मार्शल आर्ट की गोल्डन गर्ल अनीता

Aug 5th, 2018 12:12 am

जब हम ठान लें कि नहीं कुछ अलग करके दिखाना है तो हमें कोई नहीं रोक सकता । बस अपना लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए ऐसा ही कुछ कर दिखाया है नूरपुर हलके के गांव कुखेड़ की अनिता ने। दिल्ली में आयोजित मिक्स मार्शल आर्ट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत अनीता ने अपना, अपने क्षेत्र व प्रदेश का नाम ऊंचा किया है। उन्होंने इस प्रतियोगिता में दिल्ली की प्रतियोगी सिंड्रा को हरा कर गोल्ड मेडल जीता।  इस छात्रा की स्कूल, गांव में हर जगह तारीफ हो रही है। 25 जुलाई, 1999 को जन्मी अनिता राजकीय आर्य कालेज नूरपुर में बीए द्वितीय वर्ष  की छात्रा हैं। अनिता के दो भाई हैं, अनिता सबसे छोटी है और शुरू से ही कुछ अलग करने की सोच मन में थी। अनिता किक बॉक्सिंग व रेस्लिंग की भी बेहतर खिलाड़ी हैं और वह गत वर्ष राज्य स्तरीय जूडो प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुकी हैं। उसका अगला लक्ष्य वर्ल्ड मिक्स मार्शल आर्ट में भाग लेकर जीत हासिल करना है । अनिता ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने कोच अमित राणा को दिया है और इस चैंपियनशिप की तैयारी के लिए कालेज प्रशासन व नूरपुर स्पोर्ट्स क्लब  का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।  अनिता ने बताया कि  इस मिक्स मार्शल आर्ट प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने की खुशी है और वह भविष्य में और आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि इस खेल के लिए यहां पूरा सामान उपलब्ध नहीं है जो कि होना चाहिए ताकि इस खेल ने खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इस बारे उनके कोच अमित राणा ने बताया कि अनिता मिक्स मार्शल आर्ट की एक बेहतर खिलाड़ी हैं और वह इस खेल को बड़ी लगन से खेलती हैं और इसका अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है। हमें पूरा विश्वास है कि वह अपना यह सपना पूरा करेंगी।

 – बलजीत चंबियाल, नूरपुर

मुलाकात

मुझे पुरुषों से आगे बढ़ने का नहीं बल्कि समाज की सोच बदलने में मजा आता है…

यह गोल्ड मेडल आपके लक्ष्यों को कितना आगे बढ़ा रहा है?

यह गोल्ड मेडल नहीं एक बेटी के संघर्ष की पहचान है कि मौका मिलने पर बेटियां कुछ भी कर सकती हैं।

जीवन में आपने आज तक लक्ष्य कैसे चुने तथा उनके निर्धारण की तैयारी कैसे हुई?

मैंने जो भी लक्ष्य चुना आज तक उसको हासिल करने के लिए पूरी मेहनत की और परिवार का पूरा सहयोग रहा।

कब महसूस किया कि अनीता इस संसार में अलग करने के लिए पैदा हुई है?

आम जिंदगी तो हर कोई जीता है मेरा मानना है, अगर जिंदगी में आए हो तो कुछ ऐसा करके जाओ जो किसी ने पहले नहीं किया हो।

आपके लिए संघर्ष और मेहनत के बीच फर्क क्या और खुद पर कैसे भरोसा बढ़ता है। आत्मविश्वास की वजह?

मेरा संघर्ष समाज की सोच के साथ था, जो कि बेटी कुछ भी नहीं कर सकती ऐसी धारणा पाले हुए था, मैंने अपनी मेहनत के बल पर लोगों की सोच को बदला।

मिक्स मार्शल आर्ट के जरिए आप कितना बदल गईं। ऐसे खेल ने आपके व्यक्तित्व और सपनों को कैसे बदला, जो केवल किसी स्पोर्ट्स पर्सन को हासिल होता या किसी  मुकाबले के दौरान केवल खिलाड़ी महसूस करता है?

मेरा घर मुख्य सड़क से बहुत दूर है बीच में जंगल भी पड़ता है, तो आने-जाने में डर लगता था। मिक्स मार्शल आर्ट के कारण इतनी हिम्मत अंदर है कि किसी से भी डर नहीं लगता। मेरा खेल ही मेरी पहचान है और मेरा सपना है कि मैं इस खतरनाक खेल की वर्ल्ड चैंपियन बनूं और हिमाचल की तरफ  से यह खेल खेलने वाली इकलौती खिलाड़ी हूं।

मार्शल आर्ट में आपका आदर्श खिलाड़ी कौन और क्यों?

मैरी कॉम को मैं अपना आदर्श मानती हूं। उन्होंने मुक्केबाजी को इतना प्यार किया कि शादी के बाद भी यह खेल खेला और वर्ल्ड चैंपियन बनीं।

क्या इस विषय पर फिल्मों ने भी आकर्षण पैदा किया या आपको पुरुषों से आगे बढ़ने में मजा आता है?

हां इस खेल पर बनी फिल्मों ने भी मुझे प्रभावित किया ‘सुल्तान, ब्रदर और दंगल’ से मैं प्रभावित हुई। मुझे पुरुषों से आगे बढ़ने का नहीं बल्कि समाज की सोच बदलने का मजा आता है, पर इसके लिए बहुत लंबी लड़ाई और मेहनत करनी पड़ती है।

क्या मार्शल आर्ट में पारंगत होने के बाद आपके प्रति समाज का दृष्टिकोण बदला। कोई भी सहपाठी आपके नजदीक पटकने से पहले सौ बार  सोचता होगा या कभी ऐसा अवसर आया कि आपने किसी सिरफिरे को बता दिया कि ‘नारी शक्ति’ क्या होती है?

आज मुझे समाज में सम्मानित नजरों के साथ देखा जाता है कि इस लड़की ने अपनी मेहनत से इतिहास बदला है। स्कूल टाइम में भी एक बार एक लड़के ने मेरे साथ बदतमीजी की थी तो मैंने उसे थप्पड़ मार दिया था। सरेआम कालेज में भी एक घटना हुई थी एक लड़का बाइक पर तेज गति के साथ जा रहा था और उसने कीचड़ वाला पानी हम पर फेंक दिया, तो मैंने उसे चलती बाइक से ही पकड़ लिया और खूब लताड़ लगाई।

आपका खुशी मनाने का तरीका क्या है या जब खेलती नहीं, तो अपनी ऊर्जा को किस दिशा में लगाती हैं?

मैं एक लड़की नहीं एक सोच हूं जो लोगों की नजरों में एक आदर्श बनकर खुद को साबित कर रही हूं। मेरा खुशी मनाने का तरीका परिवार के साथ बैठकर बातें करना और पंजाबी गाने सुनना है। मुझे अपनी मंजिल पानी है इसी दिशा में अपनी सारी मेहनत और ऊर्जा लगाती हूं।

एक बड़ा सपना, जो हर दिन देखती हैं या कोई बड़ा सवाल जो आपसे बार-बार पूछा जाता है?

मुझे वर्ल्ड चैंपियन बनना है और एक सवाल हर किसी ने मुझसे पूछा है कि तुम इतनी धाक्कड़ कैसे हो।

पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने का कोई आसान तरीका?

खेल के वक्त खेल और पढ़ाई के वक्त पढ़ाई एक सच्ची बात बताती हूं, मैं पढ़ने में नालायक हूं पर खेलने में किसी भी लड़के को हरा सकती हूं।

लड़कियों के लिए खेलों के जरिए कितना करियर देखती हैं। हिमाचली बेटियों को क्या कहना चाहेंगी?

आज खेलों में ही सबसे ज्यादा करियर है, बस अपनी फिटनेस और मेहनत पर गौर करने की बात होती है। एक खिलाड़ी शरीर से भी स्वस्थ रहता है,  मन से भी और रही बात हिमाचल की बेटियों की तो यही कहना चाहूंगी कि हिमाचल की बेटी कुछ भी कर सकती है। हिमाचल वीरभूमि है बस मौका मिलने की देर होती है। सुविधाएं बेशक कम हों बेटियों की हिम्मत कोई भी इतिहास बदल सकती है।

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