सामाजिक न्याय सुलभ बनाने को करें प्रयास

धर्मशाला में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता ने न्यायिक अधिकारियों से किया आग्रह

धर्मशाला— न्याय प्रणाली से जुड़े सभी अधिकारी सामाजिक न्याय सुलभ बनाने, लोगों को उनके अधिकारों के बारे में अवगत करवाने और उन्हें अधिकारों को प्राप्त करने के रास्ते सुझाने के लिए प्रयास करें। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने न्यायिक अधिकारियों से संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय दर्शन को ध्यान में रखकर कार्य करने का आग्रह किया है। शनिवार को न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी द्वारा शीघ्र न्याय के लिए प्रभावी न्यायालय प्रबंधन विषय पर धर्मशाला के डीआरडीए भवन के सभागार में आयोजित व्याख्यान माला की दूसरी कड़ी में व्याख्यान दिया। इस मौके प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मचंद चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे। व्याख्यानमाला का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का बैकलॉग कम करने व त्वरित न्याय दिलाने में सुधारों के लिए अपनाई जा सकने वाली प्रणाली से अवगत करवाना था। श्री गुप्ता ने मौजूद सदस्यों को न्यायालय के प्रभावी प्रबंधन एवं मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर महत्त्वपूर्ण जानकारी व सुझाव दिए। उन्होंने पब्लिक पोर्टल ‘राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड’ (एनजेडीजी) के समुचित उपयोग पर बल दिया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने न्यायिक दर्शन पर बात की और सभी को न्याय प्राप्त करने के समान अवसरों पर जोर दिया। उन्होंने न्याय प्रणाली को अधिक कारगर एवं गतिशील बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का समुचित उपयोग करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी अदालतों को राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड से जोड़ा गया है। न्यायमूर्ति धर्मचंद चौधरी ने न्यायालयों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर अपने अनुभव साझा किए व प्रबंधन बारे अनेक बहुमूल्य सुझाव दिए। न्यायिक अकादमी के निदेशक चिराग भानु सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि न्यायिक अकादमी के उपनिदेशक अविनाश चंद्र ने मुख्यातिथि का धन्यवाद किया। सचिव सीनियर सिविल जज नेहा दहिया ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांगड़ा पुरेंदर वैद्य सहित ऊना, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू व लाहुल-स्पीति जिलों के सिविल और सत्र न्यायालयों के लगभग 73 न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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