खेल में हिमाचली युवा

Jul 30th, 2018 12:10 am

क्रिकेट हो,कबड्डी हो, शूटिंग या फिर हॉकी…  किसी भी खेल का जिक्र  किया जाए तो उसमें पहाड़ की प्रतिभाएं किसी से कम नहीं हैं। प्रदेश के प्लेयर देश-दुनिया में हिमाचल का नाम रोशन कर रहे हैं।  प्रदेश में खेल ढांचे व होनहारों की उपलब्धियां  बता रहे हैं,  टेकचंद वर्मा और भावना शर्मा…

हिमाचल प्रदेश के कई खिलाड़ी आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहाड़ी प्रदेश का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। क्रिकेट, शूटिंग, एथलेटिक्स और कबड्डी में पदक जीतकर प्रदेश के खिलाडि़यों ने विश्व भर में हिमाचल का नाम रोशन किया है। क्रिकेट में सुषमा वर्मा, ऋषि धवन, कबड्डी में प्रियंका नेगी, अजय ठाकुर, शूटिंग में विजय कुमार प्रदेश के लिए बड़ा सम्मान दिला चुके हैं।

हिमाचली युवा भी खेलों (राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर) पर बेहतरीन प्रदर्शन कर प्रदेश के लिए पदक जीत रहे हैं। कबड्डी, हैंडबाल, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स खेलों में प्रदेश के युवाओं ने हाल ही में उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश महिला कबड्डी टीम ने सीनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। महिला हैंडबाल टीम ने भी नेशनल में रजत पदक जीतकर प्रदेश को पदक दिलाया।  खेलो इंडिया में भी कबड्डी में प्रदेश टीम विजेता रही है।

इसके अलावा एथलेटिक्स में चंबा की सीमा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में पदक जीतकर पहाड़ी प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रदेश को आशीष ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग में पदक जीतकर प्रदेश के लिए मेडल जीता। इसके अलावा कराटे, बॉक्सिंग जूडो और ताइक्वांडो खेल में भी प्रदेश के खिलाड़ी उम्दा प्रदर्शन कर प्रदेश के लिए पदक जीत रहे हैं।

स्पेशल ओलंपिक में भी बेहतर प्रदर्शन

स्पेशल ओलंपिक के बैनर तले प्रदेश के विशेष खिलाड़ी भी उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं।  स्पेशल वर्ल्ड समर गेम्स के लिए आयोजित आखिरी चरण के प्रशिक्षण कैंप में भी प्रदेश के कई खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। अगर आखिरी चरण में उनका चयन होता है तो वह वर्ल्ड समर गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

एचपीयू को पैसे की तंगी

खेलों के क्षेत्र में प्रदेश विश्वविद्यालय दूसरे विश्वविद्यालयों की तर्ज पर पिछड़ा हुआ है। एचपीयू प्रशासन विवि और कालेजों में तो यूथ फेस्टिवल और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है, लेकिन नई खेलें विवि के स्पोर्ट्स कैलेंडर में शामिल नहीं हो पाती हैं। एचपीयू ने विभाग तो बना दिया है, लेकिन इसमें बजट की कमी के साथ-साथ आधारभूत ढांचा ही नहीं है। विभाग को वर्ष भर की गतिविधियों के लिए इस वर्ष भी मात्र 25 लाख का ही बजट मुहैया करवाया गया है। ऐसे में इतने कम बजट में इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताएं करवाने के साथ ही यूथ फेस्टिवल और अन्य गतिविधियां प्रदेश के कालेजों सहित विश्वविद्यालय में करवानी हैं। बजट की कमी ही सबसे बड़ी समस्या है कि एचपीयू इन वार्षिक गतिविधियों के अलावा अन्य कोई भी समर कैंप प्रदेश में आयोजित नहीं कर पा रहा है।  विवि को छोड़कर अन्य बाहरी राज्यों के विश्वविद्यालय समर कैंप आयोजित कर रहे हैं। इन विश्वविद्यालयों में स्पोर्ट्स के विभागों को उनमें होने वाली वार्षिक स्पोर्टस गतिविधियों के तहत ही बजट मिलता है। साथ ही इन विश्वविद्यालयों को कैंप के लिए भी अतिरिक्त बजट मुहैया करवाया जाता है। इसके मुकाबले प्रदेश के एकमात्र विश्वविद्यालय में युवा एवं शारीरिक शिक्षा विभाग मात्र छात्रों को कोर्स करवाने और उन्हें थ्योरी का ही ज्ञान देने तक सिमट कर रह गया है। विवि  के पास न ही बेहतर खेल मैदान हैं और न ही खेलों के पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर। हालात यह है कि एचपीयू में स्पोर्ट्स कोच के 12 पद खाली हैं। ऐसे में विभाग अपने अच्छे खिलाडि़यों को सही स्पोर्ट्स ट्रेनिंग ही नहीं दे पा रहा है जिसकी वजह से न ही समर कैंप एचपीयू लगा पा रहा है न ही कोई अन्य गतिविधियां करवाई जा रही हैं।

समर कैंप की सोच नहीं सकते

एचपीयू के खेल विभाग में निदेशक प्रो. सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि इतने कम बजट में इंटर कालेज और यूथ फेस्टिवल में होने वाली प्रतियोगिताएं और चैंपियनशिप भी करवा पाना संभव नहीं होता है तो समर कैंप करवाने का विचार भी एचपीयू नहीं कर सकता है।

पंचायतों में बनेंगे खेल मैदान

वर्तमान सरकार की प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान विकसित करने की योजना है। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभा को बेहतर प्लेट फार्म व खेल संबंधित सुविधा प्रदान करने के लिए पंचायत स्तर पर सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें खेल मैदान, उपकरण जिम का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा सरकार की खिलाडि़यों को हर संभव आधुनिक सुविधाएं जुटाने की योजना है, ताकि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहाड़ी प्रदेश का नाम रोशन कर सके। राज्य सरकार की खेल नीति पर अभी चर्चा चल रही है। खेल नीति के लिए सरकार दूसरे राज्यों के मॉडलों को देखा जा रहा है। सरकार खिलाडि़यों के करियर को बेहतर दिशा प्रदान करने के लिए खेल नीति का प्रावधान कर रही है।

प्रदेश में चार इंडोर स्टेडियम

मौजूदा समय में प्रदेश में चार इंडोर स्टेडियम हैं, जो प्रदेश के धर्मशाला, ऊना, बिलासपुर और रोहड़ू में हैं। रोहड़ू में इंडोर स्टेडियम के साथ-साथ आउटडोर स्टेडियम का भी निर्माण किया जा रहा है। वहीं घुमारवीं, सोलन, चंबा और हमीरपुर में भी स्टेडियम निर्माण प्रस्तावित है।

प्रतिभावान खिलाडि़यों को मिलेगा सम्मान

सरकार का दावा है कि राज्य में प्रतिभावान खिलाडि़यों को पूरा सम्मान मिलेगा।  सरकार खेल नीति में इसके लिए विशेष प्रावधान करेगी। खेल नीति बनाने के लिए सरकार दूसरे राज्यों के मॉडलों का अध्ययन कर रही है।

खिलाडि़यों को दिया जाएगा सम्मान

खेल विभाग खिलाडि़यों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें बेहतर सम्मान देना, जिसमें पदक विजेता खिलाडि़यों को निर्धारित राशि से सम्मानित किया जाएगा। वहीं स्पोर्ट्स कोटे के तहत रोजगार उपलब्ध करवाकर खिलाडि़यों को विभिन्न खेलों के तरफ आकर्षित किया जाएगा।

इन्होंने जमाई धाक

कबड्डी, क्रिकेट, एथलेटिक्स, शूटिंग, बॉक्सिंग, साफ्टबाल और कराटे में बेहतर प्रदर्शन कर खिलाडि़यों ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। क्रिकेट में सुषमा वर्मा व ऋषि धवन ने बड़ा सम्मान दिलाया है। हाल ही में कबड्डी लीग में प्रदेश के अजय ठाकुर ने प्रदेश टीम की कमान संभाली थी। कबड्डी वर्ल्ड कप में अजय ठाकुर ने बेहतर प्रदर्शन कर बड़ा सम्मान दिलाया था।

मल्टी पर्पज स्पोर्ट्स ग्राउंड की कमी

हिमाचल प्रदेश में खिलाडि़यों को खेल संबंधित आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है। आधारभूत ढांचा उपलब्ध न होने से आज युवा वर्ग खेलों से किनारा कर रहे हैं। अगर प्रदेश में खिलाडि़यों को खेलों को लेकर हर सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है तो प्रदेश के खिलाड़ी  प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी अजय मोहन का कहना है कि राज्य में खेल मैदान की कमी है। राज्य में गिनती के ही खेल मैदान है। अन्य राज्यों में मल्टी पर्पज स्पोर्ट्स ग्राउंड हैं।

 नशे के गर्त में जा रही प्रतिभाएं

क्रिकेट खिलाड़ी विभव काल्टा का कहना है कि प्रदेश के युवाओं में नशे का चलन बढ़ गया है। नशे के चलते ही युवा वर्ग की खेलों के प्रति सक्रियता कम होती जा रही है। इसके अलावा राज्य में खेल मैदानों की भी कमी है। अन्य राज्यों के मुकाबले प्रदेश में खेल मैदानों की कमी है। अगर ब्लॉक व जिला स्तर पर सरकार खेल मैदानों का निर्माण करती है तो युवाओं की खेलों के साथ सक्रियता को और अधिक बढ़ाया जा सकता है।

विवि  करेगा समाधान

विवि कुलपति प्रो.राजिंद्र सिंह चौहान का कहना है कि विवि खेल के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वर्ष भर की खेल गतिविधियों को किस तरह से चलाना है इसके लिए स्पोर्ट्स काउंसिल का गठन  किया गया है। बजट भी खेलों के लिए मुहैया करवाया जा रहा है। इसके  बाद भी अगर कोई कमी बजट और किन्हीं अन्य कारणों के चलते खेल गतिविधियों को आयोजित करने में आ रही है, तो उसके लिए भी समाधान विश्वविद्यालय प्रशासन तलाशेगा।

25 करोड़ से विकसित होगा आधारभूत ढांचा

दिनेश मल्होत्रा सचिव, खेल 

प्रदेश के खिलाडि़यों को खेलों के प्रति आकर्षित करने के लिए विभाग विभिन्न खेल संबंधित ढांचे को विकसित करेगा।   खेल सचिव दिनेश मल्होत्रा का कहना है कि राज्य में युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित करने के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। राज्य में खेलों संबंधित ढांचा विकसित करने के लिए 25 करोड़ रुपए की राशि व्यय की जाएगी, जिसमें इंडोर व आउटडोर स्टेडियम का निर्माण सहित सिंथेटिक टै्रक का निर्माण किया जाएगा। पंचायत स्तर पर खेल फील्ड तैयार की जाएगी। वहीं युवाओं को फील्ड तक लाने के लिए स्कूलों, कालेजों में इवेंट शेड्यूल तैयार कर स्पर्धाएं करवाई जाएगी। इसके अलावा ब्लॉक जिला, स्टेट चैम्पियनशिप आयोजित कर खिलाडि़यों को प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया जाएगा।

प्रदेश में खेल ढांचे का हो रहा विस्तार

प्रदेश में खिलाडि़यों व खेलों को बढ़ावा देने के लिए ढांचा विकसित किया जा  रहा है, जिसमें खिलाडि़यों को आधुनिक सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि राज्य में खेलों को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर पर खेल ढांचा विकसित किया जाएगा। राज्य में हर प्रतिभावान खिलाड़ी को सम्मान मिलेगा। प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए हर खेल के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है।

ंसरकार व विभाग एथलेक्टिस, बॉक्सिंग, हैंडबाल, कबड्डी, हाकी बास्केटबाल, फुटबाल खेल के लिए ढांचा विकसित कर रही है। धर्मशाला व हमीरपुर के एथलीटों को आधुनिक सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। हाल ही में उक्त क्षेत्रों के खिलाडि़यों के लिए सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण किया गया है। बिलासपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर को सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो दिसंबर तक खिलाडि़यों को समर्पित कर दिया जाएगा। शिमला के रोहड़ू-सरस्वतीनगर में भी सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है। हाल ही में उक्त सिंथेटिक ट्रैक निर्माण के लिए शिलान्यास पट्टिका रखी गई। जिला शिमला के रोहड़ू में आउट डोर स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। वहीं घुमारवीं-सोलन व चंबा में इंडोर स्टेडियम का निर्माण प्रस्तावित है। हमीरपुर में आउटडोर स्टेडियम का निर्माण भी प्रस्तावित है।

65 प्रशिक्षक दे रहे हैं गुरूमंत्र

* 11 जिला में दिया जा रहा है प्रशिक्षण * 113 पद स्वीकृत,  कोच के 48 पद खाली

प्रदेश में मौजूदा समय में 65 प्रशिक्षक विभिन्न खेलों में खिलाडि़यों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। जिला शिमला में सबसे अधिक प्रशिक्षक तैनात हैं। खेल विभाग द्वारा लाहुल-स्पीति को छोड़कर प्रदेश के हर जिला में प्रशिक्षक तैनात कर खिलाडि़यों को तैयार किया जा रहा है। हालांकि विभाग द्वारा कुछ वर्ष पहले जूनियर प्रशिक्षकों की तैनाती की गई थी। मगर इसके बावजूद राज्य में प्रशिक्षकों की कमी चल रही है। विभाग में 113 प्रशिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। अभी भी 48 प्रशिक्षकों के पद खाली हैं।

मौजूदा समया में बिलासपुर में तीन जूनियर कोच तैनात हैं। बिलासपुर में हाकी, बास्केटबाल और एथलेटिक्स के प्रशिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। चंबा में वालीबाल, हमीरपुर में चार कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, हैडबाल, हॉकी के प्रशिक्षक हैं। कांगड़ा में आठ प्रशिक्षक हैं। कांगड़ा में वेट लिफ्टिंग, जिम, कबड्डी, खो-खो, हॉकी, एथलेक्टिस, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, किन्नौर में दो कोच तैनात हैं। किन्नौर में फुटबाल व बाक्सिंग का प्रशिक्षक तैनात है।   सिरमौर में बास्केटबाल, फुटबाल और टेबल टेनिस खेल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिमला में नौ कोच बॉक्सिंग एथलेटिक्स, बास्केटबाल, वालीबाल, साफ्टबॉल, वालीबाल जूडो और कबड्डी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा इंदिरा गांधी खेल परिसर में भी 10 प्रशिक्षक तैनात हैं। खेल परिसर में बॉक्सिंग, जूडो, ताइक्वांडों, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, फिटनेस, श्ूटिंग, टेबल टेनिस, कराटे और वालीबाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सोलन में सात प्रशिक्षक खिलाडि़यों की खेल शैली निखार रहे हैं। सोलन में रेस्लिंग, फुटबाल, टेबल टेनिस, कबड्डी, फुटबाल, टेबल टेनिस, कबड्डी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बास्केटबाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कुल्लू में हैंडबाल, कबड्डी और एथलेटिक्स का प्रशिक्षक तैनात है। मंडी में बालीबाल, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, बास्केटबाल, क्रिकेट, हाकी, फुटबाल और हैंडबाल का कोच तैनात है। ऊना में सात प्रशिक्षक तैनात हैं। जो जूडो, एथलेक्टिस, फुटबाल, बालीबाल, बैडमिंटन, हॉकी, रेस्लिंग और टेबल टेनिस का कोच प्रशिक्षण दे रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के खेल एवं युवा निदेशालय में 12 कोच के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से एक भी पद पर भर्ती नहीं हो पाई है। वहीं विभाग में मात्र चार शिक्षकों की तैनाती की गई है, जबकि चार लेक्चरर सहित रीडर और प्रोफेसर के पद भी निदेशालय में खाली पड़े हैं।

खेल मैदान, सिंथेटिक ट्रैक की जरूरत

हिमाचल में तीन दशक पूर्व तक खेल ढांचे के नाम पर आजादी के पूर्व राजा-महाराजाओं द्वारा उनकी रियासतों में मेले उत्सवों व सैनिक परेड के बनाए गए चंद मैदान ही थे, जिन पर मेले उत्सवों के बाद खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित करवाई जाती थीं। ठाकुर रामलाल के मंत्री कार्यकाल में तत्कालानी खेल निदेशक टीएल वैध की सोच पर इंडोर खेलों के लिए इंदिरा गांधी खेल परिसर शिमला तथा बिलासपुर की लुहणू खेल परिषद सहित कई अन्य योजनाओं पर कार्य शुरू हुआ, जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। प्रो. प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में   विश्व स्तरीय खेल ढांचे का निर्माण हुआ। ऊना में एस्ट्रो टर्फ हाकी के लिए बिछाया गया। धर्मशाला तथा हमीरपुर में सिंथेटिक ट्रैक निर्मित हुए कई इनडोर स्टेडियमों में वुडन फ्लोटिंग के साथ लाखों रुपए की टेरा फ्लैक्स तथा कबड्डी व कुश्ती के लिए मैट खरीद कर बिछाए गए, मगर इस समय भी प्रदेश के कई जिलों में विभिन्न खेलों के लिए आधारभूत ढांचे की जरूरत है तथा वहां आसानी से उसके बनने की भी संभावना है। आज हिमाचल में एक भी फुटबाल मैदान नहीं है। धर्मशाला का पुलिस मैदान, ऊना का पंजौर सहित कई अन्य स्थानों पर भी केवल फुटबाल के लिए मैदान विकसित किए जा सकते हैं। लुहणू में हाकी के टर्फ बिछाई जा सकती है, वहां बन रहे सिंथेटिक ट्रैक को जल्द ही तैयार करवा देना चाहिए। चंबा से सीमा के आने से एक बार फिर एथलेटिक्स में पहचान हुई है, वहां पर भी एक ट्रैक जरूरी है। शिमला व सिरमौर से कई लड़कियां वालीबाल तथा कबड्डी में सामने आ रही हैं।  शूटिंग में विजय कुमार, समरेश जंग सहित कई शूटर ओलंपिक, राष्ट्रमंडल व एशियाई में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। हिमाचल में दो-तीन शूटिंग रेंज बनवाना बेहद जरूरी है। पौंग डैम तथा गोबिंद सागर में पानी की कई खेलों के लिए प्ले फील्ड है। कुल्लू व शिमला जिलों में बर्फ की खेलों के लिए संभावनाएं हैं। इन खेलों के खेल संघ सरकार के साथ मिलकर पहल करें। शिमला के हवाई अड्डे के नजदीक बन रहे कटासनी खेल परिसर को भी अब कागजों से बाहर लाकर जमीन दिखा देनी चाहिए। एथलेटिक्स सभी खेलों की जननी है, क्योंकि विस्थापन की मूल क्रियाओं चलना, दौड़ना, कूदना तथा फेंकने की लगभग दो दर्जन से भी अधिक स्पर्धाएं आयोजित होती हैं। हिमाचल के धावक तथा धाविकाएं अधिकतर लंबी व मध्य दूरी की दौड़ों में अपनी प्रतिभा का परिचय देते आए हैं। सुमन राव से लेकर सीमा तक इतिहास गवाह है, मगर तेज गति की दौड़ों में पुष्पा ठाकुर ने अपनी श्रेष्ठता वरिष्ठ राष्ट्रीय खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर एशियाई व ओलंपिक खेलों के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में चयनित होकर सिद्ध कर दी है। हमीरपुर की  धाविका प्रोमिला ने भी अंतर विश्वविद्यालय खेलों में पदक जीता है। इस बात को संजो देवी ने भाला प्रक्षेपण में राष्ट्रीय चैंपियन होकर बता दिया है। हिमाचल से  धावक निकले हैं, मगर तेज गति व प्रक्षेपण में ही हिमाचल अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

— भूपिंद्र सिंह

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