ड्रेसअप होता हिमाचली युवा

Jul 9th, 2018 12:05 am

पर्सनेलिटी में बोलचाल का जितना महत्त्व है, उतना ही पहनावा भी मायने रखता है। समय के साथ-साथ ड्रेसिंग का ट्रेंड भी बदलता रहता है। आज हिमाचली  युवा किस तरह खुद को ड्रेसअप कर रहा है, दखल के जरिए बता रहे हैं…भावना शर्मा, प्रतिमा चौहान व राकेश कथूरिया…

पूरे देश भर में जहां फैशन ने अपना जलवा बिखेर रखा है तो वहीं प्रदेश के युवा वर्ग भी फैशन में किसी से कम नहीं हैं। हिमाचल में जहां लोकल ड्रेस पूरे बाजारों में अपने जलवे से युवाओं को अपनी ओर खींच रही है, तो वहीं विदेशी ड्रेस ने भी हिमाचल के बाजारों को अलग-अलग डिजाइन की ड्रेस से लदालद कर दिया है। युवाओं की बात करें तो युवा घरों से निकलने से पहले अपने पहनावे को बेस्ट बनाते हैं। स्कूल वर्दी हो चाहे किसी कालेज आफिस की ड्रेस इन सभी पहलुओं पर युवा वर्ग सबसे पहले ध्यान देता है। हर कोई आज दूसरों से  स्मार्ट दिखना चाहता है। यही वजह है कि ड्रेस को पसंदीदा टेलर से और डिजाइन करवाया जाता है। हैरानी की बात है कि युवा वर्ग पहनावे को लेकर इतना गंभीर हो चुका है कि सबसे पहले दूसरों से अच्छा दिखने के लिए महंगी से महंगी डिजाइनर ड्रेस पहनते हैं। लाल, हरा, नीला, नेवी ब्लू, डार्क रेड कलर और सफेद व काले रंग की ड्रेस  के साथ मैचिंग सूट का भी ज्यादा ट्रेंड चला हुआ है।

प्लाजो-शरारा की मुरीद युवतियां

अलग-अलग कपड़ों में अपना लुक चेंज करने की उत्सुकता युवतियों व महिलाओं में ज्यादा रहती है। हिमाचल में युवतियों को जो फैशन अपनी ओर ज्यादा आकर्षित कर रहा है, उनमें प्लाजो और शरारा मुख्य है। इसके साथ ही प्रदेश में युवतियां पेंट प्लाजो और शॉर्ट व लॉन्ग टॉप की खरीद भी ज्यादा कर रहे हैं। बता दें कि राजधानी शिमला सहित प्रदेश के सभी बाजारों में तरह-तरह के पेंट प्लाजो, शरारा, कुर्ती, पायजामी, सलवार, सिल्क, फेब्रिक और कॉटन फेलेरिक में भिन्न-भिन्न गाउन भी बाजारों में आए। बाजारों में आने वाली इन आकर्षित ड्रेसिस को देखते ही युवतियां उन्हें खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

बैग से लेकर जूतों तक का स्टाइल

हिमाचल के युवा अच्छा दिखने के लिए ड्रेस से लेकर जूते और बैग तक का विशेष ध्यान रखते हैं। युवतियां जहां अच्छे लुक में दिखने के लिए डिजाइनदार ड्रेस पहनती है तो वहीं साथ ही मैचिंग के साथ हैंडी बैग और बन साइडिड पर्स, इसके साथ ही ड्रेस के साथ मैच करती बैली और चप्पल का भी विशेष ध्यान रखते हैं। हैरानी की बात यह है कि हिमाचल के युवा फैशन को लेकर इतने आगे बढ़ चुके हैं कि दस साल के बाद हर कोई युवक-युवतियां अच्छा दिखने के लिए बाजारों व शॉपिंग मॉल में अपने फिगर पर अच्छी लगने वाली डिजाइनिंग ड्रेस को ढूंढने लगते हैं। बता दें कि युवाओं का ड्रेसअप भी बदलते दौर के साथ काफी हाईटेक और विदेशी फैशन में बदल रहा है। युवक अपने मोटापे को छिपाने और लंबी हाइट को दिखाने के लिए उसी के मुताबिक जींस बनवाते हैं। हालांकि ज्यादातर रेडीमेड पेंट और शर्ट ही खरीदते हैं, लेकिन कई बार ढीले कपड़ों के शौकीन युवा डिजाइनरों से ही अपनी जींस बनवाते हैं। हिमाचल में कालेज जाने वाले युवक सबसे अलग लुक में दिखने के लिए टाइट जींस पैंट, शर्ट और इनर पहनते हैं साथ ही कालेज वर्ग के युवा क्लरड जूतों को भी काफी खरीदते हैं।

युवाओं के पसंदीदा ब्रांड

हिमाचल के युवा वर्ग यूं तो हर ब्रांड के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। फैशन का जुनून इस कद्र युवाओं में है कि वे अच्छी ब्रांड को छोड़कर केवल देखने में अच्छी लगने वाली ड्रैस को अपने पहनावे में शामिल कर रहे हैं। हालांकि हिमाचल में आजकल युवा लीवाइस, एडिडाज, प्यूमा, ओक्टेव, मोंटेकार्ले, वुडलैंड, रेडचीफ ब्रांड का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा युवाओं का के्रज अच्छे से अच्छे शोरूम की ओर ज्यादा आकर्षित होता है।

सिनेमा ने बदला ट्रेंड

टीवी सीरियल या सिनेमा में कोई भी नया फैशन आया नहीं कि युवाओं को इसे अपनाने में देर नहीं लगती। शहर हो या गांव हर जगह युवा वर्ग फैशन को लेकर देशी-विदेशी चाल चल रहा है। कपड़ों को भी एक फ्यूजन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे कि लांग कुर्ती के साथ डेमिन जीन्स और सूट के साथ स्कर्ट या पेंट प्लाजो।

जीन्स पर हर कोई लट्टू

आज युवाओं के फैशन में लड़के हो या लड़कियां जीन्स की सबसे ज्यादा मांग है। इस मांग को देखते हुए बाजारों में अलग-अलग डिजाइन और अलग पैटर्न की जीन्स की भरमार है। फटी-कटी जीन्स इन दिनों युवक-युवतियों के फैशन में शामिल है। जितनी ज्यादा फटी जीन्स उतनी ही ऊंची  कीमत। फैशन को लेकर केवल अपने कपड़ों पर ही केंद्रित नहीं है बल्कि कपड़ों के साथ आभूषण मैचिंग पर्स, जूते, बालों में लगाने के हेयर बैंड, चश्मा, इन सभी पर ध्यान दे रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बदलते फैशन का कालेज और स्कूल जाने वाले युवा वर्ग में है। जो फैशन के आगे अपनी पारंपरिक वेशभूषा को भुला चुके हैं।

आरामदायक ड्रेस ही बेस्ट

आईजीएमसी के न्यूरो सर्जरी स्पेशलिस्ट डा. जनक राज  ने कहा कि ड्रेसअप होना मुझे बड़ा अच्छा लगता है। अच्छी डे्रस पहनना और फेशन की दुनिया के साथ चलना अच्छा लगता है, लेकिन अपने डाक्टर करियर के बीच साथ ही मरीजों की सेवा में आज तक मुझे फैशन करने के लिए समय नहीं मिला। पहनावे के मामले में मैं ऐसी डे्रस पहनना चाहता हूं, जो कि आरामदायक है। फार्मल और कैजुअल ड्रेस में से दोनों को ही एक जैसा मानता हूं। ड्यूटी समय में डाक्टर की वर्दी और ऑफ ड्यूटी फार्मल ड्रेस बेस्ट लगती है। फैशन की ओर कभी ध्यान नहीं दिया। इसलिए फैशन के लिए स्पेशल वक्त नहीं निकाला। कभी ऐसा नहीं लगा कि डाक्टर  की ड्रेस पहनने की वजह से मैं कभी फैशन नहीं कर पाया क्योंकि एक डाक्टर के लिए वर्दी पहनना सम्मान की बात होती है।

जो सबको भाए, वही अच्छा

नर्स शिल्पा ठाकुर ने कहा कि फैशन करना अच्छा लगता है, लेकिन मैं वही फैशन करती हूं, जिसका  समाज पर भी बुरा प्रभाव न पड़े। मैं फैशन से अधिक स्किल पावर पर ज्यादा विश्वास करती हूं। नर्स हूं, इसलिए सबसे पहले मरीजों की देखभाल करना मेरा फर्ज है। अस्पताल में सिंपल व सोबर बनना जरूरी होता है। इसके साथ ही बालों को भी कस कर रखना पड़ता है। फैशन करने का मौका पार्टी या फिर शादी या किसी अन्य कार्यक्रम में ही मिलता है, लेकिन अपनी ड्रेस की वजह से मैं कभी फैशन नहीं कर पाई इसका कभी मुझे मलाल नहीं रहा।

सही ड्रेसअप होना बेहद जरूरी

कालेज छात्र मुनीष का कहना है कि ड्रेसअप उन्हें अच्छा लगता है और खुद को लोगों के बीच प्रेजेंट करने के लिए सही ड्रेसअप बेहद जरूरी है। ड्रेसअप फैशन के अनुरूप ही होना चाहिए, लेकिन उसका स्वदेशी होना भी जरूरी है। फार्मल वेयर तो ऑफिस और किसी इंटरव्यू के लिए बेहतर ऑप्शन है, लेकिन कालेज जाने के लिए  कैजुअल को ही प्राथमिकता देता हूं।

अच्छी ड्रेस से अलग पहचान

लॉ छात्रा अनिता  का मानना है कि ड्रेसअप सही तरीके से होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में इनसान को उसके ड्रेसअप से ही पहचाना जाता है तो ऐसे में यह जरूरी है कि ड्रेसअप आज के दौर में फैशन के हिसाब से हो। हफ्ते में पांच दिन तो वह अपनी लॉ के लिए तय वर्दी ही पहनती है। ऐसे में दो दिन का जो समय फार्मल के लिए मिलता है उसमें वह अपनी पसंद के कपड़े पहनती हैं।

बढ़ता है आत्मविश्वास

युवा डिंपल का कहना है कि ड्रेसअप होना आज के समय में सभी को अच्छा लगता है। अच्छा ड्रेसअप आप में आत्मविश्वास पैदा करता है।  ड्रेसअप और उसमें फैशन दोनों ही अहम हैं। फैशन ट्रेंड के अनुसार ड्रेस पहनना जरूरी है, लेकिन उसे पूरी तरह से अपनाया जाए। फैशन उतना ही सही है जितने में आप सहज महसूस करें। वहीं अगर हम आफिस जा रहे हैं या काउंसिलिंग या फिर किसी साक्षात्कार के लिए जा रहे हैं तो फार्मल ड्रेस पहनना जरूरी है । एक ही वर्दी पहनकर भी इनसान ऊब जाता है।

स्थिति के अनुसार ही पहनावा

मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव राजेश का कहना है कि जब भी उन्हें अपनी वर्दी से छुट्टी मिलती है तो ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनकर ड्रेसअप होना अच्छा लगता है। इस समय में तो फैशन ट्रेंड के हिसाब से कपड़े पहनते हैं। ऑफिस में हफ्ते की सात दिन फार्मल ही पहनते हैं। ऐसे में जब कहीं बाहर आउटिंग या दोस्तों के साथ जाते हैं तो कैजुअल ड्रेस को प्राथमिकता देते हैं। वर्दी से एक दिन की छुट्टी में ही फैशन का मौका मिलता है। फैशन में क्या नया ट्रेंड चल रहा है उसे जानें और पहनें।

निफ्ड-निफ्ट के प्रयास

प्रदेश में फैशन संस्थानों में कोई भी सरकारी संस्थान शामिल नहीं है। सभी संस्थान निजी स्तर पर ही चल रहे हैं, जिसमें सबसे प्रमुख संस्थान आईएनआईएफडी हमीरपुर है। एपी गोयल शिमला यूनिवर्सिटी के साथ ही एआईएम हमीरपुर,आईईसी बद्दी, निफ्ट कांगड़ा शामिल हैं। ये सभी संस्थान फैशन से जुड़े कोर्स करवाने के साथ ही रिसर्च वर्क भी फैशन पर कर रहे हैं । आईएनआईएफडी हमीरपुर में फैशन पर  हाल ही के शोध में पाया है कि यूथ ट्रेडिशनल यानी पारंपरिक साडि़यों से इंस्पायर है और उसे अपने नए स्टाइल से पहन रहा है । कपड़ों को लेकर एक्सपेरिमेंट यूथ अधिकतर कर रहा है ।  संस्थान में फैशन डिजाइनिंग से जुड़ी शिक्षिका सीमा भारद्वाज का कहना है कि देश के फैशन और हिमाचली फैशन में अभी भी संतुलन बचा है । हिमाचली पारंपरिक परिधान रेस्टा अब वेस्टर्न लुक में लांग स्कर्ट और टॉप के साथ आ रहा है, जबकि धाटू की जगह अलग-अलग तरह की टोपियों ने ले ली है। आजकल जो बॉलीवुड-हॉलीवुड का है स्टाइल है, यूथ का भी कपड़ो में वही स्टाइल बन कर रहा गया है । वहीं पी गोयल शिमला विश्वविद्यालय के शोध में सामने आया है कि 7 से 65 छात्र ऐसे हैं, जो कि ड्रेस कोड न पहनकर कैजुअल कपड़े पहनना पसंद करते हैं। वहीं जींस भी वेस्टर्न नहीं रह गई है।  वन पीस ड्रेस,गाउन पहनना और मैक्सी ड्रेस पहनना लड़कियां ज्यादा पसंद कर रही है। यूथ ज्यादातर बालीवुड ट्रेंड को कापी कर रहा है ।  इसके नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान निफ्ट  कांगड़ा ड्रेसअप पर लगातार शोध कर रहा है । संस्थान के संयुक्त निदेशक दिनेश रांगड़ा कहते हैं कि इस संस्थान के प्रशिक्षु हर साल जून  में दो माह के लिए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वहां के आर्ट क्राफ्ट पर ज्ञान अर्जित करते हैं इसके लिए वे फोटोशूट के साथ-साथ लोगों से भी मिलते हैं और उसे एक दस्तावेज बनाते हैं।  वह कहते हैं कि  पूरे देश में जो चल रहा है, फैशन के लिहाज से हिमाचल  भी उसी को ही फालो कर रहा है।

पारंपरिक परिधानों से किनारा कर रहे युवा

हिमाचल ऐसा राज्य है, जिसके हर जिला की पहचान वहां की संस्कृति और पहनावे से है। लेकिन आज के दौर में ये पारंपरिक परिधान मात्र कुछ एक जनजाति क्षेत्रों में ही देखने को मिल रहे हैं। वहां भी पुराने बुजुर्ग ही इस परंपरा को कायम रख रहे हैं। युवा पीढ़ी तो बदलते सांस्कृतिक परिवेश में पारंपरिक परिधानों को लेकर अपनी मानसिकता बदल रही है।

आज के इस दौर में टेक्नोलॉजी इतनी जल्दी नहीं बदल रही है, जितना कि फैशन ट्रेंड। युवा वर्ग अपने ड्रेसअप को लेकर खासा जागरूक हो गया है। महानगरों की तर्ज पर अब पहाड़ों में भी युवा वर्ग अपने पारंपरिक पहनावे को छोड़कर पाश्चात्य पहनावे को खासी तरजीह दे रहा है। युवा की पसंद न पसंद में खासा बदलाव आया है। लड़के जहां जीन्स, टी-शर्ट को अपने ड्रेसअप में शामिल कर रहे हैं, तो वहीं लड़कियां सलवार-कमीज को छोड़कर टॉप और जीन्स की दीवानी हो रही हैं। प्रदेश के बड़े शहरों को छोड़ फैशन का यह आलम अब छोटे-बड़े गांवों में भी आम हो गया है। खास बात यह है कि प्रदेश में युवाओं को कालेज में ही अपने पसंद के कपड़े चुनने का अवसर मिलता है, ऐसे में युवा पारंपरिक वस्त्र न पहन कर पाश्चात्य कपड़ों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।

दूसरी खास बात यह है कि आज के आधुनिक दौर में व्यक्ति का स्टेस्टस सिंबल उसके परिधानों को देख कर आंका जाता है। ऐसे में युवा वर्ग और अन्य लोग भी अब अपने पहनावे को लेकर सचेत हो गए हैं। पहले जहां मर्द कुर्ता-पायजामा और औरतों को सलवार-कमीज, घाघरा-चोली में सुहाती थी तो आज उनकी जगह मर्दों ने पेंट-शर्ट और औरतों ने जीन्स टॉप को चुन लिया है।  बदलते दौर का आयाम यह है कि आज की युवा पीढ़ी फैशन के आगे क्या पहना जा सकता है और क्या नही इसको भी ध्यान में नहीं रख रही है। बस मकसद है तो एक ही कि उन्हें पाश्चात्य संस्कृति की दौड़ में किसी भी तरह से पिछड़ना नहीं है। लोग पहले जहां अपने प्रोफेशन के हिसाब से पौशाक धारण किया करते थे और इस बात पर भी ध्यान दिया करते थे कि उनकी पौशाक उनके प्रोफेशन के अनुरूप हो,उनके लिए वही फैशन था। लेकिन आज के दौर में फैशन को लेकर युवाओं की परिभाषा बदल गई है।

फैशन डिजाइनिंग में करियर के बढ़े चांस

हिमाचल में युवा फैशन की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। युवाओं का फैशन के प्रति के्रज इतना बढ़ गया है कि युवा वर्ग वेस्टर्न ड्रेस को ज्यादा पहन रहे हैं, जिससे कि फैशन डिजाइनिंग में करियर बनाने वाले युवाओं के भी स्कोप बढ़ गए हैं। आज के युवा फैशन के मामले में बाजारों व शॉपिंग मॉल में नई-नई ड्रेसेज देखना व पहनना चाहते हैं। यही वजह है कि हिमाचल में जिस कद्र फैशन ने युवाओं को आकर्षित किया है,उससे फिलहाल फैशन डिजाइनिंग करना चाह रहे युवाओं के करियर को चार पंख लग चुके हैं। हिमाचल में फैशन की दौड़ में युवा यहां तक आ गए हैं कि वे प्रदेश के पुराने फैशन को भी नए तरीके से अपना रहे हैं।

साड़ी भी नए लुक में

साड़ी जिसका क्रेज पूरी तरह से खत्म हो चुका था, लेकिन आज युवा साड़ी का प्रयोग भी नए ढंग से कर रहे हैं, जिसमें साड़ी के ब्लाउज में विभिन्न तरह के डिजाइन डालकर पहने जा रहे हैं। वहीं ऊपरी हिमाचल में पहने जाने वाली रेस्टा ड्रेस भी युवतियों को अब काफी भाने लगी है। कुल मिलाकर हिमाचल में युवा फैशन की दिशा में इतने आगे बढ़ने लगे है कि वे बाजारों में नई-नई ड्रेस देख रहे हैं उसे किसी भी हालत में खरीद रहे हैं। भले ही चाहे वह कितनी भी महंगी क्यों न हो।

फैशन में रमे गांव

हिमाचल प्रदेश में युवाओं में इस कद्र फैशन अपना जलवा बिखेर रहा है कि इसका असर हर गांव में भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवक व युवतियां भी अच्छा दिखने के लिए नए  फैशन से अछूते हैं। फैशन का यह के्रज आज के इस ऑनलाइन समय में भी संभव हो पाया है। युवक-युवतियां, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट   के माध्यम से घर बैठे नए फैशन की ड्रेस मंगवाते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के इस के्रज की वजह से ही गांव-गांव तक फैशन की दौड़ चल रही है।  विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत युवक और युवतियां फैशन की नई दौड़ में शामिल है तो वहीं 40 प्रतिशत युवा वर्ग ऐसा भी हैं, जो फैशन की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।

बेस्ट दिखने का के्रज

दूसरों से अच्छा दिखने का के्रज इस कद्र युवाओं में बढ़ गया है कि दूसरे काम छोड़ सबसे पहले वे अपने पहनावे को ही समय देते हैं। युवाओं का पहनावे की ओर ध्यान होना लाजिमी भी है क्योंकि आज समाज में हर व्यक्ति की पहचान ही उनके कपड़ों से ही की जाती है। आज समय आ गया है कि हर नागरिक की पहचान उसकी पर्सनेलिटी व कपड़ों से ही की जाने लगी है।

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