क्षमता से कितना बाहर बज्रेश्वरी

30 लाख श्रद्धालु      1100 दुकानें      2500 घर      18000 आबादी      57 होटल

घरों से सटे घर, दुकान पर दुकान और सड़कें-गलियां तंग।… कुछ ऐसी ही तस्वीर उभर कर आती है मां बज्रेश्वरी की नगरी यानी कांगड़ा शहर की। शक्तिपीठ में हर साल लाखों श्रद्धालु माथा टेकने आते  हैं, लेकिन पार्किंग और ठहरने की माकूल सुविधा न होने से भक्तों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कुछ महत्त्वपूर्र्ण बिंदुओं को दखल के जरिए उजागर कर रहे हैं….

राकेश कथूरिया   

4448 एकड़ में फैली कांगड़ा नगरी के नगर परिषद क्षेत्र के नौ वार्डों की जनसंख्या मौजूदा समय में करीब 18000 है ,जबकि इसके आसपास लगती पंचायतों हलेड़कला, बीरता व जोगीपुर के अधिकांश इलाके का शहरीकरण हो चुका है ,लेकिन यह इलाके नगर परिषद से बाहर हैं । कांगड़ा नगर परिषद क्षेत्र में ही मौजूदा समय में करीब अढ़ाई हजार मकान व 11 सौ दुकानें  मौजूद हैं। वर्ष 1955 में अस्तित्व में आई  कांगड़ा नगर परिषद के नौ वार्डों की जनसंख्या भले ही कम हो, लेकिन औसतन 30,000 लोगों के रोजाना कांगड़ा आने से उसका बोझ बढ़ना स्वाभाविक है । पिछले वर्षों में टांडा मेडिकल कालेज, निफ्ट संस्थान व अन्य संस्थान खुल जाने से कांगड़ा में भीड़ बढ़ी है । धार्मिक पर्यटकों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई हैं ऐसे में आने वाले समय में एक और नया शहर बसाने की जरूरत यहां महसूस की जा रही है और शहर के साथ लगती पंचायतों, जिन का शहरीकरण हो चुका है, उन्हें भी नगर परिषद में शामिल करने की पैरवी लोग करते हैं। हर रोज तीन हजार की आमद से शहर में खूब भीड़ हो जाती है। कांगड़ा में निजी व सरकारी स्तर पर जो पार्किंग उपलब्ध है , वहां 1500 छोटे-बड़े वाहन खड़े किए जा सकते हैं । मौजूदा समय में यह पार्किंग कम है । दरअसल जिस लोकेशन पर पार्किंग की जरूरत है,  वहां पार्किंग बनाने की बजाय ऐसे स्थलों पर पार्किंग का निर्माण कर दिया गया, जहां कोई औचित्य ही न था, लिहाजा पार्किंग की समस्या यहां पेश आती है। इसके अलावा शहर की क्षमता के कहीं ज्यादा भीड़ जुटने से हर व्यवस्था हांफ जाती है।  कांगड़ा में होटलों की संख्या करीब 57  है, जिसमें बिस्तरों की क्षमता 950 है, जबकि इसके अलावा यहां सराय व धर्मशालाएं भी मौजूद हैं, बावजूद इसके भीड़ बढ़ने पर लोगों को यहां ठहरने की समस्या आती है।

हर साल आते हैं ३0 लाख श्रद्धालु

मंदिर प्रशासन के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि  साल में यहां  कितने श्रद्धालु  आए, लेकिन एक अनुमान के अनुसार करीब 30 लाख श्रद्धालु हर साल माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर के दर्शनार्थ को आते हैं । उनकी सुविधा के लिए यहां मंदिर ट्रस्ट ने एक यात्री  सदन और एक यात्री निवास का निर्माण ठहरने के लिए किया है। इसके अलावा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसी कोई व्यवस्था यहां नहीं है, जहां कुछ समय यात्री विश्राम कर सकें।

शेल्टर,शौचालय का प्लान

भविष्य में मंदिर ट्रस्ट की यहां फ्लोर मिल के समीप मंदिर की भूमि पर 25 लाख रुपए की लागत से रेन शेल्टर,शौचालय व पेयजल की सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना है। मंदिर अधिकारी नीलम ठाकुर  के मुताबिक निफ्ट के सहयोग से  मंदिर के सौंदर्य करण की योजना  को अमलीजामा पहनाया जा रहा है  और वेबसाइट भी  लगभग तैयार कर ली गई है । बाईपासए गुप्तगंगा व अन्य स्थलों पर 50 बेंच लगाने की योजना है । इसके अलावा पूरे मंदिर परिसर में पेंट  का कार्य जारी है और श्लोक लिखे जा रहे हैं । सराय की मरम्मत पर भी 12 लाख रुपए  खर्च किए जा रहा है।

— नीलम राणा, मंदिर अधिकारी

अच्छी सराय के साथ बेहतर भोजन की हो व्यवस्था

मंदिरों के प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आसपास के मंदिरों  का महत्त्व भी समझाना होगा और उन्हें वहां पहुंचाना होगा। मसलन श्रद्धालुओं को जयंती माता, कालका माता , काथला माता कुणाल पथरी जैसे मंदिरों  तक पहुंचाना होगा । इसके अलावा मंदिर प्रशासकों को चाहिए कि यहां अच्छी सराय के निर्माण करें और वहां बेहतर बिस्तर-भोजन की व्यवस्था मां के भक्तों को हो । यंहा धार्मिक वातावरण  बनाया जाए , जैसे संस्कृत विद्यालय कभी यहां चलता था, उसे भी सुचारू रूप से चलाने की जरूरत है।  सफाई व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित हो, ताकि इस पावन नगरी की महत्ता बनी रहे। मंदिर ट्रस्ट में राजनीतिक दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए।

—ओसी शर्मा, पुलिस महानिदेशक (सेवानिवृत्त)

धार्मिक आयोजन को दी जाए तवज्जो

यहां आने वाले भक्तों को अन्य सुविधाएं देने के साथ-साथ यहां कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है।  कांगड़ा में उत्सव का माहौल होना चाहिए, जबकि यहां ऐसा कुछ नहीं होता।  माता बज्रेश्वरी देवी के साथ कई प्रसंग जुड़े हैं, उनके साथ उत्सव को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है और ऐसे कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसे कोई भी प्रयास यहां नही किए गए हैं । कभी यहां एमिल जागरण बहुत बड़े स्तर पर हुआ था तो उसके बाद यहां भक्तों की भीड़ बढ़ी है।  इस तरह के कार्यक्त्रमों का आयोजन साल में 10-12 दिन हो तो यहां भक्तों की भीड़ बढ़ेगी।

— चारू, गृहिणी 

मांस-मदिरा की दुकानें शहर से दूर की जाएं

मां के भक्तों के लिए सड़कें दुरुस्त हों और शौचालय पर्याप्त मात्रा में हो। मंदिर के आसपास मांस मदिरा की दुकानें न  हों और ठहरने की व्यवस्था माकूल हो।  यहां सराय तो मौजूद हैं , लेकिन ठहरने के लिए बिस्तर बेहतर नहीं मिल पाते यात्रियों को इसलिए  मुश्किल आती है । आधुनिक पार्क व वाटर पार्क बनाने की भी कोशिश की जानी चाहिए क्योंकि ऐसे स्थल विकसित कर धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। साथ मंदिर के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि यहां आने वाले भक्तों को मुश्किल न स

—रमेश भरमौरी, युवा

मां वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित हो माता की नगरी

समाजसेवी रवि शंकर का कहना है कि माता बज्रेश्वरी देवी  की नगरी को  वैष्णो देवी की तर्ज पर  विकसित करने की  जरूरत है । इसके लिए  सौंदर्यकरण की कोई ठोस योजना बने  और उस पर  एक समय अवधि के भीतर  काम हो। सबसे पहले  यंहा आने वाले माता के भक्तों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया हो ताकि वे सुकून से माता के दर्शन करने के लिए जा सके । सर्वप्रथम यहां टॉयलट और स्नान गृह  बनाने होंगे और पीने के पानी की व्यवस्था हो।

— रवि शंकर, समाजसेवी

भव्य म्यूजियम का किया जाए निर्माण

कांगड़ा में एक भव्य म्यूजियम स्थापित हो, जहां मां बजे्रश्वरी देवी से संबंधित तमाम जानकारी उपलब्ध हो और जो भी ऐतिहासिक महत्त्व से जुड़ी धरोहर व शिलालेख हैं, उन्हें वहां प्रदर्शित किया जाए, ताकि लोगों को इस ऐतिहासिक महत्त्व के स्थल की जानकारी मिले । ऐसा होने पर वे कांगड़ा की संस्कृति व सभ्यता से परिचित हो। इसके अलावा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हर सुविधा मिलनी चाहिए और सफाई व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सड़कों की भी हालत सुधारी जानी चाहिए।

— विक्रम सेठ, श्रद्धालु

जमीन मिले तो हर सुविधा देने को तैयार

प्रदेश सरकार पुराने एसडीएम कार्यालय व तहसील चौक के पास लगती 4 कनाल भूमि को नगर परिषद के हवाले करें तो यहां सुविधाएं जुटाने में नगर परिषद सक्षम है।   इन स्थानों पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाई जा सकती हैं, ताकि यहां आने वाले भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो।

— अशोक शर्मा, अध्यक्ष नगर परिषद

4.30 करोड़ की पार्किंग बेकार

सुविधाएं देने के नाम पर गुप्त गंगा के समीप 4.30 करोड़ रुपए की लागत से पार्किंग का निर्माण तो मंदिर ट्रस्ट ने कर दिया, लेकिन उस स्थान पर पार्किंग बनाने का कोई औचित्य ही न था। इसी तरह  पुराना कांगड़ा मार्ग पर भी लाखों रुपए फूंक कर नगर परिषद ने पार्किंग का निर्माण बिना सोच समझ के शुरू किया और आज मजबूरन उस स्थल को लीज पर देना पड़ा है। आज पुलिस थाना कांगड़ा को गिराकर यहां नया थाना बनाने की प्रोपोजल है, लेकिन शहर के लोग इसे सही नहीं मानते हैं। क्योंकि पुलिस थाने को कहीं दूसरे स्थान पर बनाया जा सकता है, जबकि शहर के बीच में इस स्थान पर एक बड़ा प्रोजेक्ट बनाकर मां के भक्तों की तमाम जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए संयंत्र

शहर में करीब 3.30 टन कचरा रोजाना इकट्ठा होता है, जो कूड़ा संयंत्र में डाला जाता है । उसमें से कुछ की खाद तैयार कर ली जाती है और बाकी कचरे को मिट्टी डालकर दबा दिया जाता है । अभी यहां डस्टबिन की कमी है और आधुनिक डस्टबिन लगाने की जरूरत है । पंचायत क्षेत्रों में गंदगी डालने के लिए न तो ऐसी कोई व्यवस्था है और न ही कूड़ा उठाने का कोई प्रावधान है। नतीजतन शहर के आसपास बसे पंचायत क्षेत्रों के लोग भी गंदगी शहर के डस्टबिन में डालते हैं या फिर कूड़ा  खुले में फेंक दिया जाता है । ऐसे में पंचायत क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर कूड़े के ढेर बड़े होते जा रहे हैं। इस धार्मिक नगरी में शहर के साथ लगती पंचायतों में डस्टबिन रखने और वहां से कूड़ा उठाने का प्रावधान हो,तो यात्री यंहा से  एक अच्छा संदेश लेकर जा सकते हैं।

स्नानघाट का नहीं कोई फायदा 

बाइपास पर स्थित बाणगंगा स्थल पर मां के भक्त आते हैं, लेकिन यहां कोई भी सुविधा श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध न करवाई गई है। दीगर है कि कांगड़ा में एक ही ओपन स्पेस बचा है, जहां धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुछ किया जा सकता है। इस स्थल पर भी लाखों रुपए फूंक कर स्नान घाट का निर्माण पर्यटन विभाग ने किया था, लेकिन न तो स्नानघाट बन पाया और न ही उसका कोई लाभ मां के भक्तों को मिला। शहर के लोग पुराना कांगड़ा मार्ग पर जाते हैं, लेकिन इस स्थल को भी माल रोड के तर्ज पर विकसित न किया जा सका है।

नवरात्रि में भक्तों का महामेला

चैत्र  और शरद नवरात्र के दौरान यहां माता के भक्तों की भीड़ बढ़ती है और चौकियों के दौरान भी यहां माता के भक्तों की भीड़ उमड़ती  है। इस दौरान हालांकि  व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मंदिर ट्रस्ट व पुलिस प्रशासन भारी इंतजाम करता है। बावजूद उसके यहां व्यवस्था चरमरा जाती है, चौकियों के दौरान पड़ोसी राज्य पंजाब से आए बाइकर और मालवाहक वाहनों में सफर करने वाले यात्री प्रशासन के लिए आफत खड़ी करते हैं तो वहीं स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी बढ़ जाती हैं । चैत्र नवरात्र के दौरान भी भक्तों की भीड़ बढ़ती है। दरअसल इन नवरात्र में आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग यहां माता के दर्शनों के लिए आता है। मां के ये भक्त साधन संपन्न नहीं होते हैं और अधिकांश यात्री या तो सस्ती सरायों में या सड़कों पर ही सो जाते हैं ,जो कि एक बड़ा खतरा है । वैसे यहां यात्रियों के ठहरने  के लिए होटल और सराय मौजूद हैं, लेकिन सराय और धर्मशाला में मनमाने दाम रात्रि ठहरने के वसूले जाते हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है।

आमदनी छह करोड़

मंदिर की कुल वार्षिक आमदनी करीब छह करोड़ रुपए है।  मंदिर की यह आय श्रद्धालुओं के चढ़ावे के अलावा दुकानों और मकानों के किराए तथा यात्री सदन और यात्री निवास में ठहरने वाले श्रद्धालुओं द्वारा होती है।

माता के दरबार में एडीबी के सहयोग से लग रही इंटरलॉक टाइल

एशियन डिवेलपमेंट बैंक द्वारा माता के बाग वाले स्थल पर पार्क का निर्माण व शहर में इंटरलॉक टाइल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर ट्रस्ट की बात की जाए, तो सामुदायिक भवन का कार्य प्रगति पर है। निफ्ट के सहयोग से सौंदर्यीकरण की योजनाएं सिरे चढ़ाई जा रही हैं । मंदिर की वेबसाइट भी तैयार हो चुकी है । संग्रहालय बनाने की दिशा में कोई सकारात्मक कदम न उठाया गया है, न ही बज्रेश्वरी घाट का उद्धार करने की जरूरत समझी गई है । माता के मंदिर में मार्बल बिछाने की भी योजना थी, उसे भी अमलीजामा नहीं पहनाया गया है । मंदिर मार्ग पर कनोपी बदलने की भी प्रोपोजल थी,जो ठुस्स होकर रह गई है। बाइपास पर श्रद्धालुओं के लिए बाथिंग घाट, टॉयलट ब्लॉक, कैंटीन भी न बन सकी है । यहां पर्यटन विभाग का 20 लाख रुपया जरूर मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से स्नान घाट के लिए बर्बाद किया गया, जो कि अब उजड़ कर रह गया है।

पार्किंग, शॉपिंग कांप्लेक्स कैफे बने तो मिलेगी सुविधा

पुलिस थाना कांगड़ा को गिराकर यहां सुविधा केंद्र यात्रियों के लिए बनाया जाए और पुलिस थाना को शहर के बाहर बनाया जाए। मौजूदा पुलिस थाना वाले स्थल पर पार्किंग , शॉपिंग कांप्लेक्स, कैफे व यात्रियों के निःशुल्क ठहरने के लिए हाल बनाए जा सकते हैं। जहां यात्रियों के स्नान करने की सुविधा के साथ-साथ शौचालय और क्लॉक रूम का भी निर्माण हो सकता है । जहां तक मंदिर के भीतर आपातकाल से निपटने की बात है तो आपात द्वार हमेशा बंद रहता है। नवरात्र में भीड़ बढ़ने पर इस द्वार को खोलने की जरूरत है। इसके अलावा गर्भ गृह में यात्रियों की भीड़ न बढ़े इसे भी सुनिश्चित करना होगा । मंदिर मार्ग के अलावा अन्य गलियों वाले मार्गों को भी यात्रियों के चलने के अनुरूप बनाना होगा।

कांगड़ा में ओपन स्पेस… ढूंढते रह जाओगे

अंधाधुंध निर्माण ने बिगाड़ दी शहर की सूरत

माता बज्रेश्वरी देवी की नगरी कांगड़ा में अंधाधुंध निर्माण की वजह से खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है ।  कांगड़ा नगर परिषद क्षेत्र में ही मौजूदा समय में करीब अढ़ाई हजार मकान व 11 सौ दुकानें मौजूद हैं। इसके अलावा साथ लगते पंचायत के क्षेत्रों में भी दुकानों और मकानों की बाढ़ सी आ गई है । आने वाले समय में हालात क्या होंगे, यह समय से परे हैं । कांगड़ा से मटौर तक आलम यह है कि यहां दुकानें और शोरूम तो खुल गए, लेकिन पार्किंग की माकूल व्यवस्था नहीं है। नतीजतन लोग सड़क किनारे ही गाडि़यां खड़ी कर देते हैं, जिससे लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ता है । मंदिर मार्ग भी दिन-प्रतिदिन तंग होता जा रहा है। चामुंडा मंदिर की तर्ज पर मंदिर के आसपास के क्षेत्र को आधुनिक रूप दिया जा सकता है,लेकिन इस विषय पर न तो सरकारी तंत्र ने और न  ही मंदिर ट्रस्ट ने कोई कोशिशें की । कांगड़ा  शहर की बात करें या मंदिर के आसपास के क्षेत्र की व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है । इस धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण नगरी  को किस तरह योजनाबद्ध ढंग से विकसित किया जाए,इसके बारे किसी ने भी न  सोचा । अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय में स्थानीय लोगों व यहां  आने वाले श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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