू मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का संबंध पांडवों से है।

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