क्षमता से कितना बाहर नयनादेवी

श्रद्धालुओं की आमद के साथ-साथ श्रीनयनादेवी में अंधाधुंध निर्माण भी बढ़ा है, जिसने शहर की सूरत ही बिगाड़ कर रख दी है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों को पेश आने वाली मुश्किलों और खामियों को दखल के जरिए पेश कर रहे हैं… राकेश गौतम

उत्तरी भारत का विख्यात तीर्थ स्थल श्रीनयनादेवी हिमाचल प्रदेश के  जिला बिलासपुर में स्थित है। पंजाब की सीमा के साथ सटा यह तीर्थ स्थल तारालय पर्वत पर लगभग 3500 फीट ऊंचाई पर  है। मां नयनादेवी का मंदिर तारालय पर्वत पर एक चमकते हुए हीरे की भांति सुशोभित है, जिसे कोसों दूर से भी देखा जा सकता है। इस धार्मिक स्थल में मां सती के अंग (नेत्र) गिरे थे, जिसके चलते इस नगर का नाम श्रीनयनादेवी पड़ा था। यहां की आबादी 1000 से भी कम  है। वर्तमान में श्रीनयनादेवी को नगर परिषद का दर्जा प्राप्त है । बताया जाता है कि राजा आनंदचंद ने नयनादेवी नगर को धार्मिक दृष्टि से साफ-सुथरा रखने के लिए ही इसे नगर पालिका का दर्जा दिलवाया था तथा अब इसे नगर परिषद का दर्जा प्राप्त है । नयनादेवी में वर्तमान समय में सात वार्ड हैं। नयनादेवी नगर लगभग 1100 बीघा क्षेत्रफल में फैला है। वर्तमान में श्रद्धालुओं के ज्यादा आने से इस स्थल में निर्माण कार्य भी बढे़ हैं, जिसने यहां की सूरत बिगाड़ दी है।

अंधाधुंध निर्माण ने बिगाड़ी सूरत

अंधाधुंध निर्माण कार्यों ने नयनादेवी नगर का पूरा स्वरूप ही बिगाड़ दिया है। बेतरतीब बने मकान तथा रास्तों में पसरी दुकानों ने नगर के स्वरूप को बिगाड़ दिया है। मुख्य रास्तों में बने मकानों से अब नयनादेवी नगर बहुत ज्यादा तंग होता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोग भी यह सोच कर मनन करते हैं कि कहीं 1978 जैसा कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

 20 करोड़ आमदनी

मंदिर न्यास की कुल आमदन लगभग 20 करोड़ रुपए है, जिसमें मंदिर न्यास ने एक संस्कृत महाविद्यालय तथा एक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खोल रखी है।   न्यास के पास लगभग 200 के करीब लोग कार्य कर रहे हैं, जिनके वेतन पर लाखों रुपए न्यास दे रहा है। इसके अतिरिक्त नगर परिषद को भी सालाना आमदन लगभग एक करोड़ रुपए हो जाती है,सरकारी अनुदान बहुत ही कम मिलता है। न्यास हर कार्य करने में सक्षम है। अगर मंदिर में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हो तो मंदिर न्यास यात्रियों की सुविधा हेतु अच्छे काम कर सकता है।

हर साल आते हैं  25 लाख भक्त

सरकारी आंकड़ों की मानें तो नयनादेवी में प्रतिवर्ष लगभग 20 से 25 लाख यात्री मां नयनादेवी जी के दर्शनों के लिए आते हैं। वर्तमान में मंदिर न्यास द्वारा यात्रियों के लिए ठहरने के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं।  मंदिर न्यास श्रीनयनादेवी द्वारा श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त लंगर की व्यवस्था की गई है। यहां एक आधुनिक लंगर भवन का निर्माण किया गया है, जिसमें एक समय में लगभग 500 श्रद्धालु बैठकर खाना खा सकते हैं। न्यास द्वारा चपाती एवं पूरी बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। न्यास द्वारा लंगर में नाश्ता, दोपहर का खाना और रात्रि का भोजन निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अलावा मांग पर 24 घंटे कभी भी भोजन उपलब्ध करवाया जाता है।

ओपन स्पेस तो दूर, सांस लेने की भी जगह नहीं बची

नयनादेवी में वर्तमान में ओपन स्पेस जरा भी नहीं बचा है। यहां तक न्यास भी अगर कोई निर्माण कार्य करना चाहता है, तो उसे भी जगह की कमी खलती है, ऐसे में नगर परिषद की कुछ जमीन पर न्यास की नजरें गढ़ीं हुई हैं।  अधिकारी बेरोकटोक नगर परिषद की जमीन पर यात्रियों की सुविधार्थ कुछ भी बनाने के लिए दबाव डालते हैं। नगर पार्षद भी मूक दर्शक बनकर अधिकारियों की मनमानी में शामिल हो जाते हैं। वर्तमान में मंदिर के नजदीक इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि हर व्यवस्था तंग दिखाई देती है तथा वहां सांस लेने तक भी अब जगह नहीं बची है।

200 दुकानें, हद से ज्यादा रेहडि़यां

25 वर्ष पूर्व यहां जहां मात्र 10 से 20 ही दुकानें हुआ करती थीं । आज लगभग 200 दुकानों के अतिरिक्त सैकड़ों रेहड़ी-फड़ी वाले रोजी-रोटी कमा रहे हैं। जिस तरह से यात्रियों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है, उसी रफ्तार में  निर्माण कार्य भी निरंतर बढे़ हैं ।

होला मोहल्ला-नववर्ष पर भक्तों का तांता

श्रीनयनादेवी में तीन मेलों के अतिरिक्त होला मोहल्ला और नववर्ष पर  यात्रियों की बाढ़ आ जाती है ।  गर्मियों में भी यात्रियों की संख्या सर्दियों की अपेक्षा ज्यादा होती है। गर्मियों में यात्रियों की बढ़ती तादाद के चलते मंदिर प्रशाशन एवं जिला प्रशासन को खासी मशक्कत  करनी पड़ती है।

निःशुल्क ठहरने  की व्यवस्था

मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मंदिर के समीप पटियाला धर्मशाला एवं लंगर के समीप धर्मशाला का निर्माण करवाया गया है, जिसमें 1000 श्रद्धालुओं के निःशुल्क ठहरने की व्यवस्था है। न्यास द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मातृ आंचल मातृ शाया एवं लंगर के समीप मातृ शरण का निर्माण करवाया गया है, जिसमें 45 कमरे और 15 डोरमेट्री में ठहरने की उचित व्यवस्था है। बस अड्डे के समीप एक सरकारी विश्राम घर है, जिसका प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता है। मंदिर न्यास द्वारा किसी भी सितारा होटल का निर्माण नहीं किया गया है।

नो प्रॉफिट, नो लॉस वाली स्वीट्स शॉप

न्यास मंदिर परिसर में 1994 से दुकान नंबर-1 का संचालन कर रहा है। यह दुकान श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध घी की मिठाइयां जैसे हलवा बेसन लड्डू, जलेबी और बर्फी उपलब्ध करवाती है। यह दुकान ‘न लाभ न हानि’ के आधार पर चलाई जा रही है। यहां पर  नारियल, हरा मेवा और धूप भी उपलब्ध करवाया जाता है।  यहां पर 10 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त नयना देवी में लगभग कई निजी होटल तथा धर्मशाला एवं सरायं हैं।

सामाजिक सरोकार

जिला बिलासपुर की तहसील नम्होल और नयना देवीजी के गरीब परिवार की लड़कियों को शादी पर 5100 रुपए, तीन सूट और साडि़यां दी जाती हैं। एक संस्कृत कालेज और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मंदिर ट्रस्ट के संरक्षण में चलाया जा रहा है। मंदिर न्यास नजदीकी अस्पतालों और स्वयंसेवी संगठनों को वित्तीय सहायता भी देता है।

श्रद्धालुओं के लिए तीन  टाइम लंगर

पटियाला धर्मशाला और लंगर क्षेत्र के निकट एक अन्य होटल है, जहां 1000 श्रद्धालुओं को मुफ्त रहने की सुविधा दी जाती है। मातृ आंचल, मातृ छाया और मातृ शरण में वीआईपी एसी और गैर एसी कमरे मामूली दरों पर उपलब्ध करवाए जाते हैं।  लंगर में नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना पूरी तरह से मुफ्त मिलता है।

प्रवासियों ने डाला डेरा

नयना देवी विश्व विख्यात तीर्थ स्थल है तथा 1985 को सरकार में मंदिर को अपने अधीन ले लिया था। 1985 के बाद नयना देवी में एक बड़ी तस्वीर बदली है जहां मात्र 10 या 15 दुकानें हुआ करती थी अब लगभग दो सौ  से ज्यादा दुकाने हैं। इसके अतिरिक्त बिहार, नेपाल, उत्तर प्रदेश के बाशिंदों ने भी डेरा डाल दिया है तथा रेहड़ी-फड़ी लगाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं।

सड़कें सुधरी, पर स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी बेहाल

नयनादेवी में दो बड़े हादसे हुए हैं । सबसे बड़ा हादसा 3 अगस्त 2008 को हुआ था । अगर सच्चाई की तह तक जाएं तो यह हादसा प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही थी। लगभग 160 श्रद्धालु मौत की आगोश में समा गए थे। चूंकि अब लगभग सभी रास्ते चौड़े कर दिए गए हैं तथा यात्रियों को बारिश से बचने के लिए शैड भी बना दिए हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने सर्कुलर रोड बना दिया है अगर नहीं बना तो वह है अस्पताल। चिकित्सा सुविधा के नाम पर आज भी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।  मेलों के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी से जूझना पड़ता है। इसके अलावा मंदिर न्यास को अब मंदिर की पहाड़ी को बचाने के लिए मास्टर प्लान बनाना चाहिए तथा समूची पहाड़ी की ग्राउटिंग करवानी चाहिए। सभी सीवरेज लाइन को चेक करके खंगालना चाहिए कि कहां पानी लीक हो रहा है । पानी की  सभी पाइपों को हटाकर विभाग को एक बड़ी पाइप के जरिए कनेक्शन देने चाहिए तथा लीकेज को बंद किया जाना चाहिए ।

जनता की आवाज ; पहाड़ी पर किया जाए पौधारोपण

नयना देवी के  पवन कुमार, भरत कुमार, अमित कुमार, कार्तिक शर्मा तथा श्याम किशोर का कहना है कि अगर नयनादेवी    न्यास प्रयास करे तों  श्रीनयनादेवी धार्मिक नगरी  के साथ एक सुंदर नगरी का रूप ले सकती है।  इसके अलावा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बैठने के लिए बड़े हाल का निर्माण किया जाना चाहिए, जहां भक्त   बैठकर मां का गुणगान भी कर सकें। इसी के साथ शौचालयों की भी सुविधा होनी चाहिए । नयना देवी बस अड्डे से लेकर या गुफा से मंदिर तक यात्रियों की सुविधा हेतु हर 50 मीटर के बाद सुलभ शौचालयों का होना आवश्यक है।  गुफा से मंदिर तक के रास्तों को और चौड़ा करना चाहिए। कई बार हृदयगति रुकने से कई यात्रियों की मौत हो चुकी है, लिहाजा यहां पर हार्ट  स्पेशलिस्ट का होना अति आवश्यक है। पानी की सभी पाइपों को हटा कर इसका सही तरीके से रखरखाव होना चाहिए।  नगर परिषद और न्यास पानी की निकासी के लिए मास्टर प्लान तैयार करे। मंदिर के इर्द गिर्द पहाड़ी पर पौधा रोपण होना चाहिए।  नयना देवी में बंदरों के आतंक से लोग परेशान रहते हैं, इससे भी छुटकारा होना आवश्यक है।  बिजली की तारों एवं स्ट्रीट लाइट का भी सही ढंग से रखरखाव होना चाहिए। नयना देवी को जोड़ने वाली सभी सड़कों को डबल किया जाए तथा इसे पक्का किया जाए।

पहाड़ी की ग्रोटिंग, कपाली कुंड का होगा जीर्णाेद्धार

 डंपिंग साइट बनाने की भी योजना

मंदिर प्रशासन के अध्यक्ष एवं एसडीएम स्वारघाट अनिल चौहान का कहना है कि न्यास की बैठकों में समयानुसार नए-नए फैसले लिए जाते हैं।  भविष्य की योजनाओं को लेकर बजट बैठक होती है,जिसमें न्यास हर कार्यों के लिए फैसले लेता है तथा वर्ष में सभी कार्यों पर न्यास पैसा खर्च होता है। भविष्य में कपाली कुंड का जीर्णोद्धार के साथ डंपिंग साइट का निर्माण और मंदिर में एक मास्टर प्लान के तहत कार्य तथा मंदिर की पहाड़ी पर ग्रोटिंग करने की योजना है।

श्रावण नवरात्र पर महाभीड़

श्रीनयनादेवी में यूं तो साल भर भक्तों को तांता लगा रहता है, लेकिन चैत्र,श्रावण तथा आश्विन नवरात्र पर लाखों के हिसाब से भक्त पहुंचते हैं। परंतु श्रावण मेलों में सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इसके अतिरिक्त मार्च से जून के दिनों में भी ज्यादा भीड़ होती है। ज्यादा भीड़ का जमावड़ा मंदिर के नजदीक ही होता है। ज्यादा भीड़ होने के बाद प्रशासन इसे नियंत्रित करने के लिए यात्रियों को दशनामी अखाड़े के फ्लाई ओवर से भेज कर मंदिर की मुख्य लाइन से जोड़ देता है। पहल  एक ही रास्ता मंदिर में आने-जाने के लिए होता था परंतु 1978 में लैंड स्लाइड के बाद तथा कुछ हादसों के बाद दो रास्ते बना दिए गए हैं। अब मंदिर में जाने के लिए रज्जू मार्ग तथा घवांडल संपर्क सड़क तथा सर्कुलर सड़क भी बना दी है, जिससे श्रद्धालु अपनी-अपनी गाडि़यों से सीधे मंिदर  गुफा पहुंच पाते हैं। परिणाम स्वरूप वहां पार्किंग भी कम हो जाती है तथा बेतरतीब खड़ी गाडि़यों से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है। ऐसे में मंदिर गुफा के पास तीन-चार बड़ी पार्किंग का होना आवश्यक है परंतु कुछ राजनीतिक लोग अपने स्वार्थ के चलते विकास में बाधा बने हुए हैं तथा पार्किंग को नहीं बनने दे रहे, जबकि उसका नगर परिषद शिलान्यास करवा चुकी है। तीन वर्षों से काम थोड़ा शुरू हुआ था ,लेकिन आगे नहीं बढ़ पाया। पार्किग न होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी गाडि़यां खड़ी करना मुश्किल हो जाता है और राहगीरों की परेशानी झेलनी पड़ती है।

पहाड़ी में रिस रहा पानी मचा सकता है तबाही

वर्तमान में नयनादेवी मंदिर की पहाड़ी पर न केवल स्थानीय लोगों ने अपितु मंदिर न्यास ने भी क्षमता से ज्यादा भवनों का निर्माण कर दिया है। भवनों के बोझ से अब लोगों को भारी बरसात में 1978 की तबाही भी याद आने लगी है। 1978 में भरी बरसात के चलते नयना देवी का एक बड़ा हिस्सा भू-स्खलन की चपेट में आ गया था।  न्यास बनने के बाद अंधाधुंध पहाड़ी को काटा गया है, ऊपर से सीवरेज लाइन बिछाई गई है परंतु सही ढंग से पानी की निकासी नहीं होने से पानी अंडर ग्राउंड ज्यादा रिस रहा है, जो  पहाड़ी के लिए कभी भी खतरा बन सकता है। इसके अतिरिक्त   अधिकांश पेयजल पाइपों में लीकेज हो रही हैं, जिससे प्रतिदिन लाखों लीटर पानी पहाड़ी में रिस रहा है, ऐसे में भविष्य में अगर कोई अनहोनी होती है तो इसका बड़ा कारण सीवरेज तथा पानी की लीकेज ही होगा। इसके अलावा कई होटलों में अभी तक सीवरेज लाइन नहीं जुड़ पाई है। यही नहीं, पानी की निकासी के लिए बनी नालियों में स्थानीय लोगों ने पाइपें बिछा दी हैं, जिससे यहां गंदगी भी जमा रहती है। जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ी है, उसी तरह से लोगों ने भी अपने व्यवसाय को भी बढ़ाया है, लोगों ने होटल, सरायं तथा धर्मशाला का निर्माण करवाया है। ज्यादा रास्ते निकालने से पहाड़ी को ब्लास्ट किया गया। ब्लास्टिंग के चलते पहाड़ी भी अंदर से जर्जर हो रही है, जो कभी कहर बरपा सकती है।

अगले 25 साल के   लिए बने मास्टर प्लान

मंदिर न्यास को आगामी 25 वर्ष को ध्यान में रख कर काम करना चाहिए न्यास में जब भी कोई भी नया अधिकारी आता है तो वह अपने नए सुझाव देकर पुराने कार्यों को नजरअंदाज कर अमलीजामा पहनाता हैं। इससे बार-बार एक ही काम पर फिजूलखर्ची की जाती है।

लोगों की नाक में दम पहाड़ी पर फेंका जा रहा कचरा

नयनादेवी के लोग मौजूदा समय में अगर किसी समस्या से परेशान है तो वह है कचरा और गंदगी।  हालांकि नगर परिषद ने कार्यालय के समीप एक डंपिंग साइट बनाई है ।  लेकिन जिस जगह पर यह साइट है, वहां आने-जाने वाले लोगों के लिए समस्या बनी हुई है।  लोग  इस डंपिंग साइट को उठाने की मांग करते आ रहे हैं। मंदिर न्यास ने तो हद ही पार कर दी है । सारी गंदगी को न्यास पहाड़ी  में ही फेंक रहा है,  जबकि लंगर का भी बचा गारबेज पहाड़ी में ही फेंका जाता है। इसके लिए न्यास तथा नगर परिषद को मिलकर सोचना होगा। अलग-अलग वार्ड में डंपिंग साइट बननी चाहिए।  खुले में लोग या दुकानदार, जो कूड़ा फेंकते हैं, उन पर प्रशासन कड़ी कारवाई करे।

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