पानी के लिए घेरे मेयर

 शिमला —शहर में पेयजल संकट को लेकर कांग्रेस समर्थित पार्षदों सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को नगर निगम शिमला के उपमहापौर राकेश कुमार शर्मा का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने उपमहापौर कार्यालय में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और महापौर, उपमहापौर से इस्तीफा देने की मांग भी उठाई। उपमहापौर कार्यालय में प्रदर्शनकारियों ने नीचे बैठक कर अपना रोष जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भाजपा शासित निगम ने शहर की जनता को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित कर दिया है। पूर्व पार्षद सुरेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित निगम में आपसी तालमेल नहीं है। भाजपा शासित पार्षद ही महापौर के खिलाफ हो गए हैं। आपसी तालमेल न होने की मार जनता पर पड़ रही है। पार्षद आनंद कौशल ने कहा कि शिमला शहर में पेयजल संकट पहली बार इतना गहराया है। जनता को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है और महापौर टूअर में व्यस्त है। निगम जनता की मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी गंभीर नहीं है। ऐसे में महापौर व उपमहापौर को अपना पद छोड़ देना चाहिए। इस वक्त राजधानी में हालात ये हैं कि बिना पानी के स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिसके लिए निगम प्रशासन जिम्मेदार है।

संकट के लिए सरकार भी जिम्मेदार

शहर में भारी पेयजल संकट चल रहा है। ऐसे समय में महापौर चाइना के दौरे में है। महापौर को चाहिए था कि वह जनता के बीच खड़ी रहती। मगर वह अपने सैर-सपाटे में व्यस्त है। पार्षद राकेश चौहान ने आरोप लगाया कि महापौर के साथ-साथ राज्य सरकार भी इसके लिए जिम्मेदार है। शहर दिक्कतों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सरकार ने कैसे महापौर को विजिट की अनुमति दे दी।

स्थानीय विधायक मौन क्यों

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पेयजल प्रकरण में स्थानीय विधायक मौन क्यों हैं, जबकि पूर्व में पेयजल किल्लत के समय विधायक ने खूब हल्ला मचाया था। शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि है, लेकिन विधायक के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा है।

बिना टेस्टिंग दिया जा रहा पानी

पूर्व पार्षद सुरेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि शहर में 2-2 हजार रुपए में प्राइवेट टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। मगर इन टैंकरों द्वारा हो रहे पानी की टेस्टिंग नहीं हो रही है। बिना टेस्टिंग के ही जनता को पानी दिया जा रहा है, जो जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

24 घंटे सप्लाई देने का किया था वादा

निगम चुनाव के समय भाजपा ने जनता से रोजाना 24 घंटे पानी देने का वादा किया था। वहीं, पानी की दरें कम करने के प्रति भी आश्वासन दिया था। मगर 11 माह का समय बीत चुका है। न तो पानी की दरें कम हुई हंै और न ही जनता को 24 घंटे पानी मिल पाया है। उल्टे पानी के लिए जनता को सप्ताह-सप्ताह भर इंतजार करना पड़ रहा है।

ट्यूबवेल का नहीं हो रहा प्रयोग

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि समर सीजन के दौरान पेयजल परियोजनाओं में पानी उठाने के लिए ट्यूबवेल का प्रयोग किया जाता है। मगर इस बार ट्यूबवेल का प्रयोग नहीं हो रहा है। पेयजल परियोजनाओं से 10-12 टैंकर रोजाना शहर में आ रहे हंै, मगर निगम प्रशासन इन पर नकेल नहीं कस पाया है।

वार्डों से नहीं उठा रहा कूड़ा

शहर में जल संकट के साथ-साथ डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन योजना भी चरमरा गई है। कई वार्डों में अभी भी 4-5 दिन बाद कूड़ा उठ रहा है। निगम प्रशासन जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हो रहा है।

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