‘दिव्य हिमाचल फुटबाल लीग’ की शुरुआत कुछ ऐसी…

लीडरशिप के लिए फुटबाल पर फोकस

अर्जुन सिंह

हिमाचल चंडीगढ़ के लिए नौ बार खेल चुके हैं नेशनल

सोलन  – खेलों का महत्त्व दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। खेलकूद हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। खेलें हमारे दिमाग तथा शरीर को सक्रिय बनाए रखने तथा हमारी कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करती हैं। यह कहना है ‘दिव्य हिमाचल फुटबाल लीग’ सीजन दो के रैफरी अर्जुन सिंह का। अर्जुन सिंह का कहना है कि फुटबाल को अतिरिक्त या मनोरंजक गतिविधियों से कहीं ऊपर उठकर देखना चाहिए। बच्चों को बचपन से ही फुटबाल में जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। फुटबाल खिलाड़ी को, जीवन के वैकल्पिक चरणों पर प्राप्त सफलता और असफलता साझा करने की कला, सामूहिक रूप से किसी समस्या से निपटने, बैकअप लेने तथा महत्त्वपूर्ण परिस्थितियों में एक-दूसरे की मदद करना सिखाता है। यह उनके नेतृत्व और टीम के साथ काम करने के गुणों को भी निखारता है। फुटबाल एक व्यक्ति के दिमाग को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करता हैं। इसके कारण उनकी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। फुटबाल लोगों को मजबूत, आत्मविश्वासी और कुशल बनाता है। जोगिंद्रनगर के गांव समखेटर के रहने वाले अर्र्जुन सिंह नौ बार चंडीगढ़ की टीम से व कई बार हिमाचल की टीम से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खेल चुके हैं। अर्जुन सिंह का कहना है कि वर्ष 2012 में जोगिंद्र सैणी के कहने पर उन्होंने पाइनग्रोव स्कूल से रेफरी का कोर्स किया। उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए हैड ऑफ रैफरी श्याम सुंदर शर्मा व हिमाचल प्रदेश फुटबाल एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव दीपक शर्मा का भी अहम योगदान है।

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