क्षमता से कितना बाहर डलहौज़ी

धौलाधार व पीर पंजाल पर्वत शृंखला के मध्य पांच पहाडि़यों पर बसे पर्यटन स्थल डलहौजी की खूबसूरती को आधुनिकता की अंधी दौड़ ने ग्रहण लगाकर रख दिया है। हरे-भरे देवदार के पेड़ों से अटे डलहौजी शहर में होटल व भवनों की भरमार के चलते अब सुकून के दो पल बिताने के लिए जगह तलाशनी पड़ रही है। विख्यात पयर्टक स्थल की हालतको दखल के जरिए उजागर कर रहे हैं,  दीपक शर्मा…

हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल डलहौजी में बेतरतीब भवन निर्माण ने इसकी खूबसूरती ही बिगाड़ दी है। हरे-भरे देवदारों से घिरा शहर अब धीरे-धीरे कंकरीट का जंगल बनता जा रहा है। शहर में वाहनों की बढ़ती तादाद के चलते पार्किंग स्थलों की कमी से बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को मुश्किलें अलग से उठानी पड़ रही हैं। हालात यह हैं कि पर्यटन सीजन के दौरान सड़क किनारों को पार्किंग स्थल के तौर पर चिन्हित कर व्यवस्था का संचालन करना पड़ता है। मगर पर्यटकों की उमड़ने वाली भीड़ के आगे यह व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है। 1854 में बसे डलहौजी शहर का नाम वायसराय लार्ड डलहौजी के नाम से पड़ा था। समुद्र तल से 2036 मीटर की ऊंचाई और 13 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले शहर की आबादी 7200 के करीब है।

डलहौजी शहर में 15 अप्रैल से 15 जुलाई के पर्यटन सीजन के दौरान हजारों की तादाद में देशी व विदेशी पर्यटक हसीन वादियों को निहारने के लिए पहुंचते हैं। मगर डलहौजी की संकरी सड़कों और पार्किग स्थलों की कमी के चलते पर्यटकों को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। पर्यटन सीजन में पर्यटकों को जहां लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ता है, वहीं  पार्किंग को लेकर भी इधर-उधर भी भटकना पड़ता है।

भीड़ के आगे छोटी पड़ने लगी सड़कें

डलहौजी शहर के बस अड्डे से डैन कुंड तक ग्रेफ  के अधीन पड़ने वाले मार्ग की बिगड़ी हालत के चलते वाहनों के हिचकोले खाने से पर्यटकों को काफी मुश्किलें पेश आ रही हैं। हालांकि शहर के अंदरुनी हिस्सों की सड़कों की हालत बेहतर होने से पैदल आवाजाही काफी सुगम बन जाती है। मगर लोगों व वाहनों की बढ़ती भीड़ के चलते अब शहर के अंदरुनी हिस्सों की सड़कों में कई जगह चौड़ाई कार्य की जरूरत महसूस की जाने लगी है।

स्थापना    1854

क्षेत्रफल  13 वर्ग किमी

आबादी   7200 

निकटतम हवाई अड्डा : गगल

रेलवे स्टेशन :  पठानकोट

होटल एसोसिएशन के साथ प्रशासन पहल को तैयार

डलहौजी को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए  होटल एसोसिएशन ने प्रशासन व नगर परिषद के साथ कदमताल आरंभ की है। इसके लिए एसडीएम डलहौजी की अगवाई में एक फ्रंट का गठन किया गया है, जो कि शहर के सौंदर्यकरण को लेकर काम करेगा। इसके लिए बाकायदा होटल एसोसिएशन आर्थिक सहयोग भी करेगी। माउंट व्यू होटल के संचालक मनोज चड्ढा ने बताया कि अब डलहौजी का मौलिक स्वरूप बरकरार रखने के लिए हर किसी को आगे आना होगा। होटल एसोसिएशन डलहौजी ने और भी कई पहल की हैं। इसके तहत जनसहभागिता के जरिए डलहौजी शहर का सौंदर्यकरण करने के अलावा स्वच्छ व सुंदर बनाया जाएगा। मनोज चड्ढा ने बताया कि ऐसे में हरेक शहरवासी का फर्ज बनता है कि वह स्वयं आगे आकर फ्रंट की इस मुहिम का हिस्सा बने। उन्होंने बताया कि डलहौजी में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी होटल एसोसिएशन लोगों को जागरूक करेगी।

सुकून के दो पल बिताने को जगह नहीं

डलहौजी में होटल व भवनों के निर्माण के चलते शहर में अब चुनिंदा ऐसे ओपन स्पेस बचे हैं, जहां पर्यटक व आम आदमी आराम से बैठकर सुकून के दो पल बिता सके। मौजूदा समय में डलहौजी के खुशगवार मौसम में घूमने व बैठने के लिए गांधी चौक व सुभाष चौक ही दो ऐसी जगह है,जहां हर कोई चहलकदमी के साथ बैठकर सुकून हासिल कर सकता है। इसके अलावा शहर में ऐसा कोई ओपन स्पेस नहीं है,जहां आदमी खुले में बैठ कर आराम कर सके। ऐसे में अब डलहौजी की हसीन वादियों को ग्रहण सा लग गया है। डलहौजी के स्थानीय लोगों की मानें तो पैसा कमाने की होड़ में पर्यटन नगरी कंकरीट के जंगल में तबदील होती जा रही है। शहर में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के बीच मूलभूत सुविधाओं के सुधार में कोई खास फर्क  देखने को नहीं मिल रहा है। डलहौजी में अभी तक सीवरेज सुविधा का अभाव है। कूड़ा संयंत्र न होने से कथलग में डंपिंग साइट पर खुले में गंदगी को खपाया जा रहा है।

पैराग्लाइडिंग का रोमांच जल्द, साइट फाइनल

डलहौजी में जल्द पर्यटकों को पैराग्लाइडिंग के रोमांचक सफर की सुविधा मिलेगी। इसके लिए गोली-मंधियार में साइट का चयन करके दस्तावेजों को अप-टू-डेट किया जा रहा है। चिन्हित जगह के निरीक्षण के लिए तकनीकी टीम को भी बुलाया गया है। डलहौजी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पार्किंग स्थल के निर्माण की प्रोपोजल भी भेजी गई है। शहर के सौंदर्यकरण कार्य के तहत गर्म सड़क पर अनारकली रेलिंग भी लगाई जाएगी। शहर के सौंदर्यकरण का कार्य डिमांड के अनुसार करवाया जा रहा है

 राम प्रसाद, जिला पर्यटन विकास अधिकारी

रोप-वे के साथ बाइपास की जरुरत

डलहौजी शहर में ट्रैफिक बोझ के चलते बाइपास का निर्माण समय की जरूरत  है।  पर्यटकों को साहसिक व रोमांचकारी गतिविधियों के लिए रोप-वे का निर्माण भी होना चाहिए। शहर में ट्रैफिक समस्या के स्थायी हल हेतु गांधी चौक में तीन सौ वाहनों के लिए बहुमंजिला पार्किग स्थल के निर्माण की प्रोपोजल भी भेजी गई है। गे्रफ  के अधीन पड़ने वाली सड़क में सुधार होना भी आवश्यक है। इसके अलावा मौजूदा पर्यटन स्थलों को नई लुक देने की भी आवश्यकता है

मनोज चड्ढा, अध्यक्ष, नगर परिषद डलहौजी

सार्वजनिक शौचालय की दरकार

शहर में सबसे बड़ी समस्या सार्वजनिक शौचालयों की कमी है। इसके अलावा शहर का सौंदर्यकरण भी समय की जरूरत है। इसके लिए डीपीएस स्कूल प्रबंधन की तर्ज पर फूलों के पौधे लगाने की पहल होटलियर को करनी होगी। शहर के कुछेक हिस्से में सड़कों का विस्तारीकरण किया जाना चाहिए। शहर की चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पार्किंग स्थलों का निर्माण भी आवश्यक है

अशोक महाजन, एयर कोमोडोर (रि.)

गाद निगल गई खजियार की खूबसूरती

मिनी स्विट्रजलैंड के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजियार में भी पर्यटन विकास को लेकर योजनाएं सिरे पर नहीं चढ़ पाई है। खजियार में सुविधाओं की कमी के चलते पर्यटकों के कदम यहां नहीं ठहर पा रहे हैं। पर्यटन सीजन के दौरान खजियार पहुंचने वाले पर्यटक सुविधाओं के अभाव के चलते देवदार के हरे पेड़ों की छांव में दो पल सुकून के बिताने के बाद वापस डलहौजी का रुख कर लेते हैं। खजियार में मैदान के बीचोंबीच स्थित झील  गाद की मात्रा बढ़ने से बुरी तरह सिकुड़ कर रह गई है। झील के मौलिक स्वरूप को लौटाने को लेकर योजनाएं व घोषणाएं ही हो पाई हैं। इसके अलावा खजियार में समिति आवासीय सुविधा के चलते भी पर्यटक यहां ठहरना पसंद नहीं करते। खजियार में पर्यटन निगम के होटल के अलावा पंद्रह-बीस होटलों में ही आवासीय सुविधा उपलब्ध है।

वन्य प्राणी विभाग करेगा शृंगार

खजियार की झील में भी गाद की भरमार होने से यह सिकुड़ने लगी है। गाद न निकालने से यह झील दलदल में तबदील होती जा रही है। झील से गाद निकालकर इसका जीर्णोद्धार कार्य करने को लेकर पूर्व में किए गए तमाम कार्यों का नतीजा ढांक के तीन पात वाला रहा है। अब वन्य प्राणी विभाग झील से गाद निकालकर इसकी खूबसूरती को लौटाने के लिए नए सिरे से काम करने जा रहा है। हालांकि इस पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च होगी। बहरहाल, खजियार झील से गाद निकालकर सौंदर्यकरण कार्य को लेकर कोई प्रभावी कदम न उठाए जाने से इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा खजियार में पर्यटन विकास को लेकर भी सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं, जिस कारण खजियार पर्यटन स्थल से अधिक अब पिकनिक स्पॉट बनकर रह गया है।

ट्रैफिक मैनेजमेंट बड़ा चैलेंज

डलहौजी शहर में पार्किंग स्थलों की कमी के चलते ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर रखना पुलिस व प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। शहर में बहुमंजिला पार्किग स्थलों के निर्माण को लेकर चल रही कवायद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है।

250 वाहनों को पार्किंग सुविधा

डलहौजी शहर में वर्तमान में चिन्हित पांच- छह पार्किंग स्थलों पर 250 के करीब वाहनों को पार्क करने की सुविधा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर्यटन सीजन में उमड़ने वाले पर्यटकों की भीड़ के दौरान व्यवस्था का संचालन किस कद्र होता होगा। डलहौजी शहर स्थित पर्यटक स्थलों को निखारने और पर्यटकों के लिए और बेहतर सुविधाओं को लेकर योजनाएं भी फाइलों में सिमट कर रह गई हैं।

शहर में 100 होटल-रेस्ट हाउस नाकाफी

डलहौजी शहर में सौ के करीब होटल व रेस्ट हाउस पंजीकृत हैं। साल-दर-साल  इस शहर में बढ़ रही पर्यटकों की तादाद के आगे ये अब कम पड़ने लगे हैं। पर्यटन सीजन में पर्यटकों को रात्रि आवासीय सुविधा पाने के लिए बनीखेत से लेकर बाथरी तक रोड़ साइड पर बने होटलों में पहुंचना पड़ता है।

सात हजार अबादी , उस पर  चार लाख सैलानी 

करीब सात हजार की आबादी वाले डलहौजी शहर में पर्यटन सीजन के दौरान उमड़ने वाली भीड़ से व्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाती है। एक अनुमान के अनुसार पर्यटन सीजन के दौरान तीन से चार लाख पर्यटक डलहौजी की हसीन वादियों को निहारने पहुंचते हैं। पर्यटन सीजन में अमूनन एक सप्ताह में पचास हजार के करीब पर्यटक डलहौजी आते हैं। पर्यटकों की इस भीड़ को आवासीय सुविधा देने के लिए शहर में संचालित सौ होटल व गेस्ट हाउस भी कम पड़ जाते हैं। शहर में 250 के करीब वाहनों को पार्क करने की सुविधा के चलते ट्रैफिक व्यवस्था को संभालना भी चुनौती बनकर रह जाता है। पार्किंग स्थलों की कमी के चलते पर्यटकों द्वारा आडे़- तिरछे वाहन खडे़ कर देने से जाम की समस्या भी स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन जाती है। डलहौजी में कुछेक होटल ही पर्यटकों को पार्किंग सुविधा दे पाते हैं। शहर में पार्किंग स्थल न होने से नगर परिषद को रोड साइड एरिया को अस्थायी पार्किंग बनाकर काम चलाना पड़ता है।

हर रोज आठ से दस हजार सैलानी

पर्यटन सीजन में औसतन आठ से दस हजार सैलानी रोजाना डलहौजी पहुंचते हैं। पर्यटकों की आमद बढ़ने से आबादी का अनुपात दो गुना होने से सबसे बड़ी मुश्किल पेयजल व्यवस्था को लेकर आती है। होटल संचालकों को टैंकरों के माध्यम से पानी ढोकर मांग व सप्लाई के अनुपात में सामंजस्य बिठाना पड़ता है।

प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

पंजपूला , सुभाष बाबड़ी, सतधारा,कालाटोप अभ्यरण्य ,करेलनू खड्ड, सुभाष चौक, गांधी चौक, डैन कुंड व पोहलानी माता,डैन कुंड से रावी, चिनाब व ब्यास के संगम का विहंगम दृश्य।

स्वच्छ भारत अभियान डांवांडोल

डलहौजी मूलभूत विकास की बजाय भौतिक विकास की ओर बढ़ रहा है। डलहौजी में अब विकास इमारतों के निर्माण तक सीमित होकर रह गया है। शहर की महत्त्वपूर्ण जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों की कमी स्वच्छ भारत अभियान पर सवाल उठा रही है। लोक संस्कृति को सहजेने के लिए भी कोई प्रयास नहीं हो पा रहे हैं। डलहौजी में लोक संस्कृति के प्रचार- प्रसार को लेकर भी सरकारी स्तर पर प्रयास अभी तक नगण्य नजर आ रहे हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पहाड़ आधुनिक विकास के रंग में डूबकर अपनी रंगत खोने लगे हैं।

हरियाली को खा गया कंकरीट का जंगल

पर्यटन स्थल डलहौजी बेतरतीब होटल व भवन निर्माण के चलते कंकरीट के जंगल में तबदील हो रहा है। हरे-भरे देवदार के पेड़ों के बीच अब भवनों व होटलों की भरमार से शहर की आबोहवा में भी बदलाव आने लगा है। कभी 12 महीने ठंड से कांपने वाली डलहौजी में अब गर्मियों में तापमान 25 डिग्री से पार हो जाने लगा है। हालात यह है कि अगर जल्द शहर में बेतरतीब निर्माण पर रोक न लगाई गई तो वे दिन दूर नही, जब डलहौजी में देवदार के हरे पेड़ों के बीच दो पल सुकून के बिताना सपना बनकर रह जाएगा। डलहौजी के एसडीएम कार्यालय मार्ग, ठंडी व गर्म सड़क के अलावा गांधी चौक के आसपास धड़ाधड़ होटलों व भवनों का निर्माण जारी है। हालात यह बन गए हैं कि शहर में जगह कम पड़ने के चलते अब खजियार मार्ग पर मोती टिब्बा तक होटलों की लंबी लाइन लग गई है। शहर में भवनों व होटलों का निर्माण तो जारी है, मगर शहर की गंदगी व कूड़ को खपाने के लिए अभी तक सीवरेज व कूड़ा संयंत्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिस कारण जहां गंदगी को खुले नाले और कूडे़ को खुले में गिराने से भी वातावरण दूषित हो रहा है। इन सुविधाओं को जुटाने के लिए अभी तक औपचारिकताएं फाइलों के फेर में ही फंसकर रह गई हैं। महज कथलग में डंपिंग साइट के जरिए कूड़ा-कर्कट खपाया जा रहा है।

सौंदर्यकरण को जन सहयोग जरूरी

डलहौजी के स्थानीय लोगों की मानें तो शहर को पुराना वैभव लौटाने के लिए प्रशासन व नगर परिषद को जनसहभागिता के जरिए काम करना होगा। इसके लिए शहर का सौंदर्यकरण और सड़कों के विस्तारीकरण को लेकर कार्य करना होगा। जिससे शहर की आबोहवा को स्वच्छ बनाकर ट्रैफिक  के बोझ से मुक्ति दिलाई जा सके।

अवैध कब्जों- भवनों ने बिगाड़ी तस्वीर

डलहौजी में अवैध कब्जों ने भी शहर की तस्वीर को बदसूरत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। टीसीपी कानून की अवहेलना कर निर्माण करने वालों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरने का क्रम जारी है। अवैध कब्जे के दो-तीन मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।

You might also like