क्षमता से कितना बाहर ज्वालामुखी

दुनिया को  पवित्र ज्योति से निहाल करने वाली मां ज्वाला की नगरी अब भीड़ का शहर दिखती है। यहां रास्ते-ट्रैफिक, पानी-प्लानिंग समय की बहुत बड़ी जरूरत हैं , कुछ ऐसे ही मुद्दों को दखल के जरिए उठा रहे हैं… शैलेष शर्मा

विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर  में आने वाले यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं पानी, बिजली, आवास,वाहन पार्किंग, मुहैया होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां अधिकांश बाजार सिकुड़े हुए हैं  अंधाधुंध भवन निर्माण ने शहर की सुंदरता बिगाड़ कर रख दी है।  ऊपर से हर गली-मोहल्ले ,नाले में अवैध कब्जों ने शहर की सुंदरता पर दाग लगा दिया है। आवास के नाम पर यहां कई धर्माथ सराय हैं, परंतु वे धर्मार्थ नहीं रही है,उनमें होटलों की तर्ज पर उगाही की जाती है और सरकार को टैक्स न देकर ये संस्थाएं करोड़ों रुपए सालाना प्रदेश के बाहर मालिकों को भेज रही है।  शहर में पानी की  सबसे बड़ी जन समस्या है जो ब्यास नदी से पानी उठाने के बाद ही समाप्त हो सकती है। तभी यहां पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है यहां के दुकानदारों को लाभ मिल सकता है।  यहां पर मंदिर न्यास की कोई भी अपनी धर्मार्थ सराय नहीं है, जहां गरीबों को सस्ते व निःशुलक कमरे मिल सकें। इसके अलावा श्री ज्वालामुखी मंदिर में हर साल आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए केवल 15 होटल, 25 गेस्ट हाउस और 12 के करीब सराय है, लेकिन लाखों के हिसाब से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह व्यवस्था नाकाफी साबित होती है। वहीं सबसे ज्यादा  श्रद्धालुओं को पार्किंग के लिए परेशानी को सामना करन पड़ता है।

नवरात्र पर उमड़ती है भीड़

अश्विन ,चैत्र व श्रावण नवरात्र के अलावा गुप्त नवरात्र पर यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा गर्मियों के दिनों में भी यात्रियों की संख्या में बेहिसाब बढ़ोतरी  होती है, एकाएक भीड़ होने से यहां श्रद्धालुओं को कई परेशानियों से जूझना पड़ता है।

हर साल आते हैं 20 लाख श्रद्धालु

अनुमान के मुताबिक साल भर यहां पर बीस लाख के लगभग श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं। गौर हो कि देश-विदेश से भक्त माता के दर्शनों को आते हैं। इसके अलावा यहां सरकारी व गैर सरकारी भवन हर तरफ बने हुए है, जिससे खाली जगह आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नहीं रखी गई है। प्रदेश सरकार द्वारा मंदिर के आसपास ओपन स्पेस रखने के आदेश दिए गए थे परंतु यहां पर ओपन स्पेस तो दूर आपातकालीन स्थिति में निकलना भी मुश्किल हो जाता है। नवरात्र के दौरान तो ऐसा लगता है कि यहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।

अरसे से बंद संगीतमय फव्वारा

न्यास द्वारा लाखों रुपए खर्च करके यात्री निवास के पास बनाया संगीतमय फव्वारा  कई सालों से बंद पड़ा है। उत्तरी भारत का अपनी किस्म का यह संगीतमय फव्वारा आधुनिक तकनीक से बना है । मैसूर लैंपस की लाइटें इसकी आभा को और भी बढ़ा देती हैं।  संगीत की धुन के हिसाब से फव्वारे का पानी व रंग-बिरंगी लाइटों का संगम कुछ इस तरह से माहौल को आकर्षक बना देता है कि मन चंचल होकर इन शीतल पानी को तरंगों को देखता ही रहता है। तकनीकी खराबी की वजह से यह फव्वारा आज फटेहाल स्थिति में है।

संग्रहालय में रखें पांडुलिपियां

मंदिर में संग्रहालय बनाकर प्राचीन ऐतिहासिक चीजों को उनमें रखा जाए । प्राचीन पांडुलिपियों को तलाश कर वहां रखा जाए। इसी के साथ एक पुस्तकालय का निर्माण हो ।  सभी मंदिरों में शेड बनाएं जाएं, ताकि यात्रियों को पानी व धूप से बचाया जा सके।  मिनी चिडि़याघर, रिसार्ट, कैफे व पार्क आदि का निर्माण परिक्रमा मार्ग में किया जाए, ताकि यात्रियों को आकर्षित किया जा सके।

ऐसे बचेंगे लाखों रुपए

संस्कृत कालेज के अधिकारियों व कर्मचारियों को मंदिर में कार्यालय में एडजस्ट करके संस्कृत कालेज का चामुंडा देवी संस्कृत कालेज में मर्ज कर देना चाहिए। जिससे सालाना तीस लाख से अधिक बचेंगे। क्योंकि यहां छात्रों की संख्या नाममात्र की रह गई है, इसलिए यह जरूरी है। मातृ सदन को ठेके पर देना चाहिए, ताकि चार लोगों के वेतन का खर्चा मंदिर का बचे। क्योंकि करोड़ों रुपए  लगाकर आय से अधिक खर्च हो रहा है। लिहाजा सरकार को इस बारे में सोचने की जरूरत है।

मंदिर की आय

13 करोड़ आमदनी  19 करोड़ की एफडी

ज्वालामुखी मंदिर की सालाना  आय लगभग तेरह करोड़ रुपए है। मंदिर के पास कुल 19 करोड़ की एफडी है, जिसका सालाना एक करोड़ के लगभग मंदिर को ब्याज मिलता है। मंदिर का सोना गोल्ड बांड योजना में रखा गया है जिसका सालाना लगभग पांच लाख रुपए ब्याज के मिलते हैं। सालाना तीन लाख विदेशी मुद्रा के रूप में व लगभग बीस लाख रुपए लंगर, बकरे बेचने, मंदिर का सामान नीलाम करने व अन्य जगह से आता है। हर साल मंदिर में देश-विदेश से मंदिर में माथा टेकने आते हैं। बहरहाल  एकाएक भीड़ बढ़ने से सारे इंतजाम हांफ जाते हैं।

मंदिर न्यास जरूरतमंद बेटियों को देता है शगुन

मंदिर का पैसा मंदिर के कर्मचारियों व पुजारियों को वेतन व हिस्सा देने के अलावा संस्कृत कालेज पर सालाना तीस लाख  खर्च किया जाता है। यहीं नहीं, सामाजिक सरोकार के चलते भी न्यास पैसे खर्च करता है। मंदिर न्यास गरीब परिवार की बेटियों के विवाह आदि पर इकावन सौ रुपए व बिना मां-बाप की बेटियों को 11 हजार रुपए शगुन के रूप देता है।

इन  बिंदुओं पर सोचे प्रशासन-सरकार

—ज्वालामुखी को रेल नेटवर्क के साथ जोड़ना चाहिए

— मंदिर के ऊपर पहाड़ी पर हेलिपैड बनाना चाहिए

— मंदिर में रखे सोने-चांदी को गोल्ड बांड योजना में लगाकर ब्याज लेना चाहिए

— मंदिर के पास खुले स्पेस चिन्हित होने चाहिए

— मंदिर के लिए वैकल्पिक मार्ग का निर्माण करना चाहिए

—परिक्रमा मार्ग को विकसित किया जाना चाहिए। यहां पर टैक्सी योग्य सड़क का निर्माण होना चाहिए

— न्यास कोेकूड़ा -कचरा संयंत्र लगाना चाहिए

— न्यास अपनी भव्य धर्मार्थ सराय व यात्री सदन बनाए

—मदिर की अपनी सुरक्षा फोर्स के साथ-साथ एंबुलेंस भी हो

—मंदिर के साथ लगते नाले को चामुंडा देवी के पैटर्न पर विकसित किया जाए

—ज्वालामुखी शहर को पवित्र नगरी घोषित करके यहां पर मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाया जाए

एलईडी लाइट से जगमगाए शहर

मंदिर के पैसे से पीवीआर मल्टी स्टोरी बिजनेस कांप्लेक्स का निर्माण किया जाए, ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को मनोरंजन का साधन मिल सके। प्रदेश के मंदिरों को अतिरिक्त बसें शुरू की जाएं। शहर में जगह-जगह शौचालय ,स्नानागार व वाटर कूलर रखे जाएं।  बड़े जेनरेटर लगाकर एलईडी लाइटों से पूरे शहर को रोशन किया जाए, ताकि लाइट जाने पर शहर की रोशनी बरकरार रहे, जिससे असामाजिक तत्त्वों को सिर उठाने का मौका नहीं मिलेगा । शहर के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए, ताकि शहर को हर सुविधा व सुरक्षा की दृष्टि से हाईटेक किया जा सके।

रेल-हवाई मार्ग का हो विस्तार

ज्वालामुखी शहर को विश्व के मानचित्र पर होने के नाते यहां पर सभी मार्गाें,रेल मार्ग,हवाई मार्ग से ज्वालामुखी तक पहुंचना सुलभ हो, ताकि यहां आने वाले यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिलें

                 —अभिषेक पाधा, एडवोकेट

रेल नेटवर्क से जुड़े 

ज्वालामुखी शहर को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सफर करने में दिक्कत न हो । सफाई   की ओर भी ध्यान देना चाहिए

                                        —नरदेव कंवर, ग्रामीण

सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो

जब भी मौका मिलता है, हम लोग  मां के दरबार में हाजिरी लगाने जाते हैं, लेकिन यहां पर सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है, जिससे मन को दुख पहुंचता है। इसमें सुधार होना चाहिए

                            —कमलेश कुमारी, गृहिणी

शहर का सौंदर्यीकरण किया जाए

शहर को विकसित करने के लिए शहर का सौंदर्यीकरण किया जाए, चौबीस घंटे पानी, बिजली, यातयात, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कों की व्यवस्था की की जानी चाहिए, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिले

                                      —राजेश शर्मा, पूर्व प्रधान

24 घंटे मिले पानी

शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाने में मंदिर न्यास नगर परिषद को  सहयोग करे। शहर में चौबीस घंटे पानी उपलब्ध हो। मंदिर मार्ग में डंगे लगाकर यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता की जाए

                                  —बबली शर्मा, नगर पार्षद

पर्यटन की अपार संभावनाएं

पर्यटन निगम के निरीक्षक संजय शर्मा ने कहा कि ज्वालामुखी में पर्यटन की काफी संभावनाएं है सरकार चाहे तो यहां पर धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी नजारा लोगों को देखने के लिए मिल सकता है। ज्वालामुखी में रोप वे, वाटर स्पोर्ट्स व आवास को लेकर संभावनाएं मौजूद हैं।

मंदिर तक बनाई जाए लिफ्ट

ज्वालामुखी मंदिर के आसपास खाली जगह होनी जरूरी है, ताकि आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। नैनादेवी मंदिर की घटना से ज्वालामुखी मंदिर ने कोई सबक नहीं लिया । यहां पर आज भी पहाड़ी का मलबा मुख्य मंदिर मार्ग पर गिरता है, परंतु  आज तक डंगे लगाने का काम नहीं हो पाया । न्यास को तारा देवी मंदिर तक लिफ्ट बनानी चाहिए, क्योंकि वहां तक सड़क है और उस सड़क को लिफ्ट लगा देने से वैकल्पिक मार्ग के रूप में आपात कालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

अवैध कब्जों ने बिगाड़ी सूरत

रेहड़ी फड़ी वालों ने मारी कुंडली

विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी बस अड्डे का रखरखाव नगर परिषद ज्वालामुखी करती है। हर साल लगभग पचास लाख रुपए की आय नगर पंचायत को बस अड्डे की नीलामी  से प्राप्त होती है। बावजूद इसके बस अड्डे में व्याप्त असुविधाओं  से न केवल बाहर से आने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है,बल्कि बस आपरेटरों को भी अवैध कब्जों की वजह से बसें खड़ी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । नगर परिषद ने सख्त  निर्देश दिए हैं कि बस अड्डा तंग व छोटा है, इसलिए यहां पर कोई भी रेहड़ी-फड़ी आदि न लगाइ जाए। यहां पर बनाया गया कूड़ादान भी इसी वजह से हटाया गया था, ताकि यात्रियों को  दिक्कत न हो  और बसों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके, लेकिन यहां लोगों ने अवैध रेहडि़यां लगा दी, जिससे रोजाना बस आपरेटरों के साथ उनकी कहासुनी होती है,उनकी देखादेखी में और भी कई लोग शीघ्र ही यहां रेहडि़यां लगाने जा रहे हैं, जिससे यहां स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी । विश्व विख्यात शक्तिपीठ होने के कारण   रोजाना 150 सरकारी तथा 260 निजी बसें यहां से गुजरती हैं, जिनमें हजारों यात्रियों का यहां देर रात तक आना-जाना लगा रहता है।

अखंड ज्योतियों के दर्शन से धुलते हैं पाप

विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के कालीधार के जंगलों में विराजमान एक ऐसा मनोरम व सुंदर शक्तिस्थल है, जहां मां की पवित्र व अखंड ज्योतियों के दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिल जाती है। बिना घी-तेल या ईंधन से निरंतर सदियों से जलती चली आ रही इन दिव्य शीतल ज्योतियों की आभा ही कुछ निराली है। अग्नि रूप में प्रज्वलित होने के बावजूद इन ज्योतियों में मां की ममता व मामत्व की शालीनता महसूस की जाती है। आज पूरे विश्व में एक बटन दबाते ही इंटरनेट के माध्यम से ज्वालामुखी मंदिर को वेबसाइट पर देखा जा सकता है यहां होने वाली आरतियों की झलक देखी जा सकती है । ज्वालामुखी मंिदर में बस के माध्यम से पठानकोट,चंडीगढ़ से आ सकते है।  रेल के माध्यम से पठानकोट से यहां आ सकते है। हवाई जहाज से आना हो तो गगल एयरपोर्ट से ज्वालामुखी के लिए टैक्सी या बस मिल जाती है। यहां ठहरने के लिए कई अच्छे होटल सराय हैं । मंदिर न्यास के सौजन्य से यात्रियों के लिए काफी सुविधाएं उपलब्ध हैं । शहर चारों ओर की पहाडि़यों से घिरा हुआ रमणीय स्थल है। इस सब के बाद भी न्यास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुछ नहीं कर पाया।

अद्भुत शैली का नायाब नमूना है टेढ़ा मंदिर

ज्वालामुखी मंदिर के साथ लगती ऊंची पहाडि़यों की गोद में विराजमान भगवान श्रीराम-सीता लक्ष्मण और हनुमान का प्राचीन रघुनाथेश्वर टेढ़ा मंदिर आज लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। अपनी दुर्लभ शैली के चलते यह  मंदिर  टेढ़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है। ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेकने के बाद भक्तजन तारा  देवी मंदिर से होते हुए टेढ़ा मंदिर को जाते हैं । ज्वालामुखी मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर चंगर क्षेत्र की सुरानी पंचायत में यह अद्भुत व अनोखा मंदिर विराजमान है, जो वर्ष 1 9 0 5 के  भूकंप  के बावजूद एक मात्र मंदिर शेष बचा था, जो गिरा नहीं परंतु एक तरफ की जमीन धंस जाने के कारण टेढ़ा हो गया । इस मंदिर की एक और विशेषता यह बताई जाती है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम लक्ष्मण और माता सीता ने यहां कुछ समय व्यतीत किया था। इसके अलावा शहंशाह अकबर ज्वालामुखी मंदिर में जल रही अखंड ज्योतियों को बुझाने के लिए नहर इसी राम मंदिर से लेकर गया था । इस लिहाज से भी मंदिर की महत्ता और ज्यादा दिखती है। लिहाजा शहंशाह अखंड ज्योतियों को बुझा नहीं पाया और आज भी आभा बिखेर रही हैं।

तारादेवी मंदिर में जाने वाले भक्त प्यासे

ंश्री ज्वालामुखी मंदिर के बिलकुल पीछे  पहाड़ी पर स्थित प्राचीन तारा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए   सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। इसके संचालन व रखरखाव का जिम्मा मंदिर न्यास ज्वालामुखी के पास है।  ज्वालामुखी मंदिर में आने वाले यात्री माता तारा देवी मंदिर में जरूर जाना चाहते हैं। पुरानी मान्यता के अनुसार ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेकने के बाद सदियों से यात्री माता तारा देवी के मंदिर में भी दर्शन करके अपनी यात्रा सफल बनाते हैं। हालांकि मंदिर न्यास ज्वालामुखी व एक अप्रवासी दानी सज्जन आईडी शर्मा ने तारा देवी मंदिर का जीर्णोद्वार करवा कर इसे नया स्वरूप प्रदान किया है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। बता दें कि इस मार्ग पर न तो कोई रेन शेल्टर है और न ही टायलट सुविधा है। इसके अलावा  पीने के पानी की व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है।

 देवी मंदिर तालाब में फेंका जा रहा कचरा

शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी  स्थित कई तालाबों की हालत खस्ता है। इनमें अष्ठभुजा मंदिर तालाब, ज्वालामुखी मंदिर तालाब, घलौण  तालाब, तारा देवी मंदिर केपास तालाब व अन्य कई तालाब यहां पर हैं, परंतु सरकार व प्रशासन की अनदेखी के चलते ये ऐतिहासिक तालाब आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख देवी मंदिर तालाब है। एडीबी ने शहर केतालाबों के जीर्णोद्वार पर करोड़ों की योजना बनाई है, परंतु थोड़ा बहुत काम ही हो पाया है। मां ज्वालामुखी के नाम से मशहूर ज्वालामुखी का ऐतिहासिक देवी तालाब अनदेखी का शिकार हो कर रह गया है। बुजुर्गों के अनुसार कभी भक्तों की पुकार पर मां ज्वालाजी ने मंदिर में ज्यादा भीड़ होने पर उनकी पुकार व श्रद्धा को देखते हुए इस तालाब में ज्योतियों के रूप में तैर कर दर्शन देकर भक्तों को निहाल किया था, इसी कारण इस तालाब का नाम देवी तालाब पड़ा था। इस ऐतिहासिक देवी तालाब को किसी धरोहर के रूप में सहेजने की बजाय इसे इसके ही हाल पर छोड़ दिया गया है । इसे लोगों की नालायकी ही कहा जाएगा कि पवित्र व ऐतिहासिक देवी तालाब में वे घरों का कूड़ा-कचरा फेंकने से भी गुरेज नहीं करते। हालांकि इस तालाब में मछलियां भी हैं परंतु हर साल लोगों  द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी से बरसात व गर्मियों के दिनों में मछलियां मरती रहती हैं।

खुले में ठिकाने लगाया जा रहा कूड़ा

मंदिर न्यास ज्वालामुखी व नगर परिषद ज्वालामुखी का कहीं पर भी कोई कूड़ा कचरा संयंत्र नहीं है जिससे कूड़ा-कचरा नालों में या चंगर की धारों में फेंका जाता है, जिसका सुरानी पंचायत के लोग, वन विभाग, प्रदूषण विभाग विरोध करता है,परंतु जगह न मिलने के कारण कूड़ा-कचरा संयंत्र लगाने का काम ठप पड़ा है।

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