निशानेबाजी हटाई तो भारत न खेले अगला कॉमनवेल्थ

नई दिल्ली— गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में सात स्वर्ण सहित 16 पदक जीतने वाले भारतीय निशानेबाजों के भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने कहा है कि यदि निशानेबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों में बहाल नहीं किया जाता है तो भारत को 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल का बहिष्कार करना चाहिए। एनआरएआई के अध्यक्ष रणइंदर सिंह ने मंगलवार को गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता भारतीय निशानेबाजों के लिए आयोजित सम्मान समारोह में कड़े शब्दों में कहा कि मैं खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को एक- दो दिन में पत्र लिखने जा रहा हूं कि यदि अगले खेलों में निशानेबाजी की वापसी नहीं होती है तो भारत को पूरे बर्मिंघम खेलों का बहिष्कार करना चाहिए। निशानेबाजी को 2022 में होने वाले बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों से हटा दिया गया है और गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में आखिरी बार निशानेबाजी का आयोजन किया गया। भारतीय निशानेबाजों ने गोल्ड कोस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक सहित सर्वाधिक 16 पदक जीते। रणइंदर ने कहा कि हम अपनी तरफ से निशानेबाजी की राष्ट्रमंडल खेलों में बहाली की पूरी कोशिश कर रहे हैं। मैं खुद भी राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के अध्यक्ष मार्टिन लुइस से व्यक्तिगत संपर्क में हूं। इस मुद्दे पर लगातार बातचीत चल रही है। हमने एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) से भी इस मामले को सीजीएफ से उठाने को कहा है। एनआरएआई के अध्यक्ष ने कहा कि आईएसएसएफ की सीजीएफ के साथ इस मामले को लेकर तीन बैठक हो चुकी हैं जिसमें मार्टिन और अगले खेलों की आयोजन समिति के सदस्य भी शामिल हुए थे।   रणइंदर ने कहा कि हम अपनी तरह से पूरी कोशिश कर रहे हैं और मैं इस मंच का इस्तेमाल करते हुए सरकार से कहना चाहता हूं कि वह निशानेबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों में बहाल कराने का प्रयास करे और यदि ऐसा नहीं होता है तो बर्मिघम खेलों का बहिष्कार किया जाए। उन्होंने कहा कि निशानेबाजी की अपनी परंपरा है। यह एक ओलंपिक खेल है, हमारा इन खेलों में शानदार रिकार्ड है इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि कैसे इसे राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर कर दिया गया। मैं बुधवार को मुंबई में आईओसी की सदस्य नीता अंबानी से इस मुद्दे पर बात करूंगा। रणइंदर ने कहा कि निशानेबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों से हटाने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इसे देखने वाले ज्यादा लोग नहीं है जबकि सच्चाई यह है कि 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी मुकाबलों में जगह नहीं बची थी

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