रोहतांग टनल में फिर रिसने लगा सेरी नाला

रक्षा मंत्रालय को तगड़ा झटका, इंजीनियर्स की टेंशन भी बढ़ी

मनाली –रक्षा मंत्रालय के महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट रोहतांग टनल में एक बार फिर सेरी नाला बड़ी बाधा बन कर उभरा है। टनल के भीतर नाले के पानी की लीकेज बढ़ गई है और इसी के साथ रोहतांग टनल के इंजीनियर्ज की टेंशन भी। टनल के ऊपर बह रहे सेरी नाला की वजह से भीतर के करीब 300 मीटर क्षेत्र में लीकेज रुक नहीं रही, जिसे रोकने के लिए ही सीमा सड़क संगठन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में रोहतांग टनल पर एक बार फिर सेरी नाला हावी होता दिखाई दे रहा है। इससे पहले भी सेरी नाले की वजह से ही रोहतांग टनल की खुदाई का काम करीब तीन साल बंद रहा। नतीजतन टनल की लागत 1600 करोड़ से चार हजार करोड़ तक पहुंच गई। ऐसे में अभी भी सेरी नाले की लीकेज टनल के भीतर बंद नहीं हो पाई है। यहां बता दें कि रोहतांग दर्रे के नीचे 8.8 किलोमीटर लंबी इस टनल की दोनों छोरों से खुदाई सितंबर, 2017 में पूरी हो चुकी है। अब टनल के अंदरूनी कार्य जारी हैं, लेकिन बीआरओ के लिए सबसे बड़ी चुनौती सेरी नाले के पानी की लीकेज है। रोहतांग टनल के चीफ इंजीनियर कर्नल एनएम चंद्राणा का कहना है कि सेरी नाले की लीकेज पर काबू पा लिया जाएगा। विशेषज्ञ इसमें जुट गए हैं। लीकेज रोकने और टनल के अंदर के कार्य साथ-साथ किए जा रहे हैं। टनल का अधिकतर काम पूरा हो चुका है। जल्द ही उनके विशेषज्ञ सेरी नाले का भी पक्का तोड़ ढूंढ निकालेंगे। उधर, लाहुल-स्पीति के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को  उनकी अध्यक्षता में एक दल बीआरओ के उच्चाधिकारियों से मिला और रोहतांग टनल का कार्य जल्द पूरा करने का आग्रह किया। श्री ठाकुर ने बताया कि बीआरओ के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि टनल का अधिकतर काम पूरा हो चुका है, लेकिन एक बार फिर टनल के भीतर सेरी नाले की लीकेज बढ़ गई है।

हर बार लक्ष्य से चूके

रोहतांग टनल की खुदाई का काम जून, 2010 में शुरू हुआ था। उस समय 2014 तक टनल कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बीआरओ इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया और अगला लक्ष्य वर्ष 2017 का रखा गया, लेकिन इसमें भी सीमा सड़क संगठन को कामयाबी नहीं मिल पाई और अब दिसंबर, 2019 का लक्ष्य तय किया गया है।

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